OM Birla: लोकसभा अध्यक्ष की जनप्रतिनिधियों को सीख, सदन के भीतर और बाहर अपने व्यवहार को रखें संयमित और गरिमामय
लोकसभा अध्यक्ष ने ज़ोर देकर कहा कि सार्वजनिक जीवन में शुचिता आवश्यक है, क्योंकि जनमानस पर इसका गहरा प्रभाव पड़ता है। उन्होंने सुझाव दिया कि जनप्रतिनिधि सदन के भीतर और बाहर अपने व्यवहार को संयमित और गरिमामय रखें...
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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शुक्रवार को गंगटोक, सिक्किम में सीपीए भारत क्षेत्र के 19वें वार्षिक जोन III सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित किया। लोकसभा अध्यक्ष ने राजनीतिक विमर्श में असंसदीय व्यवहार और अवांछनीय शब्दावली के प्रयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाओं से लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता के विश्वास क्षीण होता है।
लोकसभा अध्यक्ष ने ज़ोर देकर कहा कि सार्वजनिक जीवन में शुचिता आवश्यक है, क्योंकि जनमानस पर इसका गहरा प्रभाव पड़ता है। उन्होंने सुझाव दिया कि जनप्रतिनिधि सदन के भीतर और बाहर अपने व्यवहार को संयमित और गरिमामय रखें। सभी जनप्रतिनिधियों की ओर पूरा देश देखता है। वे जो कहते हैं, जो करते हैं, वह मिसाल बनती है, जो कि जनप्रतिनिधियों पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि सदन के भीतर और बाहर जनप्रतिनिधियों का आचरण, व्यवहार और शब्दावली ऐसी होनी चाहिए जो समाज में सकारात्मक संदेश दे तथा आदर्श स्थापित करें और यह बात देश की प्रत्येक लोकतांत्रिक संस्था पर लागू होती है। नागरिकों के प्रति जितना दायित्व प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के सदनों का है, उतना ही स्थानीय निकायों और पंचायतों की भी है।
लोकसभा अध्यक्ष ने अपने संबोधन में सीपीए भारत क्षेत्र ज़ोन-III की विधायी संस्थाओं के बीच नियमित चिंतन मंथन में सक्रिय भूमिका की सराहना की। अपार संभावनाओं से परिपूर्ण पूर्वोत्तर क्षेत्र व्यापक चर्चा संवाद के माध्यम से क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान निकाल रहा है और देश की विकास यात्रा में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास के लिए गए कई महत्वपूर्ण फैसलों और क्षेत्र के लोगों के अथक प्रयासों के कारण गत कुछ वर्षों में इस क्षेत्र के आठ राज्यों ने अपनी विकास यात्रा में लंबी छलांग लगाई है।
सम्मेलन के लिए तीन विषय 'संसद और विधान सभाओं को जनता के लिए अधिक सुलभ बनाना', मादक पदार्थों का सेवन और इस समस्या से निपटने हेतु भावी योजना और 'साइबर बुलिंग' के विषय में लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने कहा कि क्षेत्र के सभी राज्यों के संदर्भ में ये तीनों ही विषय बहुत प्रासंगिक हैं और इन पर गहन चर्चा की गई है। 'संसद और विधानसभाओं को जनता के लिए अधिक सुलभ बनाने' विषय पर लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि आज के समय में तकनीक में तेजी से बदलाव हो रहा है, इसलिए हम सभी को सक्रिय रहना होगा। संसद में महत्वाकांक्षी ‘डिजिटल संसद परियोजना’ पर कार्य चल रहा है, जिसका प्रमुख उद्देश्य संसद के कार्यकरण को लोगों के लिए और सुलभ बनाना तथा सांसदों एवं नागरिकों के बीच संपर्क का एक प्रभावी माध्यम बनाना है।
सम्मलेन के दुसरे विषय पर लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने कहा कि मादक पदार्थों का सेवन निश्चित रूप से एक राष्ट्रीय समस्या है। यह एक बॉर्डरलेस क्राइम है, जो इस समस्या को अत्यंत चुनौतीपूर्ण बना देता है। पूर्वोत्तर राज्यों की से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं तथा पहाड़ी भूभाग के संदर्भ में उन्होंने कहा, ऐसी परिस्थिति में क्षेत्र में नशीले पदार्थों के अवैध व्यापार का खतरा अधिक है। मादक पदार्थों के इस खतरे से निपटने के लिए न केवल सभी ड्रग लॉ इनफोर्समेंट और खुफिया एजेंसियों के बीच, बल्कि इस क्षेत्र के सभी सीमावर्ती जिलों तथा राज्यों के बीच समन्वय की आवश्यकता है। लोकसभा अध्यक्ष ने उपस्थित जनप्रतिनिधियों को सभी स्तरों पर सहयोग और समन्वय करने तथा हर समुदाय तक अपनी बात पहुंचाने का आग्रह किया और इस मुहीम को जन आंदोलन बनाने पर ज़ोर दिया।
साइबर-बुलिंग के विषय लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने असम सरकार के सुरक्षा अभियान हेतु यू-रिपोर्ट, इंटरैक्टिव डिजिटल टूल की प्रशंसा की और इस पहल को अन्य राज्यों में लागू किए जाने पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि, इस प्रकार के सम्मेलन सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने और एक-दूसरे से सीखने के लिए एक मंच उपलब्ध कराते हैं। पूर्वोत्तर के युवाओं को "एडवांसिंग नॉर्थ-ईस्ट" के माध्यम से अपनी क्षमता संवर्धन के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं, जो पूर्वोत्तर क्षेत्र के युवाओं को शिक्षा, रोजगार और उद्यमिताशीलता के संबंध में आवश्यक ज्ञान और मार्गदर्शन प्रदान करेगा।
लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने सभी से आग्रह किया कि वे नीतियों और कानूनों में सुधार और समय के अनुसार बदलाव करें ताकि आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए कानूनी तंत्र को मजबूत बनाया जा सके। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो साइबर बुलइंग से निपटने के लिए कठोर कानून पारित किए जाएंगे।
कार्यक्रम में सिक्किम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य, सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग, राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश, अरुणाचल प्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष और सीपीए भारत क्षेत्र जोन-III के अध्यक्ष पासंग डी. सोना, सिक्किम विधान सभा के अध्यक्ष अरुण कुमार उप्रेती और भारत के विधायी निकायों के पीठासीन अधिकारी, संसद सदस्य, सिक्किम विधानमंडल के सदस्य और अन्य गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर मौजूद रहे।