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महाराष्ट्र के सात शहरों में जमकर हिंसा के बाद मराठा संगठनों ने वापस लिया बंद, माफ करो हमे

Thu, 26 Jul 2018 01:19 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 26 Jul 2018 01:19 PM IST
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Maratha organizations took back, I am sorry

सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण की मांग कर रहे मराठा संगठनों ने बंद के दौरान हिंसा भड़क जाने के बाद बंद वापस ले लिया है। मराठा संगठनों ने मुंबई के कई शहरों में हिंसा बढ़ जाने के कारण मुंबई के लोगों को हो रही दिक्कत के चलते माफी के साथ अपना बंद वापस ले लिया है। मराठा समन्वय समिति के पदाधिकारियों ने आंदोलन वापस लेने की घोषणा करते हुए कहा कि लोगों की दिक्कतों को देखते हुए बंद वापस लेने का फैसला किया है। पदाधिकारियों ने कहा कि मुंबई के लोगों को हुई परेशानी के लिए हम क्षमा मांगते हैं, लेकिन उनके पास दूसरा कोई विकल्प नहीं होने के कारण ऐसा करना पड़ा।

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वहीं, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस मुद्दे पर बातचीत के लिए तैयार हैं और मराठा आरक्षण को लेकर काफी गंभीर भी हैं। फडणवीस ने कहा है कि सरकार को इस मामले में कोर्ट के फैसले का इंतजार है। जिस तरह से आरक्षण के मुद्दे पर हिंसा और आत्महत्या हुई वो दुखद है।
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सीएम फडणवीस ने आंदोलनकारियों से अपील की है कि हिंसा की बजाए सरकार से बातचीत करें। इस बीच जहरीला पदार्थ खा लेने के एक और प्रदर्शनकारी की मौत हो गई। आपको बता दें कि मराठा समुदाय के लोगों ने बंद के दौरान सात जिलों में जमकर हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी की है।
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मराठा क्रांति मोर्चा के बंद के दौरान मुंबई, नवी मुंबई, ठाणे, पालघर, रायगढ़, नासिक और अहमदनगर में प्रदर्शनकारियों ने जमकर उत्पात मचाया। राजनीतिक तौर पर प्रभावी मराठा समुदाय महाराष्ट्र की आबादी में 30 फीसदी से ज्यादा हैं। नौकरियों और शिक्षा में 16 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर समुदाय ने सरकार का ध्यान खींचने के लिए प्रदेश में कई मूक मोर्चे भी निकाले थे।
 
 
मराठा समाज से चर्चा के लिए हमेशा तैयार : फडणवीस
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बीते बुधवार को कहा कि सरकार मराठा समाज के साथ चर्चा के लिए तैयार है। मराठा समाज को आरक्षण देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। सरकार ने कानून तैयार किया है, लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट ने इसे स्थगित कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर स्टे नहीं लगाया।
 

हिंसक भीड़ ने किसी को नहीं छोड़ा

भीड़ ने सात गाड़ियां फूंकीं, बीड में भाजपा विधायक के घर-दफ्तर पर पथराव। यवतमाल में शिवसेना नेता और पूर्व विधायक के साथ धक्का-मुक्की हुई। सायन-पनवेल हाईवे पर पुलिस की दो गाड़ियां फूंकीं गईं। मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे पर कलंबोली के पास पुलिस की चार गाड़ियों में तोड़फोड़ के बाद आग लगाने का भी असफल प्रयास किया गया।

ठाणे और जोगेश्वरी में ट्रेनें रोकी गईं जिसके चलते लोकल ट्रेनें कुछ घंटे तक बाधित रहीं। घणसोली स्टेशन पर उत्पात के चलते हार्बर लाइन की लोकल ट्रेन भी प्रभावित रही। मुंबई में पुलिस के सवा लाख जवान और विशेष पुलिस बल के करीब 30 हजार जवानों को तैनात किया गया था। रैपिड एक्शन फोर्स भी लगाई गई है।

मराठा आरक्षण के उग्र होने की क्या वजह है
मराठा आंदोलन करीब एक दशक पुराना है। ये समुदाय नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण की मांग रहा है। इनका कहना है कि इनके समुदाय का एक छोटा तबका ही सत्ता और समाज में ऊंची पैठ रखता है। ज्यादातर लोग बेहद गरीबी में जी रहे हैं। पिछली कांग्रेस-एनसीपी सरकार ने आरक्षण देने का फैसला लेते हुए विधेयक को विधानसभा में पास कर दिया था। पर सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी। कोर्ट ने पिछड़ा वर्ग आयोग से मराठा समाज की आर्थिक-सामाजिक स्थिति पर रिपोर्ट मांगी है, जिसके बाद ही कोई फैसला संभव है।

आखिर साइलेंट मार्च निकालने वाले मराठा क्यों भड़के हुए हैं?
दरअसल मराठा समुदाय सरकार के रवैये से नाखुश है। हालिया हिंसा की वजह राज्य सरकार की एक घोषणा है, जिसमें कहा गया है कि सरकार जल्द ही 72 हजार सरकारी नौकरियां के लिए आवेदन निकालेगी। मराठा समुदाय चाहता है कि इस भर्ती अभियान सेे पहले उनको आरक्षण मिल जाना चाहिए। इसे लेकर प्रदर्शन शुरू हुए। औरंगाबाद जिले में एक व्यक्ति ने नदी में कूदकर जान दे दी। इस घटना के बाद आंदोलन उग्र हो गया है।

मराठा समुदाय राजनीतिक तौर पर प्रभावशाली 
महाराष्ट्र में करीब 30 प्रतिशत की आबादी वाला मराठा समुदाय राजनीतिक तौर पर प्रभावशाली समुदाय है और वह नौकरियों एवं शिक्षा में आरक्षण की मांग कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित 50% सीमा के पार जाकर आरक्षण देना संभव नहीं है। अगर ओबीसी निर्धारित 27% कोटे में ही मराठों को शामिल करने का जोखिम लेती है तो ओबीसी आंदोलन शुरू हो सकता है। इससे पहले, समुदाय के सदस्यों ने अपनी मांगों के समर्थन में विभिन्न जिलों में कई रैलियां की थी।पिछले साल मुंबई में मराठा क्रांति मोर्चा ने इस सिलसिले में एक विशाल रैली आयोजित की थी। 

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