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मनोहर परिकर ने ‘भस्मासुर’ से की क्वेटा हमले की तुलना
अमर उजाला ब्यूरो/ नई दिल्ली
Updated Tue, 25 Oct 2016 10:21 PM IST
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रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर
- फोटो : amar ujala
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रक्षामंत्री मनोहर परिकर ने क्वेटा के पुलिस प्रशिक्षण अकादमी पर हुए आतंकी हमले की तुलना ‘भस्मासुर’ से करते हुए हमले जान गंवाने वालों पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं बताती हैं कि किसी को भी ‘अनियंत्रित हिंसा’ नहीं करनी चाहिए। परिकर ने हमले में भारत की संलिप्तता के पाकिस्तानी आरोपों से भी इंकार किया और कहा कि भारत हिंसा में ही भरोसा नहीं करता, और ऐसी हिंसा पर तो बिल्कुल भी नहीं।
क्वेटा हमले के बारे में पूछने पर परिकर ने स्पष्ट किया कि वह किसी देश की तुलना असुर से नहीं कर रहे हैं, बल्कि भारत में भस्मासुर राक्षस की कहावत का जिक्र कर रहे हैं जो अपनी जिन शक्तियों से दूसरों को डराता था उन्हीं के उपयोग से एक दिन उसका खुद नाश हो गया। वह नौसेना कमांडरों के सम्मेलन के इतर संवाददाताओं से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आतंकवाद में संलिप्त नॉन स्टेट एक्टर्स को खत्म किया जाना चाहिए।
क्या है लश्कर-ए-झांगवी गुट
मेजर जनरल शेर अफगान के मुताबिक तीनों फिदायीन हमलावर लश्कर-ए-झांगवी आतंकी गुट के थे। यह पाकिस्तान तालिबान से जुड़ा सुन्नी आतंकी गुट है, जिसे अमेरिका द्वारा आतंकी संगठन घोषित किया जा चुका है। संगठन को कई बार शियाओं पर जानलेवा हमलों का जिम्मेदार ठहराया गया है। इसकी स्थापना 1996 में सिपाह-ए-सहाबा पाकिस्तान के एक कार्यकर्ता रियाज बसरा की तत्कालीन नेतृत्व से अनबन के बाद हुई थी।
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क्वेटा हमले के बारे में पूछने पर परिकर ने स्पष्ट किया कि वह किसी देश की तुलना असुर से नहीं कर रहे हैं, बल्कि भारत में भस्मासुर राक्षस की कहावत का जिक्र कर रहे हैं जो अपनी जिन शक्तियों से दूसरों को डराता था उन्हीं के उपयोग से एक दिन उसका खुद नाश हो गया। वह नौसेना कमांडरों के सम्मेलन के इतर संवाददाताओं से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आतंकवाद में संलिप्त नॉन स्टेट एक्टर्स को खत्म किया जाना चाहिए।
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क्या है लश्कर-ए-झांगवी गुट
मेजर जनरल शेर अफगान के मुताबिक तीनों फिदायीन हमलावर लश्कर-ए-झांगवी आतंकी गुट के थे। यह पाकिस्तान तालिबान से जुड़ा सुन्नी आतंकी गुट है, जिसे अमेरिका द्वारा आतंकी संगठन घोषित किया जा चुका है। संगठन को कई बार शियाओं पर जानलेवा हमलों का जिम्मेदार ठहराया गया है। इसकी स्थापना 1996 में सिपाह-ए-सहाबा पाकिस्तान के एक कार्यकर्ता रियाज बसरा की तत्कालीन नेतृत्व से अनबन के बाद हुई थी।
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बलूचिस्तान में अशांति का दोष भारत पर मढ़ता है पाक
बलूचिस्तान में पिछले एक दशक से भी अधिक समय से गुटीय हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं। पाकिस्तान अक्सर यहां के बुरे हालातों के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराता रहा है। जबकि सच्चाई यह है कि बलोचों के आंदोलन को दबाने के लिए पाकिस्तान हरसंभव कोशिशें करता रहा है। मोदी ने जब बलूचिस्तान का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया तब से बलोच आंदोलनकारी भारत की तरफ उम्मीद भरी निगाहों से देखने लगे हैं।
पाक में साल तीसरा बड़ा आतंकी हमला
पाकिस्तान पर इस साल का यह तीसरा सबसे बड़ा आतंकी हमला है। इससे पहले 27 मार्च को गुलशन-ए-इकबाल पार्क पर हुए फिदायीन हमले में कम से कम 74 लोगों की मौत हुई थी और 338 घायल हुए थे। हाल ही में अगस्त में क्वेटा के सिविल अस्पताल पर फिदायीन हमले में 73 लोगों की मौत हुई थी। इस हमले की जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान से अलग हुए एक गुट और आईएस ने ली थी। इस हमले में अधिकतर वकील प्रभावित हुए थे।
दो दिन पहले 2 कोस्ट गार्ड को मार गिराया था
यह हमला उस घटना के एक दिन बाद हुआ है, जिसमें अलगाववादी संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी के बंदूकधारियों ने दो कोस्ट गार्ड का गोली मार कर उनकी हत्या कर दी थी। यह घटना इसी प्रांत में ग्वादर पोर्ट के करीब जिवानी टाउन में हुई थी। बलूचिस्तान में आतंकी सिक्युरिटी फोर्सेस और सरकारी दफ्तरों पर कई हमले कर चुके हैं। यहां एक दशक से ज्यादा वक्त से बगावत चल रही है। यहां कई लोगों को मारा गया है।
पाक में साल तीसरा बड़ा आतंकी हमला
पाकिस्तान पर इस साल का यह तीसरा सबसे बड़ा आतंकी हमला है। इससे पहले 27 मार्च को गुलशन-ए-इकबाल पार्क पर हुए फिदायीन हमले में कम से कम 74 लोगों की मौत हुई थी और 338 घायल हुए थे। हाल ही में अगस्त में क्वेटा के सिविल अस्पताल पर फिदायीन हमले में 73 लोगों की मौत हुई थी। इस हमले की जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान से अलग हुए एक गुट और आईएस ने ली थी। इस हमले में अधिकतर वकील प्रभावित हुए थे।
दो दिन पहले 2 कोस्ट गार्ड को मार गिराया था
यह हमला उस घटना के एक दिन बाद हुआ है, जिसमें अलगाववादी संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी के बंदूकधारियों ने दो कोस्ट गार्ड का गोली मार कर उनकी हत्या कर दी थी। यह घटना इसी प्रांत में ग्वादर पोर्ट के करीब जिवानी टाउन में हुई थी। बलूचिस्तान में आतंकी सिक्युरिटी फोर्सेस और सरकारी दफ्तरों पर कई हमले कर चुके हैं। यहां एक दशक से ज्यादा वक्त से बगावत चल रही है। यहां कई लोगों को मारा गया है।