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Hindi News ›   India News ›   Lok Sabha Elections 2019: Nitin Gadkari interview with Amar Ujala

अमर उजाला से खास बातचीत में बोले गडकरी, अच्छे दिन तो मानने पर होते हैं

Sat, 06 Apr 2019 08:24 PM IST
अमित मंडल चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमित मंडल Updated Sat, 06 Apr 2019 08:24 PM IST
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Lok Sabha Elections 2019: Nitin Gadkari interview with Amar Ujala
नितिन गडकरी - फोटो : Amar Ujala
मोदी सरकार के सबसे लोकप्रिय मंत्रियों में शुमार नितिन गडकरी ने बात कम, काम ज्यादा का रास्ता अपनाया और नतीजा यह कि केंद्रीय मंत्रियों में उनका रिपोर्ट कार्ड बेहद आकर्षक है। केंद्रीय परिवहन मंत्री के रूप में उनके काम, रसूख और संघ से नजदीकी की वजह से यह चर्चा भी छिड़ी कि लोकसभा चुनाव नतीजों में यदि थोड़ी ऊंच-नीच हुई तो गडकरी प्रधानमंत्री पद के दावेदार भी हो सकते हैं। 
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अपने गृहनगर और संसदीय क्षेत्र नागपुर (महाराष्ट्र) में दूसरी बार परचम फहराने के लिए प्रचार में जुटे केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से विशेष बातचीत की रवि बुले ने। 
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सवाल-2014 में भाजपा सत्ता में आने के लिए वोट मांग रही थी, अब सत्ता में रहने के लिए। क्या फर्क और तर्क हैं पार्टी के?
पिछली बार हमारे प्रचार को लेकर लोगों के मन में आशाएं-आकांक्षाएं थीं। उस समय की सरकार के प्रति असंतोष था। इस माहौल में हम चुनाव जीते। अब 2019 में हम अपने काम लेकर लोगों के बीच जा रहे हैं। देश की तस्वीर बदली हुई है। इसी सकारात्मकता के आधार पर लोगों से वोट मांग रहे हैं। 
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सवाल-आप देश में हुए बदलाव के लिए वोट मांग रहे हैं, कांग्रेस कह रही है कि बदलाव के लिए वोट करें! 
कांग्रेस हमारे काम को अच्छा कहेगी तो फिर विपक्ष कैसे रहेगी? उन्हें उनका काम करने दीजिए। सच और झूठ का निर्णय जनता करेगी।

सवाल-क्या कांग्रेस मजबूत विपक्ष है?
मैं सोचता हूं कि अपना काम करना ठीक है। मेरा काम इतना बड़ा है कि नकारात्मक बात करने की आवश्यकता ही नहीं है।

सवाल-लेकिन राजनीति में नकारात्मकता बहुत दिखने लगी है। दोनों पक्षों से।  
राजनीति में विचारों की लड़ाई विचारों से करनी चाहिए। मतभिन्नता और मतभेद हो सकते हैं, मनभेद नहीं होना चाहिए। जब मैं भाजपा अध्यक्ष था, मैंने अटलजी की एक बात अध्यक्ष की कुर्सी के पीछे लिखी थी, जो आज भी लिखी हुई है— ‘छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता, टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता।’ दिल बड़ा रखना चाहिए और आगे चलना चाहिए।

सवाल-क्या इसीलिए सोनिया, राहुल से लेकर केजरीवाल तक तारीफ करते हैं?
मैं लोकप्रिय हूं या नहीं, लोगों को तय करना है। अपना काम करते रहना चाहिए।

सवाल-बतौर केंद्रीय मंत्री आपके काम की  प्रशंसा है। प्रतिदिन 30 किलोमीटर लंबी सड़क आज बन रही है। यह कैसे हुआ?
इस महीने यह आंकड़ा 33-34 किलोमीटर प्रतिदिन तक पहुंचा है। मैंने जल परिवहन में भी काम किया। भारतमाला व सागरमाला (समुद्र तटों व बंदरगाहों का विकास) दो बड़े प्रोजेक्ट मेरा स्वप्न थे। 11 लाख करोड़ रुपये के काम रोड सेक्टर में किए जबकि सागरमाला में 16 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य में से पांच लाख करोड़ का काम कर चुका हूं। एक लाख करोड़ का वाटर रिसोर्सेस और गंगा का काम किया। 

