मद्रास हाईकोर्ट: लॉकडाउन का इस्तेमाल ‘जादुई छड़ी’ की तरह नहीं किया जा सकता
- याचिकाकर्ता ने बैंक से नीलामी में संपत्ति खरीदने के बाद शुरुआती भुगतान करने के बाद महामारी के कारण पूरा भुगतान नहीं करने पर कोर्ट से अतिरिक्त समय देने की मांग की थी।
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अदालत ने कहा कि यह सच है कि महामारी और इसके मद्देनजर लागू लॉकडाउन एक असाधारण परिस्थिति हो सकती है, लेकिन यह अब असाधारण नहीं है क्योंकि इसे अब करीब 12 या 14 महीने हो गये हैं।
अदालत ने कहा कि यह सच है कि महामारी और इसके मद्देनजर लागू लॉकडाउन एक असाधारण परिस्थिति हो सकती है, लेकिन यह अब असाधारण नहीं है क्योंकि इसे अब करीब 12 या 14 महीने हो गये हैं।
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मद्रास हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि कोरोना महामारी के कारण लगाए गए लॉकडाउन को डिफॉल्टर्स हमेशा ‘जादुई छड़ी’ की तरह इस्तेमाल नहीं कर सकते। मुख्य न्यायाधीश संजीब बनर्जी और न्यायमूर्ति सेंथिलकुमार राममूर्ति की प्रथम पीठ ने शोलिंगनल्लूर में एक फ्लैट की नीलामी में बोली लगाने वाली कायलविझी की जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए यह टिप्पणी की।
हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई की जिसमें बैंक से नीलामी में संपत्ति खरीदने के बाद शुरुआती भुगतान करने के बावजूद याचिकाकर्ता महामारी के कारण पूरा भुगतान नहीं कर सका और कोर्ट से अतिरिक्त समय देने की मांग की।
यह नीलामी एक्सिस बैंक की कोडमबक्कम शाखा ने प्रतिभूतिकरण और वित्तीय आस्तियों व प्रतिभूति हित (सरफेसी) अधिनियम के तहत की थी। गौरतलब है कि कायलविझी ने शुरुआती भुगतान किया था, लेकिन वह महामारी के चलते शेष रकम अदा नहीं कर सकी। उन्होंने अदालत से बैंक को और अधिक वक्त देने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया।
पीठ ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर निश्चित तौर पर असाधारण परिस्थिति थी, लेकिन महामारी के बावजूद डिजिटल माध्यमों से वित्तीय लेन-देन होते रहे हैं। ऐसे में महामारी का तर्क देकर याचिकाकर्ता को राहत नहीं दी जा सकती।
पीठ ने कहा कि कई बार अदालतें ऐसा मानती हैं कि उनके पास समय बढ़ाने का असाधारण अधिकार है और कई बार दया क्षेत्राधिकार का प्रयोग भी बिना इस बात पर गौर किए किया जाता है कि इसकी वजह से दूसरा पूर्वाग्रह से ग्रस्त हो सकता है, जो अदालत के सामने नहीं है। वहीं, दूसरी तरफ एक व्यक्ति जो अदालत पहुंच गया उसे अतिरिक्त मदद मिल सकती है।
पीठ ने कहा कि यदि कानून यह कहता है कि याचिकाकर्ता को नीलामी की तारीख से 90 दिनों के अंदर पूरी रकम अदा करनी होगी, जब तक कि कोई असाधारण परिस्थिति नहीं हो, अदालत को भुगतान के लिए समय विस्तार करने में तत्परता नहीं दिखानी चाहिये क्योंकि यह एक पक्ष को फायदा पहुंचाने के समान होगा।
अदालत ने कहा कि यह सच है कि महामारी और इसके मद्देनजर लागू लॉकडाउन एक असाधारण परिस्थिति हो सकती है, लेकिन यह अब असाधारण नहीं है क्योंकि इसे अब करीब 12 या 14 महीने हो गये हैं। पीठ ने कहा कि लॉकडाउन को कर्ज की शेष रकम नहीं चुकाने वाले हर व्यक्ति द्वारा जादू की छड़ी के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।