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मेघालय: धूप हो या बारिश, सर्वजन तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने की प्रतिबद्धता

Thu, 27 Jun 2024 02:39 PM IST
अभिषेक दीक्षित यूएन हिंदी समाचार
यूएन हिंदी समाचार Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Thu, 27 Jun 2024 02:39 PM IST
सार

माओसिनराम, बरसाती इलाका है, जहां सालाना औसतन 11,872 मिमी वर्षा होती है। लगातार होती यह बारिश खासतौर पर मई से अक्तूबर तक चलने वाले वर्षा के मौसम अधिक तेज होती है, जिससे इस पहाड़ी इलाके में रहने वाले समुदाय अक्सर लम्बे समय के लिए अलग-थलग पड़ जाते हैं। 

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Meghalaya: Be it sun or rain, commitment to provide health facilities to all
Meghalaya - फोटो : UN

विस्तार

मेघालय राज्य में पूर्वी खासी पहाडी जिले की सबडिवीजन माओसिनराम के कैनमिसौ गांव के सामुदायिक केंद्र में बहुत चहल-पहल है, लेकिन यहां कोई शादी-ब्याह, नाटक या फिल्म नहीं चल रही है, जिसकी वजह से गांववासी अपने घरों व खेतों को छोड़कर यहां आ पहुंचे हैं, बल्कि इस चहल-पहल की वजह है, राज्य सरकार द्वारा संचालित मासिक स्वास्थ्य क्लीनिक।

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माओसिनराम सामुदायिक केंद्र (CHC) के स्वास्थ्यकर्मियों के आने की खबर फैलते ही 1,389 लोगों की आबादी वाले इस गांव की आधी आबादी को जगह देने में सक्षम, इसका हॉल खचाखच भर गया। स्वास्थ्यकर्मियों की यह टीम, दवाइयां, टीके व निगरानी यंत्र लेकर आती है और समुदाय को उनके गांव के भीतर मुफ्त बुनियादी चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करवाई जाती हैं।
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पहुंचने के लिए कठिन रास्ता
माओसिनराम, बरसाती इलाका है, जहां सालाना औसतन 11,872 मिमी वर्षा होती है। लगातार होती यह बारिश खासतौर पर मई से अक्तूबर तक चलने वाले वर्षा के मौसम अधिक तेज होती है, जिससे इस पहाड़ी इलाके में रहने वाले समुदाय अक्सर लम्बे समय के लिए अलग-थलग पड़ जाते हैं। 
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स्वास्थ्य टीम का नेतृत्व करने वाले, माओसिनराम केंद्र CHC के चिकित्सा अधिकारी, डॉक्टर आर सुचियांग ने बताया कि माओसिनराम स्वास्थ्य केंद्र की टीम, दुर्गम इलाकों में स्थित इन पांच गांव समूहों में मासिक आउटरीच सत्र आयोजित करते हैं और एक अतिरिक्त सत्र डॉमस्कांग के उपकेंद्र में आयोजित किया जाता है।

हालांकि, ये सभी गांव CHC के 5 किलोमीटर के दायरे में हैं, लेकिन पहाड़ी इलाका होने के कारण आवाजाही धीमी हो जाती है। क्लीनिक की हर एक साइट पर गाड़ी से व चढ़ाई करके जाना पड़ता है, जिसमें एक से दो घंटे लगते हैं और वो भी बारिश पर निर्भर करता है।  

बलखाती हुई सड़कों के कारण, कैनमिसौ गांव तक का सफर खासतौर पर बेहद चुनौतीपूर्ण है। दुर्गम क्षेत्र होने के कारण, CHC के कार्यबल को अपनी कारें गांव से तीन किलोमीटर पहले छोड़कर, गांव के ड्राइवरों द्वारा चलाई जाने वाली छोटी टैक्सियां लेनी पड़ती हैं, जो खड़ी, लहराती सड़कों पर गाड़ी चलाने में माहिर होते हैं।

आखिर में सामुदायिक केंद्र तक पहुंचने के लिए लगभग 100 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, जो गांव के बीच से गुजरती हैं। इस रास्ते पर स्थानीय बांस से झाड़ू व टोकरियां बुनते, अपने कुटीर उद्योगों में व्यस्त या परिवारों को साथ बैठे हुए लोगों को देखा जा सकता है। अधिकतर गांववालों के पास छोटे खेत हैं, जहां वो सुपारी के पेड़, कटहल, काली मिर्त, पान के पत्ते, झाड़ू घास व बांस के पेड़ उगाते हैं।

