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नक्सल प्रभावित इलाको में हजारों करोड़ों की विदेशी फंडिंग: अमेरिकी संगठन पर भी कार्रवाई, UAPA के तहत मामला दर्ज

Sun, 14 Jun 2026 01:26 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Sun, 14 Jun 2026 01:26 PM IST
सार

ईडी की शिकायत पर दर्ज मामले में आरोप है कि विदेशी डेबिट कार्डों के जरिए निकाला गया धन छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों तक पहुंचा। बंगलूरू पुलिस ने अमेरिका स्थित संगठन समेत सात लोगों के खिलाफ यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि 1,000 से अधिक डेबिट कार्डों के नेटवर्क के जरिए लगभग 92.55 करोड़ रुपये का उपयोग किया गया। मामले की जांच जारी है। आइए विस्तार से पूरे मामले को समझते हैं...

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LWE Areas Naxal Funding Case Foreign Debit Cards UAPA Investigation Bastar Dhamtari Transactions ED Complaint
नक्सल प्रभावित इलाकों को लेकर जांच एजेंसियों का दावा क्या? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

देश के वामपंथी उग्रवाद (नक्सल) प्रभावित इलाकों तक विदेशी धन पहुंचने के आरोपों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की शिकायत के आधार पर बंगलूरू पुलिस ने अमेरिका स्थित एक संगठन समेत सात लोगों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया है। आरोप है कि विदेशी डेबिट कार्डों के जरिए करोड़ों रुपये भारत में निकाले गए और इस धन का कुछ हिस्सा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचा। इसी वजह से मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

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नक्सल प्रभावित इलाकों को लेकर जांच एजेंसियों का दावा क्या है?

प्राथमिकी के अनुसार जांच के दौरान छत्तीसगढ़ के धमतरी और बस्तर जैसे वामपंथी उग्रवाद प्रभावित इलाकों में संदिग्ध नकदी निकासी के मामले सामने आए हैं। ईडी का दावा है कि पिछले कुछ वर्षों में इन क्षेत्रों से करीब 6.34 करोड़ रुपये निकाले गए। एजेंसी का कहना है कि इन लेनदेन की प्रकृति और धन के स्रोत को देखते हुए पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है। जांचकर्ताओं को आशंका है कि विदेशी धन के इस्तेमाल के लिए एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।

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1000 से ज्यादा डेबिट कार्डों का नेटवर्क कैसे सामने आया?

ईडी की शिकायत के मुताबिक अप्रैल में की गई कार्रवाई के दौरान माइका मार्क नामक व्यक्ति के पास से 24 विदेशी डेबिट कार्ड बरामद किए गए। जांच में यह भी दावा किया गया कि देशभर में 1,000 से अधिक ऐसे कार्ड वितरित किए गए थे। कई कार्डों पर एक ही नाम दर्ज था, जबकि उनका इस्तेमाल अलग-अलग क्षेत्रों में किया जा रहा था। एजेंसी का आरोप है कि नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच लगभग 92.55 करोड़ रुपये इन कार्डों के जरिए निकाले और उपयोग किए गए। यह धन विदेशी स्रोतों से आया था और कथित रूप से नियमों का उल्लंघन करते हुए इस्तेमाल किया गया।

यूएपीए के तहत कार्रवाई क्यों हुई?

जांच एजेंसियों का मानना है कि विदेशी डेबिट कार्डों के जरिए बड़े पैमाने पर नकदी निकासी और उसका कथित उपयोग संवेदनशील क्षेत्रों में किया जाना गंभीर मामला है। शिकायत में कहा गया है कि ऐसी गतिविधियां देश की सुरक्षा और आर्थिक अखंडता के लिए खतरा बन सकती हैं। इसी आधार पर यूएपीए की धाराएं लगाई गई हैं। प्राथमिकी में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और गैरकानूनी गतिविधियों को बढ़ावा देने जैसे आरोप भी शामिल हैं। हालांकि, यह सभी आरोप जांच एजेंसी के दावे हैं और इनकी अंतिम पुष्टि जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।

 

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