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Manipur: नशीली दवाओं के खतरे से निपटने पर सरकार गंभीर, डीजीपी ने बताए उपाय, भारत-म्यांमार सीमा पर कड़ी सुरक्षा
Sat, 21 Oct 2023 10:35 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sat, 21 Oct 2023 10:35 PM IST
सार
सीमावर्ती राज्य होने के कारण मणिपुर सुरक्षा कारणों से बेहद संवेदनशील प्रदेश है। प्रदेश की पुलिस के मुखिया ने बताया कि राज्य सरकार नशीली दवाओं के खतरे से निपटने पर बहुत गंभीर है।
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मणिपुर पुलिस
- फोटो : ANI
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विस्तार
मणिपुर पुलिस के महानिदेशक राजीव सिंह ने कहा है कि राज्य में मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह की सरकार और पुलिस ने नशीली दवाओं की समस्या से निपटने की दिशा में बेहद गंभीरता से प्रयास किए हैं। उन्होंने कहा कि भारत-म्यांमार सीमा पर सुरक्षा कड़ी करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। बता दें की अंतरराष्ट्रीय सीमा होने के कारण राज्य में मादक पदार्थों की तस्करी के कई मामले सामने आते रहते हैं।
नशीली दवाओं के खिलाफ सरकार और पुलिस का एक्शन
डीजीपी राजीव सिंह ने गुरुवार को इंफाल में पत्रकारों से कहा, नशीली दवाओं का खतरा न केवल मणिपुर, बल्कि सभी पूर्वोत्तर राज्यों को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने कहा, "हम नशीली दवाओं के खतरे को लेकर बहुत चिंतित हैं। केंद्र और राज्य दोनों इस समस्या से निपटने के लिए बहुत गंभीर हैं।"
398 किमी लंबी है अंतरराष्ट्रीय सीमा
गौरतलब है कि म्यांमार के साथ मणिपुर की 398 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा के 10 प्रतिशत से भी कम हिस्से पर बाड़ लगाई गई है। क्षेत्र में सीमा पार से होने वाली अवैध गतिविधियों के लिहाज से ये इलाके बेहद संवेदनशील हैं।
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क्यों और कब बदले गए पुलिस महानिदेशक
बता दें कि राजीव सिंह को विगत 3 मई को मणिपुर में हुई जातीय हिंसा के लगभग एक महीने बाद जून में डीजीपी के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्होंने पूर्व डीजीपी पी डोंगेल का स्थान लिया, जो अब गृह विभाग में विशेष कर्तव्य अधिकारी (ओएसडी) हैं।
सीएम के साथ हुई बैठक, इंटरनेशनल बॉर्डर पर 10 किमी बाड़
राजीव सिंह ने कहा, भारत-म्यांमार सीमा पर निगरानी मजबूत करने के लिए कई पहल की गई हैं। कुल मिलाकर, 34 पुलिस चौकियां मंजूर की गई हैं। करीब 15 दिन पहले, मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह, मुख्य सचिव विनीत जोशी के साथ बैठक हुई। सीमा पर बाड़ लगाने पर चर्चा हुई। अब तक, सीमा के 10 किमी हिस्से में बाड़ लगा दी गई है।
समाधान अकेले पुलिस नहीं कर सकती
डीजीपी ने हिंसा प्रभावित राज्य में शांति बहाल करने के लिए सुरक्षा बलों के साथ सहयोग करने के लिए लोगों को धन्यवाद दिया। राजीव सिंह ने कहा, "हम जानते हैं कि समस्या का समाधान केवल पुलिस नहीं कर सकती। समाज तो भी शांति बहाल करने में प्रमुख भूमिका निभानी होगी। हमें उम्मीद है कि दोनों समुदाय आगे आएंगे और मतभेदों को सुलझाएंगे।"
पुलिस को आत्मनिर्भर बनाने पर धयान, सीबीआई-एनआईए का पूरा सहयोग
डीजीपी ने कहा, हम पुलिस बल को आधुनिक बनाने का प्रयास कर रहे हैं। आपने देखा होगा कि जटिल मामले आम तौर पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिए जाते हैं या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा की जाती है। सिंह ने कहा, हम चाहते हैं कि मणिपुर पुलिस आत्मनिर्भर हो और ऐसे मामलों की जांच करे।
