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शिवसेना की हां पर टिका मोदी मंत्रिमंडल विस्तार का फैसला, केंद्र में मंत्री पद का प्रस्ताव

Fri, 01 Nov 2019 12:30 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Fri, 01 Nov 2019 12:30 AM IST
सार

  • सहयोगी को मनाने के लिए केंद्र में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का पद देने का प्रस्ताव
  • शिवसेना की हां के बाद जदयू के लिए भी यही फार्मूला अपनाएगी भाजपा
  • शीतकालीन सत्र से ठीक पहले हो सकता है मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार

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Modi cabinet expansion decision based on Shiv Sena nod, proposal for ministerial post in center

विस्तार

महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना के बीच जारी सियासी रस्साकशी में मोदी मंत्रिमंडल के पहले विस्तार की संभावना भी छिपी हुई है। दरअसल महाराष्ट्र की सत्ता का विवाद का हल निकालने के लिए भाजपा के फार्मूले में केंद्र में सहयोगी शिवसेना के लिए राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का प्रस्ताव भी है। अगर शिवसेना राजी हुई तो भाजपा दूसरी सहयोगी जदयू के लिए भी एक कैबिनेट और एक राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का पद देने का प्रस्ताव रखेगी। ऐसे में शीतकालीन सत्र से ठीक पहले या तत्काल बाद मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है।

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दरअसल महाराष्ट्र में भले ही शिवसेना मुख्यमंत्री पद और ढाई साल के कार्यकाल पर अड़ी हुई है, मगर अंदरखाने दोनों ही ओर से विवाद सुलझाने की कोशिशें भी हो रही हैं। शिवसेना की ओर से उद्घव ठाकरे की जगह एकनाथ शिंदे को विधायक दल का नेता चुने जाने से भी इस आशय का संकेत मिलता है। जाहिर तौर पर ठाकरे की जगह शिंदे को आगे कर शिवसेना ने प्रतीकात्मक रूप से सीएम पद का दावा छोड़ दिया है। इससे पहले शिवसेना की ओर से ठाकरे को भावी सीएम के रूप में दर्शाने वाले पोस्टर भी लगाए गए थे।
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गौरतलब है कि जदयू ने मंत्रिमंडल में शामिल होने के मामले में बुधवार को यू टर्न ले लिया था। पार्टी ने भाजपा के समक्ष मंत्रिमंडल में आनुपातिक हिस्सेदारी की मांग की है। अगर शिवसेना ने एक और राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के पद पर हामी भरी तो यही फार्मूला जदयू पर भी लागू होगा। क्योंकि दोनों ही दल के सांसदों की संख्या करीब करीब एक समान है।

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सबकुछ शिवसेना पर निर्भर

निकट भविष्य में मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार होगा या नहीं, इस संदर्भ में सारा दारोमदार शिवसेना के भावी रुख पर है। शिवसेना की हां के बाद पार्टी नई सहयोगी अन्नाद्रमुक, अपना दल सहित कुछ और दलों को सरकार में भागीदारी दे सकती है।

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