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ममता सरकार Vs जगदीप धनखड़: राज्यपाल ने अनिश्चितकाल के लिए स्थगित की विधानसभा, एक दिन पहले राज्यसभा में उठा था मुद्दा
Sat, 12 Feb 2022 03:15 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव
Updated Sat, 12 Feb 2022 03:15 PM IST
सार
राज्यपाल ने इस आदेश को ट्विटर पर साझा करते हुए लिखा कि, संविधान के अनुच्छेद 174 से मिले अधिकारों के तहत अनिश्चितकाल के लिए विधानसभा को स्थगित करता हूं। दरअसल, इस अधिकार के तहत संसद या विधानसभा को भंग किए बिना उसे स्थगित किया जा सकता है।
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बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
पश्चिम बंगाल में राज्यपाल जगदीप धनखड़ और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच तनातनी जारी है। इस बीच राज्यपाल धनखड़ ने शनिवार को पश्चिम बंगाल की विधानसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया है। राज्यपाल ने इस आदेश को ट्विटर पर साझा करते हुए लिखा कि, "संविधान के अनुच्छेद 174 से मिले अधिकारों के तहत अनिश्चितकाल के लिए विधानसभा को स्थगित करता हूं। दरअसल, इस अधिकार के तहत संसद या विधानसभा को भंग किए बिना उसे स्थगित किया जा सकता है। इस आदेश के बाद विधानसभा का सत्र राज्यपाल की अनुमति के बिना नहीं बुलाया जा सकेगा।
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टीएमसी ने बताया असंवैधानिक
इधर, टीएमसी ने इस घटना को असंवैधानिक बताया है। वरिष्ठ सांसद सौगत राय ने कहा कि, राज्यपाल असंवैधानिक काम कर रहे हैं और उन्होंने विधानसभा सत्र को स्थगित करने का जो यह आदेश जारी किया है यह देश में एक अभूतपूर्व घटना है। इस दौरान उन्होंने संकेत दिए गए कि टीएमसी इस निर्णय के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी।
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राज्यसभा में उठा था धनखड़ का मुद्दा
इससे एक दिन पहले शुक्रवार को राज्यसभा में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ का मुद्दा उठाया गया था। तृणमूल कांग्रेस सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने नियम 170 के तहत सदन में मौलिक प्रस्ताव दिया। इसमें धनखड़ पर चुनी हुई सरकार की संवैधानिकता को चुनौती देने का आरोप लगाया गया। रॉय ने आरोप लगाया कि राज्यपाल सरकार के नियमित कार्यों में दखल दे रहे हैं। वह सरकार के कार्यों और नीतियों की सार्वजनिक तौर पर आलोचना कर रहे हैं। इतना ही नहीं वह प्रिंट, टीवी और सोशल मीडिया पर भसी बयान जारी कर रहे हैं। उन्होंने अपने प्रस्ताव में राष्ट्रपति से (संविधान के नियम 156 के तहत) राज्यपाल को वापस बुलाने का आग्रह किया। टीएमसी सांसद ने आरोप लगाया है कि धनखड़ संविधान के खिलाफ काम कर रहे हैं। राज्यसभा में लाया गया मौलिक प्रस्ताव सदन में स्वीकृत कराना होगा। प्रस्ताव सभापति द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद प्रस्ताव पर सदन में चर्चा होगी।
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