Madhya Pradesh: टिकट मिलने के 12 दिन बाद भी दिमनी क्यों नहीं आ रहे केंद्रीय मंत्री तोमर, कहीं ये वजह तो नहीं
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विस्तार
भारतीय जनता पार्टी ने मध्यप्रदेश के उम्मीदवारों की दो सूची जारी कर दी है। दूसरी सूची में पार्टी ने केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों पर दांव खेला है। मुरैना की दिमनी विधानसभा सीट से केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को उम्मीदवार बनाया है। लेकिन प्रत्याशी घोषित होने के बाद बावजूद तोमर दिमनी सीट से दूरी बनाए हुए हैं। तोमर ग्वालियर-मुरैना के जिले की अलग-अलग विधानसभा में जरूर पहुंच रहे हैं, लेकिन वे दिमनी जाने को फिलहाल तैयार नहीं हैं। तोमर 2009 से ही केंद्र में हैं और अब पार्टी ने उन्हें वापस प्रदेश में सक्रिय कर दिया है। सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर क्यों एक केंद्रीय मंत्री को दिमनी सीट से लड़ाया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री तोमर के दिमनी विधानसभा में नहीं पहुंचने पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं, लेकिन उन्होंने और उनके समर्थकों ने इस प्रश्न पर चुप्पी साध रखी है। वे लगातार आसपास के जिलों में भ्रमण करते हुए नजर आ रहे हैं। दिमनी विधानसभा के भाजपा कार्यकर्ता और नेता अपने पार्टी के उम्मीदवार के स्वागत के लिए तैयार बैठे हैं। लेकिन अब तक उन्हें उनके दर्शन का सौभाग्य नहीं मिल सका है। कुल मिलाकर दिमनी विधानसभा सीट से केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की दूरी अपने आप में एक बड़ा सवाल है।
जानकारी के अनुसार, पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर सबलगढ़ विधानसभा क्षेत्र पहुंचे थे और यहां उन्होंने जनसभा को संबोधित किया था। इसके अलावा नरेंद्र सिंह तोमर बीते दिनों मुरैना भी पहुंचे थे। वे यहां मेडिकल कॉलेज के भूमि पूजन में शामिल हुए। इतना ही नहीं दिमनी से लगी हुई अंबाह विधानसभा के पोरसा इलाके में पहुंचकर नरेंद्र सिंह तोमर ने केंद्रीय विद्यालय के लिए भी भूमि पूजन किया। वह दिमनी विधानसभा को हेलीकॉप्टर से ऊपर से ही देखकर निकल गए। पांच अक्तूबर को भी केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर मुरैना मुख्यालय पर नगर निगम मुरैना के कार्यक्रम में शामिल हुए।
इन कारणों से जाने से कर रहे हैं परहेज
जानकारों का कहना है कि दिमनी विधानसभा क्षेत्र में पहुंचने का अभी तक नरेंद्र सिंह तोमर का कोई मूड नजर नहीं आ रहा है। इसके पीछे की अलग-अलग वजह निकलकर सामने आ रही हैं। चर्चा यह भी है कि नरेंद्र सिंह तोमर खुद को दिमनी विधानसभा से प्रत्याशी बनाए जाने पर खुश नहीं चल रहे। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उन्हें विधानसभा में चुनाव लड़ना पड़ेगा, लेकिन पार्टी के निर्णय के आगे वे नतमस्तक हैं।
20 साल बाद विधानसभा चुनाव लड़ेंगे तोमर
नरेंद्र सिंह तोमर वर्तमान में मुरैना से ही सांसद हैं। क्षेत्र में उनका खासा प्रभाव भी माना जाता है। ऐसे में पार्टी ने इस बार नरेंद्र सिंह तोमर को प्रत्याशी बनाया है। वे 20 साल बाद विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। तोमर ने 1998 में अपना पहला विधानसभा चुनाव लड़ा था। अब तक वे दो विधानसभा और तीन लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं और इन सभी चुनावों में उन्होंने जीत हासिल की है। तोमर ने अपना पहला चुनाव ग्वालियर विधानसभा सीट से लड़ा था। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी अशोक कुमार शर्मा को 26 हजार 458 वोटों से हराया था। उन्हें इस चुनाव में करीब 50 हजार वोट मिले थे। जबकि जबकि शर्मा को 23 हजार 646 वोट मिले। उन्होंने अपना दूसरा और अंतिम विधानसभा चुनाव साल 2003 में लड़ा था। उन्हें 63 हजार 592 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी बालेन्दु शुक्ला को 29 हजार 452 वोट मिले। तोमर ने यह चुनाव 34 हजार 140 वोटों से जीता था।
2009 में केंद्र में पहुंचे तोमर
2009 में हुए लोकसभा चुनाव के जरिए नरेंद्र सिंह तोमर ने केंद्र की राजनीति में कदम रखा। पार्टी ने उन्हें मुरैना से टिकट दिया। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी रामनिवास रावत को 1.97 लाख वोटों से हराया था। 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने नरेंद्र सिंह तोमर को ग्वालियर से टिकट दिया। यह चुनाव उन्होंने 26 हजार 699 वोट से जीता था। उनके सामने कांग्रेस के अशोक सिंह थे। बाद में मोदी सरकार में उन्हें केंद्र में मंत्री बनाया गया था। 2019 के लोकसभा चुनाव नरेंद्र सिंह तोमर की मुरैना में फिर वापसी हुई और उन्होंने इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रामनिवास रावत को 1.13 लाख वोटों से हराया था।
दिमनी सीट का क्या है इतिहास?
दिमनी सीट के इतिहास की बात करें, तो 1980 से 2008 तक इस सीट पर भाजपा का दबदबा रहा। लेकिन पिछले दो चुनावों से भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। साल 2018 में कांग्रेस के गिर्राज दंडोतिया ने जीत दर्ज की थी, तो वहीं 2013 के चुनाव में बसपा के बलवीर सिंह दंडोतिया ने बाजी मार ली। गिर्राज दंडोतिया ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी हैं। 2020 में सियासी उथल पुथल के बीच गिर्राज दंडोतिया भाजपा में आ गए। नवंबर 2020 में जब उप चुनाव हुए, तो कांग्रेस के रविंद्र सिंह कुंवर को यहां से जीत मिली। इससे साफ संदेश था कि दिमनी कांग्रेस का गढ़ बनता जा रहा है। भाजपा ने फिर अपने गढ़ में फिर से वापसी करने के लिए नरेंद्र सिंह तोमर जैसे दिग्गज नेता पर दांव खेला है।