लोकसभा चुनाव 2019 में कितना बड़ा मुद्दा बनेगा नोटबंदी, कांग्रेस करेगी प्रहार या भाजपा करेगी पलटवार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देश में होने वाले आम चुनाव की तारीखें घोषित कर दी गई है। सात चरणों में होने वाले मतदान के बाद 23 मई को मतगणना होगी और यह भी तय हो जाएगा कि देश में किसकी सरकार बनेगी! इस बीच भाजपा और कांग्रेस के अलावे सपा-बसपा, तृणमूल कांग्रेस जैसी पार्टियों ने भी अपने चुनावी मुद्दे तय कर रखे हैं। राष्ट्रवाद, पाकिस्तान, राम मंदिर, राफेल विमान सौदा, गरीब-मजदूर-किसान जैसे मुद्दों के इर्द-गिर्द लोकसभा चुनाव होना है।
इन मुद्दों के अलावे नोटबंदी, जीएसटी जैसे देश के कुछ अन्य आर्थिक मुद्दे भी हैं। जीएसटी का तो कांग्रेस ने विरोध किया ही है, नोटबंदी के फैसले पर भी वह एनडीए सरकार का विरोध करती रही है। चुनाव की तारीखों की घोषणा होते ही ठीक अगले दिन कांग्रेस ने नोटबंदी को देश का बड़ा घोटाला बता दिया। सोमवार को वरिष्ठ कांग्रेसी नेता जयराम रमेश ने प्रेस कांफ्रेंस के दौरान केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के इस फैसले पर जमकर हमला बोला।
भाजपा शुरू से नोटबंदी को कालाधन और आतंकवाद पर प्रहार बताती रही और देशहित में इसे बड़ा फैसला करार देती रही है, जबकि कांग्रेस भाजपा के दावों को लगातार फेल बताती रही है। ऐसे में कांग्रेस के आरोपों के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा कैसे पलटवार करती है या फिर कांग्रेस इसे चुनाव में कितना बड़ा मुद्दा बना पाती है!
सरकार ने ये फायदे गिनाए थे
- आतंकवाद पर कड़ा प्रहार हुआ
- कालाधन और भ्रष्टाचार पर लगाम लगी
- बाजार में मुद्रा का चलन बढ़ा
- एटीएम से पैसों की निकासी में उछाल
- मोबाइल बैंकिंग के जरिए लेनदेन बढ़ी
- नोटबंदी के बाद रिटर्न फाइल करने वाले बढ़े
कांग्रेस ये आरोप लगाती रही
- देश में बेरोजगारी बढ़ी, भटकाव बढ़ा
- छोटे और मझोले व्यापारी प्रभावित हुए
- आतंकवाद और भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं
- देश भर में एटीएम की कतार में हुई मौतें
- 99.3 फीसदी नोट लौटे, कहां गया कालाधन
आठ नवंबर 2016 को हुई थी नोटबंदी, रहा ऐसा असर
प्रधानमंत्री मोदी ने नोटबंदी का फैसला झटके से लिया था और केंद्र सरकार इस फैसले पर काबिज रही। आठ नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी टेलीविजन स्क्रीन पर देश की जनता से मुखातिब हुए और 500 और 1000 रुपये के नोट बंद करने का फैसला सुनाया। भारत सरकार की ओर से कहा गया कि इस फैसले से लोगों की अघोषित संपत्ति सामने आएगी और इससे जाली नोटों का चलन भी रुकेगा। ये भी कहा गया कि इस फैसले से भारतीय अर्थव्यवस्था में नकदी पर निर्भरता कम होगी। इस फैसले के नतीजे मिले जुले साबित हुए।
नोटबंदी से अघोषित संपत्तियों के सामने आना स्पष्ट नहीं दिखा है। वहीं, इस नोटबंदी से कर संग्रह की स्थिति बेहतर होने में मदद मिली है। नोटबंदी से डिजिटल लेनदेन भी बढ़ा है लेकिन लोगों के पास नकद भी रिकार्ड स्तर तक पहुंच गया है।
सरकार ने कहा था कि वह अर्थव्यवस्था से बाहर गैर कानूनी ढंग से रखे धन को निशाना बना रही थी क्योंकि इस धन से भ्रष्टाचार और दूसरी गैरकानूनी गतिविधियां बढ़ती हैं। टैक्स बचाने के लिए ही लोग इस पैसे की जानकारी छुपाते थे। अनुमान ये था कि जिनके पास बड़ी संख्या में गैरकानूनी ढंग से जुटाए गए नकदी हैं उनके लिए इसे कानूनी तौर पर बदलवा पाना संभव नहीं होगा।
नोटबंदी का फैसला चौंकाने वाला था और जब इसे लागू किया गया तो काफी भ्रम की स्थिति भी देखने को मिली थी। आलोचकों के अनुसार, इस फैसले से भारतीय अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई। नकदी पर निर्भर रहने वाले गरीब और निम्न मध्यमवर्गीय लोगों का जनजीवन सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ।