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ट्रिपल तलाक दिया तो होगी 3 साल की जेल, मोदी कैबिनेट ने बिल को दी मंजूरी

Fri, 15 Dec 2017 03:29 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला
टीम डिजिटल/ अमर उजाला Updated Fri, 15 Dec 2017 03:29 PM IST
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Modi cabinet approved triple talaq bill and set to be introduced in Parliament
केंद्रीय कैबिनेट ने शुक्रवार को 'मुस्लिम वीमेन प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरिज बिल' को मंजूरी दे दी। इसक बिल के तहत यदि पति, पत्नी को एक बार में तीन तलाक देता है तो उसे तीन साल की जेल हो सकती है। पति को जमानत भी नहीं मिल सकेगी। इसके अलावा पत्नी और बच्चों के लिए हर्जाना भी देना पड़ेगा।
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बता दें कि तीन तलाक पर केंद्र सरकार कड़ा रुख अपना रही है। सरकार यह कदम सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद तीन तलाक देने के मामलों को देखते हुए उठा रही है।
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एक बार में तीन तलाक पर ही लागू होगा कानून
संसद से बिल के पारित होने के बाद यह कानून सिर्फ एक बार में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) पर ही लागू होगा। यह कानून पीड़िता को खुद और अपने नाबालिग बच्चों के लिए भरण-पोषण और गुजारा भत्ता के लिए मजिस्ट्रेट के पास जाने की शक्ति देगा। पीड़िता नाबालिग बच्चों की कस्टडी भी मांग सकेगी। इस मामले पर मजिस्ट्रेट अंतिम फैसला लेंगे।

बिल मौजूदा शीतकालीन सत्र में होगा पेश

Modi cabinet approved triple talaq bill and set to be introduced in Parliament

अब सरकार इस बिल को मौजूदा शीतकालीन सत्र में पेश करेगी। मसौदा बिल को राय के लिए राज्य सरकारों को शुक्रवार को भेजा गया है। राज्यों को तत्काल अपना जवाब देने को कहा गया है। राज्यों की राय मिलने के बाद कानून मंत्रालय मसौदे को मंजूरी के लिए कैबिनेट के सामने पेश करेगा। 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 66 मामले 
सुप्रीम कोर्ट ने एक बार में तीन तलाक पर रोक लगाने के बावजूद ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। इस साल कोर्ट के फैसले के पहले 177 मामले सामने आए थे जबकि आदेश के बाद 66 मामले आए हैं। एक बार में तीन तलाक के मामले में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है। 

ये स्वरूप किए जाएंगे शामिल 
प्रस्तावित बिल में इस बात के विशेष प्रावधान किए गए हैं कि किसी भी स्वरूप में दिया गया तीन तलाक मौखिक, लिखित या इलेक्ट्रॉनिक जैसे ईमेल, एसएमएस या व्हाट्सएप गैरकानूनी और अमान्य होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक और मनमाना करार दिया था
अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने एक बार में तीन तलाक बोलकर शादी तोड़ने पर छह माह की रोक लगा दी थी। उसने इसे असंवैधानिक, मनमाना और एक पक्षीय करार दिया था। कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि वह इस पर कानून बनाए।

जम्मू-कश्मीर को छूट
प्रस्तावित बिल के अनुसार, नया कानून जम्मू-कश्मीर को छोड़कर पूरे देश पर लागू होगा। 

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