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लोकसभा चुनाव: 249 सीटों वाले इन पांच राज्यों का जनादेश तय करेगा देश का भविष्य, ये है पूरा समीकरण 

Sun, 10 Mar 2019 07:34 PM IST
Nilesh Kumar निलेश कुमार, अमर उजाला
निलेश कुमार, अमर उजाला Published by: Nilesh Kumar Updated Sun, 10 Mar 2019 07:34 PM IST
सार

  • सात चरणों में होंगे लोकसभा चुनाव, 23 मई को आएंगे नतीजे
  • देश में 543 लोकसभा सीटें, पांच राज्यों के दायरे में 249 सीटें 
  • सीटों की संख्या और राजनीतिक दृष्टि से अहम हैं ये पांच राज्य
  • पांच राज्यों के चुनाव परिणाम का असर पूरे देश की राजनीति पर 

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Lok Sabha Elections 2019: These 5 states may decide which party forms government
देश की 543 लोकसभा सीटों पर सात चरणों में होंगे चुनाव (ग्राफिक्स: रोहित झा) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एक लंबे इंतजार के बाद रविवार को लोकसभा चुनाव 2019 की तारीखें तय हो गईं। इस बार देश में सात चरणों में मतदान हो रहे हैं। 11 अप्रैल, 18 अप्रैल, 23 अप्रैल, 29 अप्रैल, 6 मई, 12 मई और 19 मई, इन सातों चरण के मतदान के बाद 23 मई को मतगणना होगी और देश में नई सरकार तय हो जाएगी। 

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देश की सभी 543 सीटों पर हार-जीत अहम होती है, लेकिन पांच ऐसे राज्य हैं, जहां के चुनाव परिणाम देश का ताज-ओ-तख्त तय करते हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और महाराष्ट्र जैसे राज्य शामिल है। 249 लोकसभा सीटें कवर करने वाले ये राज्य लोकसभा सीटों की संख्या की दृष्टि से भी अहम हैं और राजनीतिक दृष्टि से भी।  
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आइए जानतें हैं लोकसभा चुनाव में इन पांच राज्यों की भूमिका कैसे महत्वपूर्ण है और कैसे इन राज्यों का जनादेश देश का भविष्य तय करेगा!

उत्तर प्रदेश: दिल्ली की गद्दी का रास्ता यहां से होकर जाता है

सबसे ज्यादा 80 लोकसभा सीटों वाले राज्य उत्तर प्रदेश पर हर राजनीतिक दल की नजर रहती है। कहा जाता है कि दिल्ली की गद्दी का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाता है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बीच एनडीए ने शानदार जीत दर्ज की थी। 80 में से 71 सीटें भाजपा ने जीती थी। सपा ने 5 सीटें, जबकि बसपा जैसी बड़ी पार्टी का सूपड़ा साफ हो गया था। 
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इस बार यहां का समीकरण बिल्कुल ही अलग है। एनडीए के विरोध में 10 मार्च तक की स्थिति के अनुसार कांग्रेस अलग लड़ रही है, जबकि सपा और बसपा ने यहां हाथ मिला लिया है, राष्ट्रीय लोक दल भी उसके साथ है। सपा यहां 37 सीटों पर बसपा 38 सीटों पर और रालोद यहां तीन सीटों पर चुनाव लड़ रही है।

अमेठी और रायबरेली सीटें इस गठबंधन ने राहुल गांधी और सोनिया गांधी के लिए छोड़ दी है और इसी आधार पर सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव सार्वजनिक मंचों से कहते फिर रहे हैं कि इस महागठबंधन में कांग्रेस भी उनके साथ है। भाजपा के लिए यहां मुश्किलें खड़ी हो सकती है, हालांकि विपक्ष का स्पष्ट तौर पर एकजुट न होना भाजपा को फायदा पहुंचा सकता है। 

महाराष्ट्र: भाजपा-शिवसेना जुड़े, कांग्रेस-एनसीपी से भिड़ंत

Lok Sabha Elections 2019: These 5 states may decide which party forms government
भाजपा-शिवसेना में बनी सहमति - फोटो : अमर उजाला

महाराष्ट्र में 48 लोकसभा सीटें हैं। एनडीए यहां सत्ता में है। लोकसभा चुनाव 2014 में एनडीए ने 41 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसके अलावा एनसीपी को पांच, जबकि कांग्रेस को दो सीटें मिली थीं। पिछले ढाई दशक से हिंचकोले खाता रहा भाजपा और शिवसेना का गठबंधन एक बार फिर से हुआ है।

