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Maharashtra Politics: आदित्य बोले- बागियों में चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं, जिन पर भरोसा किया उन्होंने ही धोखा दिया
Sun, 10 Jul 2022 04:30 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 10 Jul 2022 04:30 PM IST
सार
मुंबई के उत्तरी उपनगर दहिसर में अपनी 'निष्ठा यात्रा' के दौरान के दौरान आदित्य ठाकरे ने कहा कि जो लोग सेना छोड़ना चाहते थे वे चले गए, लेकिन जमीनी स्तर के शिव सैनिकों का उनके पिता और पूर्व मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली पार्टी के साथ समर्थन जारी है।
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निष्ठा यात्रा को संबोधित करते महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे
- फोटो : Twitter/Aaditya Thackeray
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विस्तार
महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे ने रविवार को दावा किया कि शिवसेना के जमीनी कार्यकर्ता संगठन के साथ मजबूती के साथ खड़े हैं। आदित्य ठाकरे ने कहा कि पार्टी ने जिन लोगों पर भरोसा किया है, वे उनके साथ 'विश्वासघात' कर रहे हैं।
मुंबई के उत्तरी उपनगर दहिसर में अपनी 'निष्ठा यात्रा' के दौरान के दौरान आदित्य ठाकरे ने कहा कि जो लोग सेना छोड़ना चाहते थे वे चले गए, लेकिन जमीनी स्तर के शिव सैनिकों का उनके पिता और पूर्व मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली पार्टी के साथ समर्थन जारी है।
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'राजनीतिक प्रतिद्वंदियों से मुकाबले के लिए तैयार हैं शिवसैनिक'
शिवसेना विधायक आदित्य ठाकरे ने कहा, "प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में हमारे पास दो से तीन पुरुष और महिला दुर्जेय शिव सैनिक हैं... जो चुनाव में राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों से मुकाबला करने के लिए तैयार हैं।"
'मातोश्री के दरवाजे वापस लौटने वालों के लिए खुले हैं'
बाद में पत्रकारों से बात करते हुए पूर्व मंत्री ने कहा कि शिवसेना को उन लोगों ने "धोखा" दिया है जिन पर भरोसा किया। उन्होंने कहा, "जो लोग जाने से खुश हैं उनमें नए चुनाव का सामना करने की हिम्मत होनी चाहिए। 'मातोश्री' (उपनगरीय बांद्रा में ठाकरे का निजी आवास) के दरवाजे उन सभी के लिए खुले हैं जो वापस लौटना चाहते हैं।"
पार्टी के कई विधायकों ने कर दी थी बगावत
बता दें कि पिछले महीने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना के अधिकांश विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर दी थी। इस विद्रोह के बाद शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस के गठबंधन वाली सरकार गिर गई थी। इसके बाद 30 जून को एकनाथ शिंदे ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली जबकि पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उप-मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
पार्टी में विद्रोह के बाद उद्धव ठाकरे और मुख्यमंत्री शिंदे के नेतृत्व वाले दोनों गुट खुद के असली शिवसेना होने का दावा कर रहे हैं।
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मुंबई के उत्तरी उपनगर दहिसर में अपनी 'निष्ठा यात्रा' के दौरान के दौरान आदित्य ठाकरे ने कहा कि जो लोग सेना छोड़ना चाहते थे वे चले गए, लेकिन जमीनी स्तर के शिव सैनिकों का उनके पिता और पूर्व मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली पार्टी के साथ समर्थन जारी है।
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'राजनीतिक प्रतिद्वंदियों से मुकाबले के लिए तैयार हैं शिवसैनिक'
शिवसेना विधायक आदित्य ठाकरे ने कहा, "प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में हमारे पास दो से तीन पुरुष और महिला दुर्जेय शिव सैनिक हैं... जो चुनाव में राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों से मुकाबला करने के लिए तैयार हैं।"
'मातोश्री के दरवाजे वापस लौटने वालों के लिए खुले हैं'
बाद में पत्रकारों से बात करते हुए पूर्व मंत्री ने कहा कि शिवसेना को उन लोगों ने "धोखा" दिया है जिन पर भरोसा किया। उन्होंने कहा, "जो लोग जाने से खुश हैं उनमें नए चुनाव का सामना करने की हिम्मत होनी चाहिए। 'मातोश्री' (उपनगरीय बांद्रा में ठाकरे का निजी आवास) के दरवाजे उन सभी के लिए खुले हैं जो वापस लौटना चाहते हैं।"
पार्टी के कई विधायकों ने कर दी थी बगावत
बता दें कि पिछले महीने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना के अधिकांश विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर दी थी। इस विद्रोह के बाद शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस के गठबंधन वाली सरकार गिर गई थी। इसके बाद 30 जून को एकनाथ शिंदे ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली जबकि पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उप-मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
पार्टी में विद्रोह के बाद उद्धव ठाकरे और मुख्यमंत्री शिंदे के नेतृत्व वाले दोनों गुट खुद के असली शिवसेना होने का दावा कर रहे हैं।