मंत्री नए, चुनौतियां पुरानी: किसी को उम्मीद ज्यादा, किसी को प्रधानमंत्री मोदी पर भरोसा ज्यादा
मंत्रिमंडल पुनर्गठन के दूसरे ही दिन अनुराग, राजकुमार, अश्विन वैष्णव, सिंधिया, पुरी, रिजिजू ने संभाला कामकाज। कृषि भवन में नौ एमओएस का पहला दिन मैनेज करने में अधिकारियों को छूटा पसीना, राज्यमंत्री का किसानों को मना लेने का आत्मविश्वास देखने के काबिल
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पुनर्गठित मोदी कैबिनेट के नए मंत्रियों को अपना कामकाज संभालने के साथ ही उन पुरानी चुनौतियों से जूझना पड़ेगा, जो पिछले दो साल से सरकार के लिए सिरदर्द पैदा कर रही हैं। इन मंत्रियों में कुछ को अपने ऊपर विश्वास और उम्मीद है तो कुछ को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर पूरा भरोसा है।
पेट्रोल-डीजल की बेतहाशा बढ़ती कीमतों, बेलगाम महंगाई, अंतहीन किसान आंदोलन, कोरोना के लगातार हमले, पटरी से उतरी अर्थव्यवस्था, बेराजगारी, शिक्षा व्यस्था में असंतुलन और बढ़ते जन असंतोष के बीच अगले आठ महीनों के बाद पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों जैसी चुनौतियों से पार पाने के लिए नए पुराने मंत्रियों को अभी से जुटना होगा।
नए सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कामकाज संभाला। कामकाज संभालते ही ट्विटर पर 15 लाख व्यूअरशिप की क्षमता वाले पीआईबी से धड़ाधड़ नौ ट्वीट आए। इसके बाद दूसरे मंत्रियों को भी जगह मिली। थोड़ी ही देर बाद नए आईटी और रेल मंत्री अश्विन वैष्णव ने कामकाज संभाला। वैष्णव ने ट्विटर को उसकी मर्यादा और सीमा बताई तथा कहा कि सोशल मीडिया को भारतीय कानून को मानना होगा।
मूल्यवृद्धि से पुरी का स्वागत
दिल्ली में पेट्रोल के 35 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी के साथ पेट्रोलियम मंत्रालय ने नए मंत्री हरदीप पुरी का स्वागत किया। नए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी कामकाज संभाल लिया है और शाम को सभी प्रधानमंत्री द्वारा बुलाई गई बैठक में शामिल होने के लिए पहुंचे। कानून मंत्री किरण रिजिजू लगातार फार्म में चल रहे हैं। उन्होंने आज भी मिली जिम्मेदारी को अपने अंदाज में स्वीकार किया। दो विदेश राज्यमंत्री मीनाक्षी लेखी और डॉ. राजकुमार रंजन सिंह ने भी अपना पदभार संभाल लिया।
कृषि भवन में अफरा-तफरी
सबसे बड़ी अफरा-तफरी कृषि भवन में दिखाई दी। कृषि भवन में ग्रामीण विकास मंत्री गिरिराज सिंह के साथ-साथ तीन मंत्रालयों के नौ राज्यमंत्रियों को पदभार संभालना था। राज्यमंत्रियों का ख्याल रखने में केंद्र सरकार के अधिकारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
कृषि राज्यमंत्री शोभा करांदलजे करीब 3.00 बजे कार्यभार ग्रहण करने पहुंचीं। शोभा के चेहरे का उत्साह देखने लायक था और उन्होंने भरोसा भी दिलाया कि किसानों से बात करके वह उन्हें समझाने, मनाने में सफल हो जाएंगी। एमओएस का यह आत्मविश्वास मंत्रालय के अधिकारियों को भी चौंका रहा था।
पुराने चेहरों ने रखा संयम और संतुलन
पहली बार कैबिनेट मंत्री के तौर पर कामकाज संभालने वालों में अश्विन वैष्णव हैं। वैष्णव के पास रेल और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय का प्रभार है। जितनी बड़ी जिम्मेदारी मिली है, वैष्णव कामकाज के पहले दिन उतने ही संजीदा दिखाई दिए। ग्रामीण विकास और पंचायतीराज मंत्रालय जैसे विभाग की जिम्मेदारी पाने वाले गिरिराज सिंह ने नई जिम्मेदारी संभालने के साथ राहुल गांधी पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया।