सेहत सुविधाओं की उपलब्धता
कैनमिसौ गांव में बसने वाला खासी समुदाय, दुनिया के उन मातृवंशी समुदायों में से है, जहां धन-सम्पत्ति की विरासत महिलाओं को मिलती है। बाह होपिंग, अपनी पत्नी व बच्चों के साथ अपनी सास के घर में रहते हैं और टोकरियां बनाने में घर की महिलाओं की मदद करते हैं। वो कहते हैं कि हमारे परिवार में सभी लोग बांस का काम करते हैं- मेरी सास, मेरी पत्नी, उसकी बहन और मैं।

माओसिनराम CHC की महिला स्वास्थ्य सहायक, बी लिंगडौ ने बताया कि टीकाकरण समेत मातृ व बाल सेवाओं के अलावा, अधिकतर शिकायतें संक्रमण, पाचन समस्याओं और उच्च रक्तचाप जैसे गैर-संक्रामक रोगों की होती हैं। साथ ही स्वास्थ्यकर्मी सेहत से जुड़ी कुछ खास चिंताओं को भी दूर करने की करते हैं, जैसेकि कैंसर की वजह बनने वाली सुपारी की लत, जो कि इस इलाक़े में व्यापक रूप से उगाई व खाई जाती है। 

35 वर्षीय थियांगहुन लंगपेन, छह बच्चों की मां हैं, जिनमें से सबसे बड़ा केवल 10 साल का है और सबसे छोटा, 22 महीने का। उनके सभी बच्चों का जन्म घर पर ही पारम्परिक दाईयों के जरिए हुआ है, लेकिन इसके बावजूद वो सुनिश्चित करती हैं कि इस स्वास्थ्य आउटरीच क्लीनिक पर उनके परिवार की नियमित स्वास्थ्य जांच हो।

पूर्वी खासी पहाडी जिले में स्वास्थ्य केंद्र या क्लीनिक में जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या बहुत कम है, राष्ट्रीय स्तर पर 88.6 प्रतिशत की औसत की तुलना में केवल 63.4 फीसदी ही है, लेकिन 2019-2020 के राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के अनुसार, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं का उपयोग करने वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।  

थियांगहुन लंगपेन, घर के पास ही विस्तृत स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराए जाने की सराहना करते हुए कहती हैं कि यहां मुझे अपने पूरे परिवार के लिए, दवाओं समेत सभी कुछ मिल जाता है। यहां आकर उन्होंने अपने बच्चों का टीकाकरण करवाया और सहायक मिडवाइफ नर्स को अपनी थकान के लक्षण भी बताए। नर्स ने उनके रक्तचाप व रक्त शर्करा की जांच करके, आगे की जांच के लिए डॉक्टर क पास भेज दिया। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य समर्थन नैटवर्क (NPSN) ने कैनमिसौ व निकटवर्ती इलाकों में खसरे के प्रकोप के विरुद्ध कार्रवाई में अहम भूमिका निभाई और मेघालय की सरकार को तकनीकी व निगरानी समर्थन प्रदान किया। इसमें खासतौर पर दुर्गम क्षेत्रों में टीकाकरण सेवाओं का विस्तार शामिल था।


यह समर्थन, कोविड-19 की रोकथाम समेत अन्य नियमित टीकाकरण का उचित कार्यान्वयन सुनिश्चित करवाने के नजरिये से बेहद महत्वपूर्ण रहा। भारत सरकार के सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम के तहत, लगभग 2.67 करोड़ बच्चों व 2.9 करोड़ गर्भवती महिलाओं का, रोकथाम-योग्य 12 बीमारियों से बचाव के लिए नि:शुल्क टीकाकरण किया जा चुका है। यह कार्यक्रम, विश्व की सबसे विशाल स्वास्थ्य पहलों में से है, जिसमें टीकाकरण के जरिए, बाल मृत्यु दर घटाने व बीमारियों की रोकथाम के प्रयास किए जा रहे हैं।

(नोट: यह लेख संयुक्त राष्ट्र हिंदी समाचार सेवा से लिया गया है।)

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