फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Mamata offers Rs 2 lakh as compensation for Uri martyrs, Father denies

उड़ी शहीद के पिता बोले- 'नहीं लेंगे दो लाख मुआवजा'

Fri, 23 Sep 2016 05:01 AM IST
रीता तिवारी/ अमर उजाला, कोलकाता
रीता तिवारी/ अमर उजाला, कोलकाता Updated Fri, 23 Sep 2016 05:01 AM IST
विज्ञापन
Mamata offers Rs 2 lakh as compensation for Uri martyrs, Father denies
- फोटो : file photo

कश्मीर घाटी के उड़ी स्थित सेना के शिविर पर आतंकी हमले में शहीद जवान गंगाधर दोलुई के पिता ओंकारनाथ दोलुई ने राज्य सरकार की ओर से घोषित दो लाख रुपये के मुआवजे और होमगार्ड की नौकरी को नाकाफी बताते हुए इसे लेने से इनकार कर दिया है। दोलुई परिवार हावड़ा जिले के जमुना बलिया गांव का रहने वाला है। उन्हें अपने शहीद बेटे के अंतिम संस्कार के लिए 10 हजार रुपये की रकम उधार लेनी पड़ी थी।

विज्ञापन


दो साल पहले बेटे के सेना में भर्ती होने से पहले तक 64 साल के दोलुई दैनिक मजदूर थे। बेटे के अंतिम संस्कार के बाद उन्होंने पत्रकारों से कहा कि मुआवजे की यह रकम शहीद का अपमान है। सरकार ने हमें दो लाख रुपये देने का एलान किया है। लेकिन जहरीली शराब पीकर मरने वालों के परिजनों को भी इतनी ही रकम दी जाती है। दोलुई ने कहा कि सरकार ने इस मुआवजे के अलावा उनके छोटे बेटे को होमगार्ड की नौकरी देने का प्रस्ताव दिया है। लेकिन हम इससे इंकार कर देंगे।
विज्ञापन


मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीते मंगलवार को इस मुआवजे का एलान किया था। ध्यान रहे कि उत्तर प्रदेश और राजस्थान सरकारों ने शहीदों के परिजनों को 20-20 लाख का मुआवजा देने का एलान किया है। बिहार व झारखंड ने भी क्रमश: 11 और 10 लाख रुपये देने की बात कही है। इस हमले में शहीद एक अन्य जवान विश्वजीत घोराई के बड़े भाई रंजीत घोराई ने फिलहाल मुआवजे के मुद्दे पर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। उसने कहा कि टीवी चैनलों के जरिए उनको मुआवजे की रकम की जानकारी मिली है। लेकिन हम फिलहाल इस मुद्दे पर बात करने की मनोदशा में नहीं हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

कम मुआवजे की घोषणा को लेकर घिरीं ममता

Mamata offers Rs 2 lakh as compensation for Uri martyrs, Father denies
उड़ी - फोटो : PTI
इस बीच, हावड़ा के तृणमूल कांग्रेस नेता और ममता बनर्जी मंत्रिमंडल के सदस्य अरूप राय ने कहा है कि मुआवजे का फैसला उनके हाथों में नहीं है। लेकिन साथ ही सरकार शहीदों के परिजनों को सरकारी नौकरी भी तो दे रही है। वैसे, राज्य में होम गार्ड के तौर पर काम करने वाले जवानों को रोजाना 375 रुपये मिलते हैं। लेकिन 90 दिनों की नौकरी के बाद उनको एक दिन के लिए कार्यमुक्त कर दिया जाता है। निरंतरता नहीं होने की वजह से वे पक्की नौकरी का दावा नहीं कर सकते। 

शहीद दोलुई के पिता ने कहा कि बेटे की नौकरी लगने से पहले वे रोजाना 170 रुपये कमाते थे और इसी से चार लोगों का पेट पालते थे। लेकिन अब वे काम की तलाश में निकलेंगे। ओंकारनाथ को इस बात का भारी अफसोस है कि 15 सितंबर को उनके बेटे ने जब अपनी मां को फोन किया था तो उन्होंने उससे बात नहीं की थी। तीन दिनों बाद उनका बेटा हमेशा के लिए सो गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed