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Madras High Court: तहसीलदार ने मांगी बिना शर्त माफी तो नरम हुआ कोर्ट, सुनाई ऐसी सजा कि सब रह गए हैरान
Fri, 05 Aug 2022 09:33 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 05 Aug 2022 09:33 PM IST
सार
तहसीलदार ललिता आज पीठ के समक्ष पेश हुईं और बिना शर्त माफी मांगी और आश्वासन दिया गया कि कडालाडी में एक सार्वजनिक सड़क पर से अतिक्रमम हटाने के अदालत के 2017 के आदेशों को तीन सप्ताह में कार्यान्वित किया जाएगा।
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मद्रास हाईकोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
मद्रास उच्च न्यायालय की पहली पीठ ने शुक्रवार को तिरुवन्नामलाई जिले की तहसीलदार द्वारा मांगी गई बिना शर्त माफी को स्वीकार किया। पीठ ने नरमी बरतते हुए तहसीलदार को सलाखों के पीछे भेजने के बजाय अदालत की कार्यवाही समाप्त होने तक हॉल में बैठे रहने की सजा सुनाई। इससे पहले कोर्ट ने सख्त चेतावनी दी थी कि वह इस मामले में तहसीलदार को जेल में डालने से हिचकेगी नहीं।
मुख्य न्यायाधीश एम.एन. भंडारी और न्यायमूर्ति डी. भरत चक्रवर्ती की पीठ ने 2 अगस्त को तिरुवन्नामलाई जिला प्रशासन और विशेष रूप से तत्कालीन तहसीलदार को चार साल पहले पारित किए गए अतिक्रमण हटाने से जुड़े आदेश को लागू नहीं करने के लिए फटकार लगाई थी।
पीठ ने एम. मुरुगन की अवमानना याचिका पर अंतरिम आदेश पारित करते हुए कहा था कि वह अदात की अवमानना के लिए तहसीलदार को जेल डालने से भी नहीं हिचकेगी। पीठ ने जेल की सजा को तहय करने के लिए आज तहसीलदार को पेश होने को कहा था।
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तहसीलदार ललिता आज पीठ के समक्ष पेश हुईं और बिना शर्त माफी मांगी। सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया कि कडालाडी में एक सार्वजनिक सड़क पर से अतिक्रमम हटाने के अदालत के 2017 के आदेशों को तीन सप्ताह में कार्यान्वित किया जाएगा।
इसके बाद पीठ ने नरमी बरतते हुए उन्हें (तहसीलदार) शाम को अपनी कार्यवाही समाप्त होने तक कोर्ट हॉल में बैठने का निर्देश दिया।
मद्रास उच्च न्यायालय की पहली पीठ ने शुक्रवार को तिरुवन्नामलाई जिले की तहसीलदार द्वारा मांगी गई बिना शर्त माफी को स्वीकार किया। पीठ ने नरमी बरतते हुए तहसीलदार को सलाखों के पीछे भेजने के बजाय अदालत की कार्यवाही समाप्त होने तक हॉल में बैठे रहने की सजा सुनाई। इससे पहले कोर्ट ने सख्त चेतावनी दी थी कि वह इस मामले में तहसीलदार को जेल में डालने से हिचकेगी नहीं।
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मुख्य न्यायाधीश एम.एन. भंडारी और न्यायमूर्ति डी. भरत चक्रवर्ती की पीठ ने 2 अगस्त को तिरुवन्नामलाई जिला प्रशासन और विशेष रूप से तत्कालीन तहसीलदार को चार साल पहले पारित किए गए अतिक्रमण हटाने से जुड़े आदेश को लागू नहीं करने के लिए फटकार लगाई थी।
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पीठ ने एम. मुरुगन की अवमानना याचिका पर अंतरिम आदेश पारित करते हुए कहा था कि वह अदात की अवमानना के लिए तहसीलदार को जेल डालने से भी नहीं हिचकेगी। पीठ ने जेल की सजा को तहय करने के लिए आज तहसीलदार को पेश होने को कहा था।
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तहसीलदार ललिता आज पीठ के समक्ष पेश हुईं और बिना शर्त माफी मांगी। सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया कि कडालाडी में एक सार्वजनिक सड़क पर से अतिक्रमम हटाने के अदालत के 2017 के आदेशों को तीन सप्ताह में कार्यान्वित किया जाएगा।
इसके बाद पीठ ने नरमी बरतते हुए उन्हें (तहसीलदार) शाम को अपनी कार्यवाही समाप्त होने तक कोर्ट हॉल में बैठने का निर्देश दिया।
मद्रास उच्च न्यायालय की पहली पीठ ने शुक्रवार को तिरुवन्नामलाई जिले की तहसीलदार द्वारा मांगी गई बिना शर्त माफी को स्वीकार किया। पीठ ने नरमी बरतते हुए तहसीलदार को सलाखों के पीछे भेजने के बजाय अदालत की कार्यवाही समाप्त होने तक हॉल में बैठे रहने की सजा सुनाई। इससे पहले कोर्ट ने सख्त चेतावनी दी थी कि वह इस मामले में तहसीलदार को जेल में डालने से हिचकेगी नहीं।