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Hindi News ›   India News ›   Lok Sabha Chunav Result 2019 Latest News: Uttrakhand BJP-Congress Win-Loss Reasons  

उत्तराखंड में स्थानीय मुद्दे नहीं, 'मोदी लहर' बनी जीत की वजह, विकास नहीं 'राष्ट्रवाद' पर पड़े वोट 

Thu, 23 May 2019 08:40 PM IST
ललित फुलारा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ललित फुलारा Updated Thu, 23 May 2019 08:40 PM IST
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Lok Sabha Chunav Result 2019 Latest News: Uttrakhand BJP-Congress Win-Loss Reasons  
नरेंद्र मोदी - फोटो : अमर उजाला

2019 लोकसभा चुनाव में 1 करोड़ से ज्यादा आबादी वाले उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी की जीत की वजह, विकास के मुद्दे नहीं, बल्कि 'राष्ट्रवाद' रहा। इस पहाड़ी सूबे में स्थानीय मुद्दों को छोड़कर 'मोदी लहर' वोट बैंक में तब्दील हुई और 'राष्ट्रवाद' पर भाजपा के खाते में जमकर वोट पड़े। यही वजह है कि साल 2014 की ही तरह 2019 में भी सूबे की 5 सीटों भारतीय जनता पार्टी के खाते में गई। जबकि, कांग्रेस इस बार भी मतदाताओं का भरोसा जीतने में नाकाम रही।

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दरअसल, पुलवामा आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ एयर स्ट्राइक ने भारतीय जनता पार्टी से खिसकने की सोच रहे मतदाताओं को फिर से मजबूती के साथ पार्टी से जोड़ दिया और चुनाव में पहाड़ के स्थानीय मुद्दे 'नशा नहीं रोजगार', पलायन और विकास, 'राष्ट्रवाद' के माहौल में कहीं पीछे छूट गए।उत्तराखंड में लोकसभा की पांच सीटों के लिए 11 अप्रैल को वोट पड़े। इसी वक्त यह तय हो गया था कि पहाड़ की जनता मजबूती के साथ एक बार फिर केंद्र में नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहती है। उत्तराखंड को बने हुए 19 साल हुए हैं और यह सूबा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की ही देन माना जाता है। यूपी से अलग होकर बने इस पहाड़ी राज्य ने 19 सालों के राजनीति सफर में कई बदलावों को देखा।

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अलग राज्य बनने के बाद इस पहाड़ी प्रदेश में मुख्य तौर पर दो ही राजनीतिक पार्टियों- भाजपा एवं कांग्रेस का राज रहा। 2014 में मोदी लहर की बदौलत लोकसभा की पांचों सीटें भाजपा के खाते में गई और किसी जमाने में 'हाथ' को देखकर वोट डालने वाले पहाड़ियों ने 'कमल' के फूल पर भरोसा जताया। 2019 में भी सूबे की जनता ने लोकसभा की पांचों सीटें भाजपा की झोली में डाली और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बाबा केदारनाथ का आशीर्वाद दिला दिया। 2009 के लोकसभा चुनाव में पहाड़ की जनता ने कांग्रेस पर भरोसा जताया और केंद्र में मनमोहन सिंह की सरकार बनीं।

 

लेकिन, पहाड़ के लोगों की न तो पलायन की समस्या खत्म हुई और न ही बेरोजगारी की, ऊपर से घर-घर तक शराब ने लोगों को अपनी चपेट में ले लिया। इसके बाद 2014 की मोदी लहर ने पहाड़ के नौजवानों को कुछ सपने दिखाए और भाजपा ने न सिर्फ लोकसभा चुनाव जीता बल्कि विधानसभा चुनाव में भी सूबे में 'कमल' ही खिला। 

पहाड़ के ज्यादातर घरों से लोग फौज में जाते हैं। यह परंपरा काफी पुरानी है। आपको लगभग हर घर से कोई न कोई फौज में मिल ही जाएगा।  इस बार का चुनावी मुद्दा भी 'राष्ट्रवाद' रहा। पहाड़ के गांव-गांव में बालाकोट हमले के बाद समवेत स्वर में एक ही आवाज देखने को मिल रही थी- एक बार फिर मोदी सरकार। समवेत स्वर में गुंजी यह आवाज सफल हुई और पांचों सीटें भाजपा ने निकाल लीं। भारतीय जनता पार्टी ने स्थानीय समस्याओं को अनदेखा कर जहां राष्ट्रवाद एवं मोदी के सहारे सूबे में चुनाव लड़ा, वहीं कांग्रेस भी राष्ट्रवाद के खिलाफ स्थानीय समस्याओं को उठाने में नाकाम रही। पलायन सभी राजनीतिक पार्टियों के चुनावी मुद्दे से एकदम छिटका रहा। स्थानीय पार्टियों ने पहाड़ के सवालों को पुरजोर तरीके से तो उठाया लेकिन जनता का भरोसा जीतने में नाकाम रहीं।
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