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सियासत: कोरोना संकट कर रहा 'विपक्ष' को एकजुट, बंगाल नतीजों से मिली नई ऊर्जा 'भाजपा' के लिए बन सकती है चुनौती

Thu, 13 May 2021 04:24 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 13 May 2021 04:24 PM IST
सार

कांग्रेस पार्टी के नेता रणदीप सुरजेवाला कहते हैं, हैरानी की बात है कि केंद्र सरकार ने मित्रता के भाव में विदेशी राष्ट्रों को वैक्सीन भेज दी, लेकिन अब अपने देश में राज्यों से कहा जा रहा है कि वे ग्लोबल टेंडर करें...

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Major opposition parties wrote a letter to PM Narendra Modi with 9 points on present corona situation
नई दिल्ली में सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के निर्माण स्थल पर 'नो फोटोग्राफी' का साइनबोर्ड - फोटो : PTI

विस्तार

कोरोना की पहली लहर और उसके बाद की राजनीतिक परिस्थितियों में मोदी सरकार 'स्वयं' में मस्त रही है। खासतौर पर उसे विपक्ष की कोई परवाह नहीं रही। मसला चाहे कोरोना का हो या चीन के साथ सीमा विवाद का, केंद्र ने अधिकांश फैसले अपनी मनमर्जी से लिए हैं। कांग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इतना भी कह दिया कि मोदी सरकार ने पिछले साल अपनी मनमर्जी से लॉकडाउन लगा दिया। इस बार भी राज्यों के हाथ में न तो वैक्सीन है और न ही ऑक्सीजन है। आंदोलन कर रहे किसान हार थक कर बैठ गए।

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इन सबके बावजूद भाजपा ने विपक्ष की एक नहीं सुनी। अब राजनीतिक स्थिति बदलने लगी है। सवाल ये है, क्या कोरोना संकट 'विपक्ष' को एकजुट कर रहा है। दूसरा, बंगाल के चुनावी नतीजों से मिली नई ऊर्जा के बाद विपक्षी दल 'भाजपा' के लिए बड़ी चुनौती पेश कर सकते हैं। कोरोना महामारी की भयावह स्थिति के बीच 12 विपक्षी नेताओं द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक संयुक्त पत्र लिखा जाना, इसे विपक्ष के बीच एकजुटता की बानगी कहा जा सकता है। पत्र लिखने वाले नेताओं में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता हेमंत सोरेन, फारूक अब्दुल्ला, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, सीपीआईएम के सीताराम येचुरी, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टॉलिन, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, एनपीसी प्रमुख शरद पवार, बंगाल सीएम ममता बनर्जी, सीपीआई नेता डी राजा, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और एचडी देवगौड़ा का नाम शामिल है।

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राजनीतिक जानकारों का कहना है कि केंद्र की भाजपा सरकार ने कई बड़े मुद्दों पर विपक्ष को विश्वास में नहीं लिया है। अगर विपक्ष की तरफ से कुछ पूछा जाता है तो उसका जवाब दिया नहीं जाता और यदि उत्तर मिलता है तो वह 'मनमर्जी' वाला रहता है। सोनिया गांधी ने मोदी सरकार पर कोरोना वायरस महामारी को लेकर अपनी जिम्मेदारियों से पीछे हटने और जनता को निराश करने का आरोप लगा दिया है। उन्होंने मौजूदा हालात पर चर्चा करने के लिए तत्काल एक सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है।

सोनिया ने यह भी कहा कि स्वास्थ्य संबंधी संसद की स्थायी समिति की बैठक बुलाई जाए। राहुल गांधी ने कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने के मकसद से चलाए गए सोशल मीडिया अभियान 'स्पीकअप टू सेव लाइव्स' के तहत लोगों से एकजुट होने की अपील की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनको अपने उस गुलाबी चश्मे को उतारना चाहिए, जिससे 'सेंट्रल विस्टा' परियोजना के अलावा कुछ और नहीं दिखाई देता।

दूसरी तरफ अन्य विपक्षी दल भी मोदी सरकार पर हमला बोल रहे हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, बसपा प्रमुख मायावती, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, चंद्रबाबू नायडू, शरद पवार, फारूक अब्दुल्ला, महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे, झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन और दूसरे कई नेता ऑक्सीजन, वेंटिलेटर, आईसीयू बेड और टीके को लेकर मोदी सरकार को घेर रहे हैं।

ममता बनर्जी ने चुनावी नतीजे आने से पहले ही 15 गैर-भाजपाई नेताओं को चिट्ठी लिखकर एक साथ काम करने की नसीहत दी थी। ममता ने चिट्ठी में लिखा, लोकतंत्र और संविधान पर भाजपा के हमलों के खिलाफ एकजुट होने और प्रभावी संघर्ष करने का समय आ गया है। जब उनकी प्रचंड जीत हुई तो सामना में लिखा गया है कि अंत देश के लिए ही सही, लेकिन विपक्षी पार्टियों को एकजुट होना पड़ेगा। दिल्ली में आप सरकार की शक्तियों पर कैंची चला दी गई। वहां पर पिछले दिनों ऑक्सीजन की भारी किल्लत रही। अब वैक्सीन सप्लाई को लेकर आप सरकार ने नाराजगी जाहिर की है।

जेएनयू के पूर्व प्रोफेसर और राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ प्रो. आनंद कुमार कहते हैं, ये बात सही है कि कोरोना जैसी वैश्विक महामारी ने विपक्ष को काफी हद तक एक दूसरे के करीब ला खड़ा किया है। गैर भाजपाई राज्य, केंद्र की मनमर्जी वाली नीतियों से परेशान हैं। मुख्यमंत्रियों को शिकायत है कि उनकी सुनवाई नहीं हो रही। सारे फैसले मोदी सरकार खुद ले रही है। ऐसी स्थिति में विपक्ष की एकजुटता स्वाभाविक है।

दूसरा, ममता बनर्जी की प्रचंड जीत ने विपक्ष को एक नई ऊर्जा प्रदान की है। ये बात सभी जानते हैं कि बंगाल में ममता की पार्टी सत्ता में नहीं आती तो आज विपक्षी दल मोदी सरकार के खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। कांग्रेस पार्टी को अपना घर पहले ठीक करना होगा। पांच राज्यों के चुनाव में कांग्रेस पार्टी का बुरा हाल रहा है। इस पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है, यह बात पार्टी के ही कई वरिष्ठ नेताओं के मुंह से सामने आ चुकी है। अब ममता बनर्जी को साथ लेकर कांग्रेस पार्टी एवं दूसरे विपक्षी दल एक साथ आगे बढ़ते हैं तो वे मोदी सरकार के लिए अवश्य चुनौती खड़ी कर सकते हैं। हालांकि इन दलों को ईमानदारी से मन की बात करनी होगी।  

कांग्रेस पार्टी के नेता रणदीप सुरजेवाला कहते हैं, हैरानी की बात है कि केंद्र सरकार ने मित्रता के भाव में विदेशी राष्ट्रों को वैक्सीन भेज दी, लेकिन अब अपने देश में राज्यों से कहा जा रहा है कि वे ग्लोबल टेंडर करें। संसद से 35 हजार करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे कि सभी राज्यों को फ्री वैक्सीन मिल जाएगी। इन बातों ने केंद्र और राज्यों के संबंधों में एक दूरी बना दी है। वैक्सीन हमारे देश में बन रही है और हमें ही ग्लोबल टेंडर देने के लिए कहा जा रहा है। क्या इसके लिए राज्यों से सलाह ली गई थी।

वहीं सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को लेकर देशभर में विपक्षी नेता मोदी सरकार पर हमला कर रहे हैं। राहुल गांधी ने ट्वीट करते हुए लिखा, देश को इस वक्त पीएम आवास नहीं, सांस चाहिए। प्रो. आनंद कुमार कहते हैं कि अब कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की आक्रामकता देखने को मिल रही है। कोरोना संक्रमण के बिगड़े हालात ने विपक्षी दलों को एक प्लेटफॉर्म पर काम करने के लिए मजबूर कर दिया है। मौजूदा परिस्थितियों का इशारा है कि अब एक साथ नहीं आए तो उसके बाद मौका नहीं मिलेगा। इसी वजह से कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में सोनिया गांधी ने हाल में हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, नतीजों को देखने के बाद साफ है कि पार्टी में बदलाव की जरूरत है। अगर वे ऐसा नहीं करती हैं तो दूसरे विपक्षी दलों को यह संदेश जा सकता था कि कांग्रेस तो पहले की तरह चल रही है। उसकी अगुवाई में विपक्ष कैसे आगे बढ़ेगा।

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कोरोना और बंगाल की हार ने भाजपा के भीतर भी एक कलह की स्थिति पैदा की है। प्रो. आनंद कुमार के मुताबिक, पार्टी में कई नए धड़े सिर उठा सकते हैं। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी से शीर्ष नेता नाराज बताए जाते हैं। लिहाजा, सीएम के चयन के दौरान भी वे शीर्ष नेतृत्व की पहली पसंद नहीं थे। लोकसभा सीटों पर हुए उपचुनाव और पंचायत चुनाव में भाजपा के हिस्से जो कुछ आया है, उससे 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव की राह मुश्किल होती जा रही है।

देश में संवैधानिक संस्थाओं के साथ छेड़छाड़ करने का चलन बढ़ता जा रहा है, ये बात आरएसएस और भाजपा के कई बड़े चेहरे अच्छे से समझते हैं। भाजपा के अनेक पदाधिकारी यह महसूस कर रहे हैं कि पार्टी पर कुछ लोग अपना कब्जा करने में लगे हैं। दिल्ली में हार, महाराष्ट्र में सरकार से बाहर होना और अब पश्चिम बंगाल में, जहां पर भाजपा ने पूरी ताकत लगा दी थी, वहां भी पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। आने वाले समय में ये सब बातें पार्टी के लिए शुभ संकेत नहीं हैं। दूसरी तरफ कोरोना संकट ने जिस तरह से विपक्ष को एकजुट किया है, वह भाजपा के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है।  

महामारी की भयावह स्थिति के बीच 12 विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संयुक्त पत्र लिखा है। इसे विपक्षी एकता की राह पर पहला कदम कहा जा सकता है। इस पत्र में कोविड-19 से जंग करने के उपायों बाबत नौ सुझाव दिए गए हैं। इनमें मुफ्त सामूहिक टीकाकरण अभियान और सेंट्रल विस्टा परियोजना को निलंबित करने की मांग भी शामिल है। विपक्षी नेताओं ने मोदी सरकार से कहा है कि टीका के लिए 35 हजार करोड़ का बजट आवंटन किया जाए। साथ ही घरेलू वैक्सीन के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए अनिवार्य लाइसेंस की व्यवस्था तुरंत खत्म हो।

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