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शिवसेना की परंपरागत दशहरा रैली पर भी कोरोना का ग्रहण, टूटेगी ठाकरे परिवार की परंपरा!

Wed, 30 Sep 2020 03:09 PM IST
Harendra Chaudhary सुरेंद्र मिश्र, अमर उजाला, मुंबई
सुरेंद्र मिश्र, अमर उजाला, मुंबई Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 30 Sep 2020 03:09 PM IST
सार

शिवसेना के सूत्र बताते हैं कि कोरोना संकट के चलते इस बार पार्टी वर्चुअल तरीके से दशहरा रैली करने की योजना बना रही है। पार्टी प्रमुख व महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे 25 अक्तूबर को दशहरा के दिन डिजिटल तरीके से शिवसैनिकों को संबोधित कर सकते हैं...

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Maharashtra: Corona eclipse on Shiv Sena traditional Dussehra rally in shivaji park
shiv sena dasara rally - फोटो : PTI (File Photo)

विस्तार

शिवसेना की परंपरागत दशहरा रैली पर भी इस बार कोरोना का ग्रहण लग गया है। शिवसेना की स्थापना से ही दादर के शिवाजी पार्क में प्रतिवर्ष शिवसेना दशहरा रैली करती आ रही है। दिवंगत शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे इसी दशहरा रैली में पार्टी की भूमिका तय करते थे और उनका भाषण शिवसैनिकों के लिए आदेश होता था। उनके पुत्र शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे भी बीते 7 साल से इस परंपरा का निर्वाह कर रहे हैं। परन्तु, इस बार कोरोना महामारी के चलते दशहरा रैली होने की संभावना नहीं है।

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वैश्विक कोरोना महामारी के कारण मुंबई सहित देश में महामारी रोग अधिनियम लागू है। खास बात यह है कि इस एक्ट को 123 साल पहले 1897 में महाराष्ट्र में फैले प्लेग महामारी से निपटने के लिए  लागू किया गया था। आज वैश्विक कोरोना महामारी से देश में सबसे ज्यादा प्रभावित महाराष्ट्र राज्य ही है। हालांकि महाराष्ट्र की सरकार ने अनलॉक- 4 में एक सितंबर से शादी-विवाह जैसे कार्यक्रम में 50 लोगों के इकट्ठा होने की छूट दी है लेकिन रैली या जनसभा करने की मनाही है। एक अक्तूबर से अनलॉक- 5 में कुछ सहूलियतें मिलने की गुंजाईश तो है लेकिन रैली या जनसभा करने की अनुमति मिल पाना मुश्किल है। ऐसी स्थिति में अगले महीने की 25 तारीख को शिवसेना की दशहरा रैली को लेकर पार्टी में मंथन शुरू हो गया है। शिवसेना सूत्रों का कहना है कि इस बार कोरोना संकट के चलते पार्टी कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है।

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वर्चुअल तरीके से दशहरा रैली की तैयारी

शिवसेना के सूत्र बताते हैं कि कोरोना संकट के चलते इस बार पार्टी वर्चुअल तरीके से दशहरा रैली करने की योजना बना रही है। पार्टी प्रमुख व महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे 25 अक्तूबर को दशहरा के दिन डिजिटल तरीके से शिवसैनिकों को संबोधित कर सकते हैं। इसको लेकर तैयारियां शुरू हैं। लेकिन इस पर अंतिम निर्णय 15 अक्तूबर के बाद होगा, क्योंकि 15 को कोरोना को लेकर समीक्षा बैठक होगी। इसके बाद मौजूदा परिस्थिति को देखते हुए उद्धव ठाकरे रैली के बारे में अंतिम निर्णय लेंगे।

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राउत ने कहा था, अगली बार इस मंच पर दिखेगा शिवसेना का सीएम

गत वर्ष विधानसभा चुनाव के दौरान शिवाजी पार्क में दशहरा रैली आयोजित की गई थी। उस चुनाव में शिवसेना को भाजपा ने सीट बंटवारे में 288 में से सिर्फ 124 सीटें दी थी। इस पर उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा था कि टाइगर को नाखूनों से गुदगुदी नहीं हो सकती। मंत्रालय पर भगवा ही फहरेगा। वहीं, शिवसेना प्रवक्ता संजय राऊत ने कहा था कि अगले विजय दशमी को इस मंच पर शिवसेना का मुख्यमंत्री दिखेगा। राऊत की यह भविष्यवाणी सच साबित हुई है। लेकिन दुर्भाग्य से इस बार वह मंच नहीं होगा।

ठाकरे परिवार और शिवाजी पार्क का है गहरा नाता

ठाकरे परिवार का शिवाजी पार्क से गहरा नाता रहा है। शिवसेना संस्थापक दिवंगत बाल ठाकरे ने शिवाजी पार्क में 27 नवंबर 1966 में पहली रैली की थी। तब से लेकर अब तक शिवाजी पार्क शिवसेना के दशहरा रैली का गवाह रहा है। शिवाजी पार्क की दशहरा रैली में ही बाल ठाकरे ने उद्धव ठाकरे को अपनी राजनीतिक विरासत सौंपी थी और अपने पौत्र आदित्य ठाकरे को भारतीय युवा सेना का अध्यक्ष घोषित किया था। साल 1995 में जब राज्य में शिवसेना पहली बार सत्ता में आई थी तो शिवसेना के पहले मुख्यमंत्री मनोहर जोशी ने इसी शिवाजी पार्क में शपथ ग्रहण किया था। साल 2019 में जब मुख्यमंत्री पद पर उद्धव ठाकरे की ताजपोशी हुई तब उन्होंने भी इसी शिवाजी पार्क में पद व गोपनीयता की शपथ ली थी। इसके अलावा साल 2012 में बाल ठाकरे को भी इसी शिवाजी पार्क में मुखाग्नि दी गई थी।

 

हाईकोर्ट भी नहीं रोक सका शिवाजी पार्क की दशहरा रैली

वैसे तो शिवाजी पार्क लंबे अरसे से बड़-बड़े राजनेताओं की हुंकार और ललकार का साक्षी रहा है। लेकिन साल 2010 में साइलेंट जोन (शांत क्षेत्र) घोषित होने के बाद राजनीतिक रैलियों पर पाबंदी लग गई। साल 2015 में एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान बांबे हाईकोर्ट ने शिवाजी पार्क में शिवसेना को रैली करने से मना कर दिया था। हालांकि रैली में आवाज 60 डीसी मार्क तक रखने का भरोसा देने पर हाईकोर्ट ने कहा था कि इस साल दशहरा रैली कर लें। लेकिन अगले वर्ष अपना विकल्प ढूढ़ लें। राज्य में भाजपा-शिवसेना की सरकार होने से नियम में बदलाव किए गए और दशहरा रैली को एक सांस्कृतिक रूप दे दिया गया जिससे शिवाजी पार्क में शिवसेना की परंपरागत दशहरा रैली निर्विघ्न होती रही।
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