महाराष्ट्र में मचे सियासी घमासान के बाद भाजपा के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार का गिर जाना राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानि एनडीए के लिए किसी झटके से कम नहीं है। आइए जानते हैं इस पूरी सियासी उठापटक से एनडीए को हुए नुकसान या यूं कहें की सत्ता गंवाने के क्या मायने हैं।
दरअसल, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आम आदमी पार्टी की वजह से पहले से ही एनडीए सत्ता से दूर है। हालांकि, दिल्ली में फरवरी 2020 में विधानसभा चुनाव होने हैं। वहीं महाराष्ट्र में घटे सियासी घटनाक्रम के बाद अब इस आर्थिक राजधानी में भाजपा सत्ता से बाहर हो गई है।
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संसद के सेंट्रल हॉल का नजारा
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एनडीए का साल 2017 में 72 फीसदी आबादी पर शासन था। मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में सत्ता उसके हाथ से जाने पर वह 41 फीसदी आबादी तक सीमित होकर रह गया है।
हालांकि, मिजोरम और सिक्किम जैसे छोटे राज्य एनडीए के खाते में आए हैं। इस तरह से अब 17 राज्यों में एनडीए सरकार है। इनमें से 13 राज्यों में भाजपा और चार राज्यों में सहयोगी दलों के मुख्यमंत्री हैं।
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modi and yogi
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उत्तर प्रदेश के बाद सबसे ज्यादा 48 लोकसभा सीटें महाराष्ट्र में हैं। यही वजह है कि एनडीए के लिए महाराष्ट्र काफी अहम है। भाजपा तमिलनाडु में सरकार के साथ है, लेकिन विधायक एक भी नहीं है।
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शरद पवार और उद्धव ठाकरे
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महाराष्ट्र में सत्ता गंवाने के क्या हैं मायने
बता दें कि महाराष्ट्र की कुल जीडीपी करीब 30 लाख करोड़ रुपए है। यह देश की जीडीपी का 14 फीसदी हिस्सा है। देश के 40 फीसदी से ज्यादा कॉर्पोरेट ऑफिस महाराष्ट्र में ही हैं। इस लिहाज से पार्टियों को मिलने वाले चुनावी चंदे में इस राज्य का बड़ा अहम योगदान है। ऐसे में यहां सत्ता से बाहर होना पार्टी की साख और अब तक चले आ रहे सफलता के रथ पर ब्रेक लगाने का काम कर सकता है।