सवाल-नमामि गंगे से लोग संतुष्ट नहीं हैं। 
अभी 100 फीसदी काम नहीं किया। हम 26 हजार करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। गंगा की कई उप-नदियां हैं, कई नाले जुड़े हैं।  30 फीसदी काम ही हुआ है। लेकिन हाल में कुंभ में जो लोग गंगा स्नान के लिए आए थे, उन्होंने कहा कि पानी बहुत शुद्ध था। गंगा शत-प्रतिशत अविरल—निर्मल बनेगी। यह वचन है।

सवाल-फिर सत्ता मिली तो चुनौतियां क्या होंगी?
आशा-अपेक्षाएं-आकांक्षाएं बढ़ती जाती हैं। कोशिश होगी कि जो लोगों के पास नहीं है, वे चीजें और सुविधाएं पहुंचें। भय-भूख-आतंक-भ्रष्टाचार से मुक्त हो देश। हम जल्द ही दुनिया की तीन-चार आर्थिक ताकतों में शुमार होंगे। भुखमरी-बेरोजगारी पूरी तरह खत्म होगी।
मोदी के कार्यकाल में ज्यादातर मंत्री चुप रहे। आपका क्या अनुभव रहा?
उनका नेतृत्व विकास की दिशा में रहा है। वह देश के लिए समर्पित लीडर हैं। वह तेजी से फैसले लेते रहे। उन्होंने हिंदुस्तान की प्रतिष्ठा और सम्मान पूरी दुनिया में बढ़ाया है।
 

सवाल- नोटबंदी व जीएसटी के फैसलों से आम आदमी सबसे ज्यादा परेशान हुआ।
कालेधन के खिलाफ लड़ने की बात थी तो तय है कि हमें अपनी अर्थव्यवस्था में कुछ सुधार करने पड़ेंगे। स्वाधीनता के बाद जीएसटी सबसे बड़ा आर्थिक सुधार था। जो रिफॉर्म होते हैं, उनकी शुरुआत में तकलीफें आती हैं। लेकिन जीएसटी से आज लोग खुश हैं। नोटबंदी की बात है तो कालेधन पर प्रहार के खिलाफ हमारा जो वादा था, उस आधार पर हमने यह काम किया था। उद्देश्य यही था कि किसी भी तरह से चल रही एक समानांतर अर्थव्यवस्था खत्म करें। इसमें काफी सफलता मिली।

सवाल-नोटबंदी के दौरान हुई कुछ मौतों पर कोई बात न होने से लोगों ने यह भी समझा कि सरकार संवेदनशील नहीं है।
अगर ऐसा हुआ तो मोदी जी पर आरोप लगाना उचित नहीं है। गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी जैसी चीजें हमारे कार्यकाल में पैदा नही हुईं। कांग्रेस ने 60-65 साल राज किया, वह जवाब दे कि इतने वर्षों में उसने क्या किया। पहली बार हमने नई नीति दी। उससे आने वाले बदलावों में पांच-सात साल लगेंगे। 

सवाल-राहुल गांधी ने 'न्याय' की बात कही है। 25 करोड़ गरीब भारतीयों को साल में 72 हजार रुपये देंगे। इसे कैसे देखते हैं?
लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अधिकार है कि अपने मन की बात करे। मैं सिर्फ अपने किए काम की बात करना चाहता हूं।

सवाल-पिछली बार ‘अच्छे दिन’ का नारा था, अब इस पर चर्चा क्यों नहीं है?
पांच साल पहले साढ़े तीन करोड़ लोगों के बैंक खाते थे, जो अब 34 करोड़ रुपये हैं। 70 हजार करोड़ रुपये इन खातों में जमा हुए। किसानों को डेबिट कार्ड मिले। तीन करोड़ लोगों को मुद्रा योजना में लोन मिला। फसल बीमा में किसानों को पैसा मिला। प्रधानमंत्री आवास योजना में ढाई करोड़ लोगों को घर िमले। क्या इनके अच्छे दिन नहीं आए। अच्छे हाईवे, रोड, सुरंगें बनीं, लोगों का समय बच रहा है। क्या ये अच्छे दिन आना नहीं है? असल में अच्छे दिन तो मानने पर होते हैं। यह फितरत है कि दस अच्छी चीजें होती हैं तो लोग कहते हैं कि ग्यारहवीं नहीं हुई।

सवाल-मोदी राज में मीडिया दबाव में है?
मीडिया को दबाव में रखने का मोदी जी का और हमारी सरकार का प्रयास कभी नहीं रहा। अच्छा काम किया है तो लोग तारीफ करते हैं। अच्छा लिखते, अच्छा बताते हैं।