खींचतान और तनातनी के बीच दोनों के बीच सीटों का भी बंटवारा हो चुका है। भाजपा 25 और शिवसेना 23 पर लड़ेगी। इस बंटवारे से दोनों दल ने राहत की सांस ली है, लेकिन एनडीए में शामिल आरपीआई को एक भी सीट नहीं दिए जाने से केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास अठावले नाराज चल रहे हैं।

एनडीए के विरोध में यहां कांग्रेस और एनसीपी का गठबंधन है। सीट बंटवारे की बात करें तो 40 सीटों के लिए 50-50 का फॉर्मूले की चर्चा है, जबकि शेष आठ सीटों पर  अंतिम सहमति नहीं बन पाई है। शरद पवार की अगुआई वाले एनसीपी का यहां अपना जनाधार है। अजीत पवार ने पिछले दिनों आठ सीटों पर अंतिम सहमति नहीं बन पाने की बात कही थी।

पिछले दिनों कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने सपा और बसपा को अपने साथ शामिल होने का निमंत्रण दिया था। इस रणनीति के तहत कांग्रेस महाराष्ट्र में बसपा को दो और सपा को एक सीट देने को तैयार है।  

पश्चिम बंगाल : ममता बनर्जी बनाम मोदी

यहां कुल 42 लोकसभा सीटें हैं। लोकसभा चुनाव 2014 में तृणमूल कांग्रेस(टीएमसी) को 34 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। कांग्रेस को चार सीटें, भाजपा को दो, सीपीएम को दो सीटें मिली थी। टीएमसी के नेतृत्व वाली विपक्षी पार्टी महागठबंधन की ही तरह इस लोकसभा चुनाव में भाजपा की भी नजर पश्चिम बंगाल फतह करने की हैं। 

जनवरी में ममता बनर्जी ने 15 से ज्यादा विपक्षी दलों को एकजुट कर अपनी ताकत का एहसास कराया था, जबकि भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी बड़ी रैलियां कर चुके हैं। पिछले दिनों कोलकाता पुलिस बनाम सीबीआई विवाद और रैलियों में स्पष्ट दिखा था कि पश्चिम बंगाम में पीएम मोदी और सीएम ममता के बीच नाक की लड़ाई होगी। 

बिहार: एनडीए ने बांटी सीटें, महागठबंधन डामाडौल

Lok Sabha Elections 2019: These 5 states may decide which party forms government
नीतीश कुमार और पीएम मोदी

बिहार 40 लोकसभा सीटों वाला राज्य है। पिछले लोकसभा चुनाव में जदयू, भाजपा से अलग होकर कांग्रेस-राजद महागठबंधन संग चुनाव लड़ी थी। भाजपा, लोजपा और रालोसपा के एनडीए गठबंधन को 31 सीटों पर जीत मिली थी, जबकि इधर राजद को चार, कांग्रेस व जदयू को दो और एनसीपी को एक सीट पर जीत हासिल हुई थी। 

इस बार समीकरण अलग है। नीतीश कुमार की जदयू एक बार फिर एनडीए में शामिल है। बिहार में एनडीए में सीट बंटवारा तय  हो चुका हैं। भाजपा और जदयू 17-17 सीटों पर और लोजपा छह सीटों पर चुनाव लड़ेगी। 

एनडीए के विरोध में यहां कांग्रेस-राजद नेतृत्व वाली महागठबंधन में सीट बंटवारा अबतक तय नहीं हो पाया है। राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव जेल के अंदर से ही रणनीति तय कर रहे हैं। राजद में सीटों का बंटवारा वही तय करेंगे। कांग्रेस कम से कम 12 सीटों पर लड़ना चाह रही है, जबकि राजद 10 देना चाह रही थी। फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है। 

तमिलनाडु: भाजपा को बड़े दल एआईएडीएमके का साथ 

तमिलनाडु में 39 लोकसभा सीटें हैं। 2014 लोकसभा चुनाव में एआईएडीएमके ने 37 सीटें जीती थी। पर जीत मिली थी। वहीं विपक्षी दल डीएमके को एक भी सीट नहीं मिली थी। इस बार तमिलनाडु में भाजपा को सत्तारूढ़ दल ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम(एआईएडीएमके) का साथ मिल गया है। 

तमिलनाडु की 39 और पुडुचेरी की एक सीट में से एआईएडीएमके 25 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। इनमें से टीएमसी, एनआरसी और पीटी को भी सीटें देगी। इधर, भाजपा अपने हिस्से की 15 में से 8 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि चार सीटों पर पीएमके और तीन सीटों पर डीएमडीके लड़ेगी। 

इधर, एनडीएके के विरोध में कांग्रेस ने डीएमके संग गठबंधन बनाया है। डीएमके ने तमिलनाडु की नौ और पुडुचेरी की एक लोकसभा सीट कांग्रेस को दी है। बाकी सीटों पर वह उम्मीदवार उतारेगी। 

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