{"_id":"5c376f35bdec22731a6ba596","slug":"mallikarjuna-kharge-dissident-over-removal-of-cbi-chief-alok-verma","type":"story","status":"publish","title_hn":"खड़गे ने आलोक वर्मा को सीबीआई प्रमुख के पद से हटाने के फैसले पर जताई असहमति","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
खड़गे ने आलोक वर्मा को सीबीआई प्रमुख के पद से हटाने के फैसले पर जताई असहमति
Thu, 10 Jan 2019 09:43 PM IST
Avdhesh Kumar
भाषा, नई दिल्ली
भाषा, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Thu, 10 Jan 2019 09:43 PM IST
विज्ञापन
मल्लिकार्जुन खड़गे
- फोटो : PTI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आलोक वर्मा के भविष्य पर विचार करने के लिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई उच्चाधिकार प्राप्त चयन समिति की बैठक में लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सीबीआई निदेशक को पद से हटाने के कदम का विरोध किया। चयन समिति ने वर्मा को पद से हटाने का फैसला किया है। दो दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने वर्मा को इस पद पर बहाल किया था।
सूत्रों के अनुसार बैठक के दौरान समिति के सदस्य खड़गे ने कहा कि वर्मा को दंडित नहीं किया जाना चाहिये और उनका कार्यकाल 77 दिन के लिये बढ़ाया जाना चाहिए। इस अवधि के लिये वर्मा को छुट्टी पर भेज दिया गया था।
यह दूसरा मौका है जब खड़गे ने वर्मा को पद से हटाने पर आपत्ति जताई। तीन सदस्यीय समिति में प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के प्रतिनिधि के तौर पर न्यायमूर्ति ए के सीकरी भी शामिल थे।
विज्ञापन
सूत्रों के अनुसार बैठक के दौरान न्यायमूर्ति सीकरी ने कहा कि वर्मा के खिलाफ कुछ आरोप हैं, इसपर खड़गे ने कहा, ‘आरोप कहां हैं।’
कांग्रेस ने अपने ट्विटर हैंडल से किये गए ट्वीट में कहा, आलोक वर्मा को उनका पक्ष रखने का मौका दिये बिना पद से हटाकर प्रधानमंत्री मोदी ने एकबार फिर दिखा दिया है कि वह जांच--चाहे वह स्वतंत्र सीबीआई निदेशक से हो या संसद या जेपीसी के जरिये... को लेकर काफी भयभीत हैं।
वर्मा को भ्रष्टाचार और कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही के आरोप में पद से हटाया गया। इसके साथ ही एजेंसी के इतिहास में इस तरह की कार्रवाई का सामना करने वाले वह सीबीआई के पहले प्रमुख बन गए हैं।
विज्ञापन
सूत्रों के अनुसार बैठक के दौरान समिति के सदस्य खड़गे ने कहा कि वर्मा को दंडित नहीं किया जाना चाहिये और उनका कार्यकाल 77 दिन के लिये बढ़ाया जाना चाहिए। इस अवधि के लिये वर्मा को छुट्टी पर भेज दिया गया था।
विज्ञापन
यह दूसरा मौका है जब खड़गे ने वर्मा को पद से हटाने पर आपत्ति जताई। तीन सदस्यीय समिति में प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के प्रतिनिधि के तौर पर न्यायमूर्ति ए के सीकरी भी शामिल थे।
विज्ञापन
सूत्रों के अनुसार बैठक के दौरान न्यायमूर्ति सीकरी ने कहा कि वर्मा के खिलाफ कुछ आरोप हैं, इसपर खड़गे ने कहा, ‘आरोप कहां हैं।’
कांग्रेस ने अपने ट्विटर हैंडल से किये गए ट्वीट में कहा, आलोक वर्मा को उनका पक्ष रखने का मौका दिये बिना पद से हटाकर प्रधानमंत्री मोदी ने एकबार फिर दिखा दिया है कि वह जांच--चाहे वह स्वतंत्र सीबीआई निदेशक से हो या संसद या जेपीसी के जरिये... को लेकर काफी भयभीत हैं।
वर्मा को भ्रष्टाचार और कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही के आरोप में पद से हटाया गया। इसके साथ ही एजेंसी के इतिहास में इस तरह की कार्रवाई का सामना करने वाले वह सीबीआई के पहले प्रमुख बन गए हैं।