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पिछले लॉकडाउन से क्या सीखने की जरूरत है, अब भूलकर भी न दोहराएं ये गलतियां

Tue, 14 Apr 2020 06:06 PM IST
Anshul Talmale अंशुल तलमले
Updated Tue, 14 Apr 2020 06:06 PM IST
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Lockdown extension: What India can learn from the mistakes of first phase
पहले लