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पश्चिम बंगाल: सिंगूर भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन मामला, श्रम मंत्री मन्ना आपराधिक मामले में बरी
Wed, 23 Feb 2022 10:59 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: Amit Mandal
Updated Wed, 23 Feb 2022 10:59 PM IST
सार
पश्चिम बंगाल में सांसदों और विधायकों से जुड़े आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालत ने अपने आदेश में 30 अन्य लोगों के साथ मन्ना को आरोपों से बरी कर दिया।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : iStock
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विस्तार
एमपी/एमएलए अदालत ने बुधवार को पश्चिम बंगाल के श्रम मंत्री बेचाराम मन्ना और 30 अन्य को सिंगूर के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन 2006 से संबंधित एक आपराधिक मामले में बरी कर दिया। एक विपक्षी तृणमूल कांग्रेस नेता के रूप में मन्ना ने तब महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वाम मोर्चा सरकार के समय में हुगली जिले के सिंगूर से टाटा मोटर्स की नैनो कार फैक्ट्री को बाहर करने वाले आंदोलन में उनकी अहम भूमिका थी। उन पर पुलिस पर हमला करने और सामान्य स्थिति को बाधित करने की साजिश रचने का आरोप लगाया गया था।
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पश्चिम बंगाल में सांसदों और विधायकों से जुड़े आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालत ने अपने आदेश में 30 अन्य लोगों के साथ मन्ना को आरोपों से बरी कर दिया। आदेश सुनाए जाने के समय मंत्री और अन्य आरोपी अदालत में मौजूद थे। मन्ना ने बाद में संवाददाताओं से कहा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले सिंगूर आंदोलन के सिलसिले में उनके और अन्य के खिलाफ 68 मामले दर्ज किए गए थे। मेरे खिलाफ 68 मामलों में से यह आखिरी था। सभी मामलों के फैसले हमारे पक्ष में आए।
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मन्ना ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले एक निर्णय पारित किया था कि सिंगूर में भूमि अधिग्रहण नियमों के अनुसार नहीं था और बुधवार के आदेश से यह साबित हो गया है कि वाम मोर्चा शासन के दौरान उनके और अन्य के खिलाफ दर्ज मामले झूठे थे।
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