यूएन सुरक्षा परिषद में मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के लिए तैयार हैं ये देश
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संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएनओ) की सुरक्षा परिषद के 15 सदस्यों में से 14 सदस्य राष्ट्र, पाकिस्तान के मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के लिए तैयार हैं। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिवेश में सुरक्षा परिषद के दस अस्थायी सदस्य बेल्जियम, कोत दिव्वार आईवरी कोस्ट, डोमेनिकन रिपब्लिक, इक्वेटोरियल गिनी, जर्मनी, इंडोनेशिया, कुवैत, पेरू, पोलेंड और साउथ अफ्रीका ने मसूद अजहर को 'ग्लोबल टैरेरिस्ट' घोषित करने के प्रस्ताव पर अपना समर्थन दिया है। वीटो पावर वाले तीन देश, अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने तो खुद यह प्रस्ताव सुरक्षा परिषद में पेश किया है। रुस भी इस प्रस्ताव पर राजी है। सभी की नजरें वीटो पावर वाले राष्ट्र चीन पर लगी हैं। वह पाकिस्तान के समर्थन में पहले भी तीन बार इस प्रस्ताव को गिरा चुका है।
बता दें कि पुलवामा हमले के बाद यूएन सुरक्षा परिषद में जब आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की कड़ी निंदा का प्रस्ताव आया तो चीन ने भी उसका समर्थन किया था। हालांकि मसूद अजहर की वैश्विक आतंकवादी के रूप में सूचीबद्धता के बारे में चीन अभी तक अपना रुख स्पष्ट नहीं कर रहा है। संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने बुधवार को यह प्रस्ताव दे दिया है कि जैश-ए-मोहम्मद को सुरक्षा परिषद ब्लैक लिस्ट करे। इस प्रस्ताव में कहा गया है कि आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर पर हथियारों के व्यापार और वैश्विक यात्रा से जुड़े प्रतिबंध लगाने के साथ उसकी परिसंपत्ति भी फ्रीज की जाए।
सैन्य विशेषज्ञ राज कादियान का कहना है कि जिस तरह से आतंकवाद के मामले में अब पाकिस्तान पर चारों ओर से दबाव पड़ रहा है, वैसे ही चीन पर भी थोडा दबाव तो बढ़ा है। चूंकि आतंकवाद भारत-पाकिस्तान के अलावा दुनिया के दूसरे देशों के लिए भी एक बड़ा खतरा है, इसलिए चीन को इस दिशा में सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे देनी चाहिए। भारत-पाकिस्तान मामलों के विशेषज्ञ सरल शर्मा बताते हैं कि आतंकवाद के मसले पर दुनिया के पचास से ज्यादा देश भारत के साथ खड़े हैं। हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि चीन ने अतीत में भी सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव को खत्म करा दिया था। इससे पहले भी मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी के रूप में नामित करने के लिए सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव आ चुका है।
चीन और पाकिस्तान 'ऑल वेदर फ्रेंड्स' हैं। बीजिंग, नई दिल्ली को एक प्रतियोगी के तौर पर देखता है। चीन की यह सोच भी रहती है कि भारत उसके लिए खतरा बन सकता है। वजह, भारत के पास आर्थिक पावर ज्यादा है। भारत में मध्यम वर्ग की आर्थिक क्षमता जिस तेजी से बढ़ी है, उससे यहां एक बड़े बाजार की संभावनाएं बनती जा रही हैं। चीन यह नहीं चाहता है कि भारत उससे आगे निकल जाए। यही वजह है कि वह पाकिस्तान को आर्थिक मदद देकर भारत के खिलाफ अपने छिपे एजेंडे को आगे बढ़ाता रहता है। मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित न कराने के पीछे यह एक बड़ी वजह है पाकिस्तान को खुश करना। यह बात सही है कि वर्तमान वैश्विक परिद्रश्य में चीन पर दबाव बढ़ा है।
1999 में भारत की कैद से रिहा होते ही मसूद ने कई बड़े आतंकी हमले किए हैं
मसूद अजहर भारत की कैद में था। दिसंबर 1999 में जब इंडियन एयरलाइंस की उड़ान IC-814 को अपहृत किया गया तो यात्रियों की सकुशल वापसी के लिए अटल बिहारी वाजपेयी सरकार द्वारा मसूद अजहर और उसके दो साथियों को रिहा किया गया था। मसूद के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने 14 फरवरी को पुलवामा के अवंतीपोरा में सीआरपीएफ काफिले पर हुए आत्मघाती बम विस्फोट की जिम्मेदारी ली थी। इससे पहले जनवरी 2016 में पठानकोट में भारतीय वायु सेना बेस पर हमला और दिसंबर 2001 में संसद पर हमला भी मसूद द्वारा कराया गया था।