सवाल-अभिव्यक्ति की आजादी पर संकट जैसी बात?
मुझे बताइए कि ये जो पुरस्कार वापस करने वाले लोग थे, जब मुंबई में हमला हुआ था 11 सितम्बर को, तब उन्होंने पुरस्कार क्यों वापस नहीं किए। ये सब राजनीति है। हम लोगों का राज आने से जो दुखी हुए, उनके मन में जो गुस्सा था, उसका उन्होंने राजनीतिकरण किया।

सवाल-गौरक्षा के नाम पर अप्रिय घटनाएं?
किस भी निरपराध मुस्लिम या हिंदू को मारना गलत है। गौरक्षा के मामले में भी हत्या या हमलों की जो घटनाएं हुईं, हमने उनका लगातार विरोध किया। किसी को भी टीवी पर भगवा कपड़े पहनाकर बैठा देते हैं, उसके मुंह से कुछ निकलवाते हैं और फिर हमारे नाम पर बिल फाड़ते हैं। ये तो गलत है।

 

सवाल-एनडीए के शासनकाल में देशभक्ति की भावनाएं तेजी से उभरीं। इनका समर्थन न करने वालों को देशद्रोही कह दिया गया!
मैं जब भाजपा अध्यक्ष था तो कार्यालय में हमने तीन बातें सामने लिख रखी थीं। पहली— राष्ट्रवाद। राष्ट्र की सर्वाधिक उन्नति, विकास और राष्ट्रभक्ति, यह हमारी आत्मा है। दूसरी बात थी— सुशासन और विकास। तीसरी बात—अंत्योदय। राष्ट्रवाद का कोई ‘फेज’ नहीं होता। यह भाजपा का स्थायी विचार है। जहां तक किसी को देशद्रोही करार देने का मामला है, यह गलत बात है। यह बात मीडिया में आती रहती है। मीडिया पहले खुद सवाल उठाता है, फिर दिए गए जवाबों को लिखता-बताता है कि इसने ऐसा कहा, वैसा कहा। सबमें झगड़े लगाता है।

सवाल-देशभक्ति और देशद्रोह पर मीडिया से ज्यादा सोशल मीडिया में लोग आमने-सामने दिखते हैं।
जिन्हें यह चलाना है, चलाते रहें, अपन अपना काम करते रहें।

सवाल-पिछले कुछ महीनों में आपके कुछ भाषणों में संकेत उभरे कि आप अगले प्रधानमंत्री होने के इच्छुक हैं!
देखिए, मैंने ऐसा कोई संकेत वगैरह नहीं दिया। मैं अपनी भूमिका स्पष्ट कर चुका हूं। हमें पूर्ण बहुमत मिलेगा और मोदी जी प्रधानमंत्री होंगे। मेरे बारे में कोई संशय नहीं है, हां... कुछ लोग मुझे भिड़ाना चाहते हैं। मेरा चाहना, न चाहना मुझे पता है। यह राजनीति है। मैं मानता हूं कि राजनेता को सामाजिक विकास के लिए काम करते रहना चाहिए। गांव, गरीब, मजदूर, किसान बेरोजगार के लिए काम।

सवाल-अपने अब तक के कॅरिअर में सबसे संतोषजनक काम किसे मानते हैं?
मैं परिवहन मंत्री बना तो इस देश में मैकैनाइज्ड ई-रिक्शा लाया। लगभग 99 फीसदी जगहों तक यह पहुंच गया है। एक करोड़ लोग, जो आदमी होकर आदमी को रिक्शे पर खींचते थे, मैंने इन एक करोड़ को शोषण से मुक्त किया। यह मेरे जीवन का सबसे बड़ा काम है। इसके लिए मैंने सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी।

सवाल-लेकिन अमीर ज्यादा अमीर हुए, गरीब जहां का तहां है। बेरोजगारी बढ़ने के भी आंकड़े हैं।
ये समस्याएं पांच साल में पैदा नहीं हुईं। मैंने 17 लाख करोड़ रुपये के काम किए हैं। जब 10 हजार करोड़ के काम होते हैं तो एक लाख लोगों को रोजगार मिलता है। मैंने कितने लोगों को रोजगार दिया, आप देंखें। इतने रोड बन रहे हैं, निर्माण हो रहा है तो क्या रोजगार निर्माण नहीं हुआ?

 
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