हालात सामान्य बनाने के लिए पुलिस ने कैसे प्रयास किए
डीजीपी ने लोगों से अपील की कि वे सशस्त्र उपद्रवियों और असामाजिक लोगों के बहकावे में न आएं जो हालात खराब करने और अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, हताहतों की संख्या में गिरावट आई है। पुलिस की पहली प्राथमिकता हिंसा से संबंधित मौतों को कम करना है। सुरक्षाबल ऐसा करने में सक्षम भी हैं। हिंसा के स्तर में कमी आई है। सीमांत क्षेत्र में कृषि गतिविधियों को सुरक्षा प्रदान की गई है। गोलीबारी भी कम हुई है।
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नशीली दवाओं के खिलाफ सरकार और पुलिस का एक्शन
डीजीपी राजीव सिंह ने गुरुवार को इंफाल में पत्रकारों से कहा, नशीली दवाओं का खतरा न केवल मणिपुर, बल्कि सभी पूर्वोत्तर राज्यों को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने कहा, "हम नशीली दवाओं के खतरे को लेकर बहुत चिंतित हैं। केंद्र और राज्य दोनों इस समस्या से निपटने के लिए बहुत गंभीर हैं।"
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398 किमी लंबी है अंतरराष्ट्रीय सीमा
गौरतलब है कि म्यांमार के साथ मणिपुर की 398 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा के 10 प्रतिशत से भी कम हिस्से पर बाड़ लगाई गई है। क्षेत्र में सीमा पार से होने वाली अवैध गतिविधियों के लिहाज से ये इलाके बेहद संवेदनशील हैं।
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क्यों और कब बदले गए पुलिस महानिदेशक
बता दें कि राजीव सिंह को विगत 3 मई को मणिपुर में हुई जातीय हिंसा के लगभग एक महीने बाद जून में डीजीपी के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्होंने पूर्व डीजीपी पी डोंगेल का स्थान लिया, जो अब गृह विभाग में विशेष कर्तव्य अधिकारी (ओएसडी) हैं।
सीएम के साथ हुई बैठक, इंटरनेशनल बॉर्डर पर 10 किमी बाड़
राजीव सिंह ने कहा, भारत-म्यांमार सीमा पर निगरानी मजबूत करने के लिए कई पहल की गई हैं। कुल मिलाकर, 34 पुलिस चौकियां मंजूर की गई हैं। करीब 15 दिन पहले, मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह, मुख्य सचिव विनीत जोशी के साथ बैठक हुई। सीमा पर बाड़ लगाने पर चर्चा हुई। अब तक, सीमा के 10 किमी हिस्से में बाड़ लगा दी गई है।
समाधान अकेले पुलिस नहीं कर सकती
डीजीपी ने हिंसा प्रभावित राज्य में शांति बहाल करने के लिए सुरक्षा बलों के साथ सहयोग करने के लिए लोगों को धन्यवाद दिया। राजीव सिंह ने कहा, "हम जानते हैं कि समस्या का समाधान केवल पुलिस नहीं कर सकती। समाज तो भी शांति बहाल करने में प्रमुख भूमिका निभानी होगी। हमें उम्मीद है कि दोनों समुदाय आगे आएंगे और मतभेदों को सुलझाएंगे।"
पुलिस को आत्मनिर्भर बनाने पर धयान, सीबीआई-एनआईए का पूरा सहयोग
डीजीपी ने कहा, हम पुलिस बल को आधुनिक बनाने का प्रयास कर रहे हैं। आपने देखा होगा कि जटिल मामले आम तौर पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिए जाते हैं या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा की जाती है। सिंह ने कहा, हम चाहते हैं कि मणिपुर पुलिस आत्मनिर्भर हो और ऐसे मामलों की जांच करे।
हालात सामान्य बनाने के लिए पुलिस ने कैसे प्रयास किए
डीजीपी ने लोगों से अपील की कि वे सशस्त्र उपद्रवियों और असामाजिक लोगों के बहकावे में न आएं जो हालात खराब करने और अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, हताहतों की संख्या में गिरावट आई है। पुलिस की पहली प्राथमिकता हिंसा से संबंधित मौतों को कम करना है। सुरक्षाबल ऐसा करने में सक्षम भी हैं। हिंसा के स्तर में कमी आई है। सीमांत क्षेत्र में कृषि गतिविधियों को सुरक्षा प्रदान की गई है। गोलीबारी भी कम हुई है।