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फडणवीस को मिलेगी प्रणब दा से ज्यादा सैलरी

Tue, 09 Aug 2016 03:18 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 09 Aug 2016 03:18 PM IST
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Maharashtra CM Devendra Fadnavis will soon earn more than President
- फोटो : file photo

महाराष्ट्र में जल्द ही राज्य के उच्च पदस्थ कर्मचारियों और अधिकारियों की सैलरी बढ़ने वाली है। यहां तक की सीएम देवेंद्र फडणवीस की सैलरी में भी इजाफा होगा। फडणवीस को जल्द ही राष्ट्रपति प्रणब दा से ज्यादा सैलरी मिलेगी। सूबे के राज्यपाल से ज्यादा उनके सचिव सैलरी उठाएंगे। 

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सैलरी में होने वाला यह बदलाव सातवें वेतन आयोग के लागू होते ही अमल में आएगा। 

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक हाल ही में सीएम, अन्य मंत्रियों और विधायकों की सैलरी राज्य सरकार ने बढ़ाई थी।
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महाराष्ट्र के राज्यपाल सी विद्यासागर राव को उनकी 1.1 लाख रुपए सैलरी मिलती रहेगी। मुख्य सचिव की सैलरी 2.25 लाख महीना हो जाएगी। राज्यपाल के निजी सचिव की सैलरी 1.44 हो जाएगी।

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देखें किसकी कितनी सैलरी

Maharashtra CM Devendra Fadnavis will soon earn more than President

सीएम फडणवीस 2.25 लाख रुपए महीना सैलरी उठाएंगे, जबकि देश के राष्ट्रपति की सैलरी 1.5 लाख रुपए है। 2008 में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और राज्यपाल की सैलरी तय की गई थी। वेतन आयोग की सिफारिशों का विश्लेषण करने वाले एक वरिष्ठ नौकरशाह ने बताया कि उपराष्ट्रपति की सैलरी 1.25 लाख रुपए महीना है। 

सचिव पद के लिए भुगतान करने की सिफारिश 1.44 लाख रुपए महीना है। प्रधान सचिव के लिए 1.82 लाख और अतिरिक्त मुख्य सचिव के लिए हर महीने 2.05 लाख रुपए सैलरी देने की सिफारिश की गई है।

और राज्य विधानमंडल के हाल के एक निर्णय के अनुसार सीएम, नेता विपक्ष और विधानमंडल के दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारियों की सैलरी मुख्य सचिव के सममूल्य होगी।

शिक्षकों की हालत कब सुधरेगी?

Maharashtra CM Devendra Fadnavis will soon earn more than President

इन लोगों की सैलरी बढ़ने से महाराष्ट्र पर कर्ज का बोझ बढ़ेगा। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र पर सभी राज्यों के मुकाबसे ज्यादा कर्ज का बोझ है। 

विधायक कपिल पाटिल ही अकेले थे जिन्होंने विधायकों समेत सीएम और सचिवों की सैलरी की बढ़ोतरी का विरोध किया। उन्होंने कहा कि आज की तारीख में राज्य के शिक्षकों का वेतन बढ़ना जरूरी है, जो कि पिछले 15 वर्षों से सैलरी में बिना इजाफे के काम कर रहे हैं। 

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि शिक्षकों को जो पेंशन लाभ दिया गया था वो 2005 में वापस ले लिया गया था।

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