मराठवाडाः एक हफ्ते में 36 किसानों ने दे दी अपनी जान
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सूखे से जूझते महाराष्ट्र के मराठवाडा में किसानों का जिंदगी से हारने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सूखे के कारण तबाह होती फसलों और तंगहाली के कारण बीते एक हफ्ते में 36 से ज्यादा किसानों ने खुदकुशी कर ली है। इन मौतों के साथ ही इस साल खुदकुशी करने वाले किसानों का आंकड़ा 454 तक पहुंच गया है। आलम ये है कि मराठवाडा में हर सप्ताह 20 से 30 किसान खुदकुशी कर लेते हैं। जबकि सरकारें इस ओर से पूरी तरह आंखें मूंदे बैठी हुई हैं।
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार अधिकाररी भी मानते हैं मरने वालों में ज्यादातर फसलों की बर्बादी और आर्थिक समस्या के कारण जिंदगी से हार मान जाते हैं। बीते 16 मई तक इस साल किसानों की मौत का आंकड़ा 418 पार कर चुका था। अधिकारियों की मानें तो पिछले 16 महीनों में कुल 1548 किसान खुदकुशी कर चुके हैं।
ऐसा नहीं है मौत के ये आंकड़े किसी निजी संस्था की ओर से जारी किए गए हों, बल्कि सरकार की फाइलों में इन मौतों का हिसाब दर्ज है। औरंगाबाद के क्षेत्रीय आयुक्त की ओर से सोमवार को मराठवाडा के 8 जिलों के यह आंकड़े जारी किए गए।
मराठवाडा में हर सप्ताह 20-30 किसान दे देते हैं जान
इनमें बीड जिले में इस साल सबसे ज्यादा 81 लोगों की मौत जान देने के कारण हो चुकी है। तंगहाली और भूख से मरने वालों का आंकड़ा इससे अलग है। हालांकि अधिकारी मौतों के इस भंवर में भी आंकडों की बाजीगरी दिखाने से नहीं चूकते। वे दावा करते हैं कि इस साल मरने वालों का आंकड़ पिछले साल इसी अवधि में जान देने वालों की तुलना में काफी कम है।
बीड के बाद सबसे ज्यादा मौत नांदेड जिले में हुई है, जहां 70 से ज्यादा किसान इस साल खुदकुशी कर चुके हैं। सबसे चौंकाने वाला आंकडा उस्मानाबाद जिले का है जहां सरकार जीरो सुसाइड का दावा करती है वहां भी इस साल 59 किसान जिंदगी से हार मानकर अपनी जान दे चुके हैं। वहीं सर्वाधिक सूखे का संकट झेल रहा लातूर में 61 किसान खुदकुशी कर चुके हैं। जबकि जलना में 47, प्रभनी में 43 और हिंगोली जिले में 27 किसान अपनी जान दे चुके हैं।
वहीं इस संबंध में बात करने पर नांदेड के जिला कलेक्टर प्रशांत नरनावरे मानते हैं किसानों की मौत का यह आंकड़ा सचमुच काफी बड़ा है लेकिन सरकार इस दिशा में लगातार प्रयास कर रही है जिसका असर भी दिखा है।