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महाराष्ट्र: विधवा प्रथा खत्म करने की ऐतिहासिक पहल, चूड़ियां तोड़ने और सिंदूर पोछने की परंपरा होगी बंद
Thu, 19 May 2022 08:29 PM IST
Amit Mandal
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई।
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई।
Published by: Amit Mandal
Updated Thu, 19 May 2022 08:29 PM IST
सार
इस प्रथा के खिलाफ कोल्हापुर जिले के हेरवाड ग्राम पंचायत के सरपंच सुरगोंडा पाटिल और ग्राम विकास अधिकारी पल्लवी कोलेकर ने बीते 4 मई को इसकी पहल की।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
प्रगतिशील राज्य कहे जाने वाले महाराष्ट्र में किसी महिला के विधवा होने पर उसकी मांग का सिंदूर पोछने से लेकर मंगलसूत्र निकालने, सफेद साड़ी पहनने और चूड़ियां तोड़ने की प्रथा खत्म करने की पहल की गई है। राज्य सरकार ने इस संबंध में परिपत्रक जारी कर जिला परिषद के जरिए ग्राम पंचायतों को इस रूढ़िवादी प्रथा को खत्म करने के लिए प्रोत्साहित करने का आदेश दिया है।
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कोल्हापुर जिले के हेरवाड ग्राम पंचायत के सरपंच की पहल
परंपरानुसार हिंदू महिलाओं के विधवा होने पर उनकी मांग का सिंदूर पोछ दिया जाता है। चूड़ियां तोड़ दी जाती है और मंगलसूत्र से लेकर पांव के पायल भी निकाल दिए जाते हैं। इस प्रथा के खिलाफ कोल्हापुर जिले के हेरवाड ग्राम पंचायत के सरपंच सुरगोंडा पाटिल और ग्राम विकास अधिकारी पल्लवी कोलेकर ने बीते 4 मई को इसकी पहल की और ग्रामसभा ने इस प्रस्ताव पेश किया जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया था।
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ग्राम पंचायत के इस प्रस्ताव की खबरें आने के बाद राज्य के ग्राम विकास मंत्री हसन मुश्रिफ ने इसकी न केवल सराहना की बल्कि इसे ग्राम पंचायत के प्रस्ताव को आदर्श मानते हुए राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में इसे लागू करने की घोषणा की थी। इसी के तहत राज्य सरकार ने परिपत्रक जारी किया है। इसके पालन की जिम्मेदारी जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को दी गई है लेकिन इसके नियम नहीं मानने वालों पर किसी तरह की कानूनी कार्रवाई का प्रावधान नहीं किया गया है। राज्य की प्राथमिक शिक्षा मंत्री वर्षा गायकवाड़ ने कहा कि यह क्रांतिकारी फैसला है।
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देशभर मे लागू हो यह ऐतिहासिक फैसला- डॉ. सुमन अग्रवाल
विधवा प्रथा खत्म करने की पहल का स्वागत करते हुए महिला अधिकार कार्यकर्ता व सुप्रयास फाउंडेशन की अध्यक्ष डॉ. सुमन अग्रवाल ने कहा कि इस ऐतिहासिक फैसले को देशभर में लागू किया जाना चाहिए। यह महिलाओं के पक्ष में अब तक का सबसे बड़ा फैसला है। इस मॉडल को देशभर में लागू करने से विधवा महिलाओं के साथ होने वाले अमानवीय और समाजिक भेदभाव को बंद किया जा सकेगा।