वहीं कानून मंत्री किरण रिजिजू, केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मंडाविया, सूचना एवं प्रसारण तथा युवा एवं खेल मामलों के मंत्री अनुराग ठाकुर ने प्रधानमंत्री के विश्वास के प्रति आभार जताया और उम्मीदों पर खरा उतरने के प्रयास को प्राथमिकता बताई। पुरुषोत्तम रुपाला, राजकुमार सिंह, भूपेन्द्र यादव, जी किशन रेड्डी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, हरदीप पुरी, धर्मेंद्र प्रधान सभी संजीदगी के साथ पहले दिन का कामकाज संभाला।
पहली बार केंद्र सरकार में मंत्री बनने चेहरों में एक खास उत्साह दिखाई दिया। शोभा करांदलजे के अलावा विदेश राज्यमंत्री मीनाक्षी लेखी और राजकुमार रंजन सिंह के भीतर भी जिम्मेदारी का जोश दिखाई दिया। पशुपति कुमार पारस और जद (यू) के कोटे से आरसीपी सिंह ने भी जिम्मेदारी संभाली। पशुपति कुमार पारस के आवास पर सुबह 10.30 बजे से ही इसकी रौनक साफ दिखाई दे रही थी।
उम्मीद है कि मंत्री प्रधानमंत्री और जनता की आशाओं पर खरे उतरेंगे
मंत्रियों ने पदभार संभाल लिया तो अब बारी अधिकारियों के समीक्षा की है। श्रम शक्ति भवन के अधिकारी तो ऊर्जा मंत्री राज कुमार सिंह की क्षमता से वाकिफ हैं। उनका कहना है कि हमारे मंत्री का दर्जा बढ़ा है। बाकी तो सबकुछ पहले जैसा ही है। लेकिन रेलवे और सूचना प्रौद्यगिकी को काफी उम्मीदें हैं। रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कोरोना की पहली और दूसरी लहर ने व्यवस्था को पटरी पर खड़ा कर दिया है। अब इसमें गति देनी है। वहीं पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ती कीमतों पर मंत्रालय के अधिकारी हंसकर चुप हो जाते हैं।
शिक्षा मंत्रालय को अपने नए मंत्री से नई शिक्षा नीति पर विशेष प्रयास की उम्मीद है। एक संयुक्त सचिव का कहना है कि यह हमारी प्राथमिकता में हैं और हमारे मंत्रालय की भी। देखना है यह कैसे आकार ले पाती है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के पत्र सूचना कार्यालय के अफसरों का कहना है कि कोरोना की दूसरी लहर के बाद सरकार के सामने चुनौती से इनकार नहीं किया जा सकता। केंद्र सरकार का इतने बड़े पैमाने पर मंत्रिमंडल में फेरबदल, बदलाव और विस्तार का फैसला लेना ही इसका साफ संदेश है। आगे का कुछ नहीं कह सकते। एक मंत्री के विशेष कार्यधिकारी का कहना है कि उम्मीद है आगे सब कुछ ठीक होगा।
चेहरा बदलने से क्या होगा? कामकाज के तरीके में बदलाव की जरूरत है
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री के साथ कभी मानव विकास मंत्रालय में अहम भूमिका निभा चुके सूत्र का कहना है कि चेहरा बदलने से क्या होगा? रिटायर होने से पहले उन्होंने तीन शिक्षा मंत्री देखे, लेकिन मंत्रालय के कामकाज में कुछ गुणात्मक बदलाव नहीं देखा। इसलिए अच्छे की उम्मीद कर सकते हैं, हालांकि कुछ खास नहीं होने वाला है।
पत्र सूचना कार्यालय के एक अफसर का कहना है कि वह तीन मंत्रालयों को पिछले कुछ साल से देख रहे हैं। अनुभव के आधार पर कह सकते हैं कि बहुत उम्मीद करना भी ठीक नहीं है। सूत्र का कहना है कि जबतक कामकाज की शैली को व्यवहारिक नहीं बनाया जाएगा, स्थितियों में किसी खास बदलाव की संभावना कम है।