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चीन की चाल! मालदीव ने भारत से कहा- अपने सैनिक और हेलीकॉप्टर वापस बुलाओ
एजेंसी, नई दिल्ली
Updated Sat, 11 Aug 2018 02:17 AM IST
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maldive china
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मालदीव ने भारत को अपने सैन्य हेलीकॉप्टर और सैनिक वापस बुलाने के लिए कहा है। भारत में मालदीव के राजदूत अहमद मोहम्मद का कहना है कि इनकी उपस्थिति के लिए मालदीव सरकार और भारत के बीच हुआ अनुबंध जून में खत्म हो चुका है। इस कारण उनकी सरकार ने ये कदम उठाया है। इसे भारत के लिए मालदीव के चीन समर्थक राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन की सरकार की तरफ से करारा झटका माना जा रहा है।
बता दें कि मालदीव में भारत और चीन के बीच लगातार कशमकश चल रही है। दशकों से हिंद महासागर में भारत का सैन्य और सिविल साझीदार रहे मालदीव में वर्ष 2011 में अपना दूतावास खोलने के बाद से बीजिंग लगातार सड़कें, पुल और बड़े एयरपोर्ट बनाने में जुटा है, जिससे वहां की अर्थव्यवस्था में भारत की भूमिका लगातार कमजोर हो रही है।
यामीन सरकार का विरोध करना पड़ रहा भारी
करीब 400 किलोमीटर दूर स्थित मालदीव में राष्ट्रपति यामीन की तरफ से इस साल की शुरुआत में आपातकाल लागू कर अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का विरोध करना भारत के लिए भारी साबित हो रहा है। इससे चीन और मध्य पूर्व देशों के बीच सबसे व्यस्त समुद्री रास्ते के करीब स्थित इस द्वीप समूह की यामीन सरकार का चीन की तरफ झुकाव और ज्यादा बढ़ा है। इससे हिंद महासागर में छोटे देशों के एक्सक्लूसिव आर्थिक क्षेत्र की सुरक्षा करना और समुद्री डकैतों से उन्हें बचाने में मदद देने के कार्यक्रम को भी झटका लगा है।
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मालदीव अब खुद है सक्षम : राजदूत
मालदीव के राजदूत अहमद मोहम्मद का कहना है कि भारत के दो सैन्य हेलीकॉप्टर उनके यहां मौजूद हैं, जो समुद्र में फंसे लोगों को निकालने के लिए काम आते थे। उनका कहना है कि पहले इनका बहुत अच्छा इस्तेमाल हुआ। लेकिन अब मालदीव ने यह क्षमता खुद विकसित कर ली है, इसलिए उसे भारतीय हेलीकॉप्टरों की आवश्यकता नहीं रही है।
मोहम्मद ने आगे कहा कि हालांकि भारत और मालदीव अब भी हर महीने एक्सक्लूसिव आर्थिक क्षेत्र की संयुक्त गश्त कर रहे हैं। बता दें कि भारत के 50 सैनिक भी वहां मौजूद हैं, जिनमें पायलट और मेंटीनेंस क्रू भी शामिल हैं। इनके वीजा भी खत्म हो चुके हैं, लेकिन अभी तक नई दिल्ली की तरफ से उन्हें द्वीपसमूह छोड़ने के लिए नहीं कहा गया है।
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बता दें कि मालदीव में भारत और चीन के बीच लगातार कशमकश चल रही है। दशकों से हिंद महासागर में भारत का सैन्य और सिविल साझीदार रहे मालदीव में वर्ष 2011 में अपना दूतावास खोलने के बाद से बीजिंग लगातार सड़कें, पुल और बड़े एयरपोर्ट बनाने में जुटा है, जिससे वहां की अर्थव्यवस्था में भारत की भूमिका लगातार कमजोर हो रही है।
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यामीन सरकार का विरोध करना पड़ रहा भारी
करीब 400 किलोमीटर दूर स्थित मालदीव में राष्ट्रपति यामीन की तरफ से इस साल की शुरुआत में आपातकाल लागू कर अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का विरोध करना भारत के लिए भारी साबित हो रहा है। इससे चीन और मध्य पूर्व देशों के बीच सबसे व्यस्त समुद्री रास्ते के करीब स्थित इस द्वीप समूह की यामीन सरकार का चीन की तरफ झुकाव और ज्यादा बढ़ा है। इससे हिंद महासागर में छोटे देशों के एक्सक्लूसिव आर्थिक क्षेत्र की सुरक्षा करना और समुद्री डकैतों से उन्हें बचाने में मदद देने के कार्यक्रम को भी झटका लगा है।
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मालदीव अब खुद है सक्षम : राजदूत
मालदीव के राजदूत अहमद मोहम्मद का कहना है कि भारत के दो सैन्य हेलीकॉप्टर उनके यहां मौजूद हैं, जो समुद्र में फंसे लोगों को निकालने के लिए काम आते थे। उनका कहना है कि पहले इनका बहुत अच्छा इस्तेमाल हुआ। लेकिन अब मालदीव ने यह क्षमता खुद विकसित कर ली है, इसलिए उसे भारतीय हेलीकॉप्टरों की आवश्यकता नहीं रही है।
मोहम्मद ने आगे कहा कि हालांकि भारत और मालदीव अब भी हर महीने एक्सक्लूसिव आर्थिक क्षेत्र की संयुक्त गश्त कर रहे हैं। बता दें कि भारत के 50 सैनिक भी वहां मौजूद हैं, जिनमें पायलट और मेंटीनेंस क्रू भी शामिल हैं। इनके वीजा भी खत्म हो चुके हैं, लेकिन अभी तक नई दिल्ली की तरफ से उन्हें द्वीपसमूह छोड़ने के लिए नहीं कहा गया है।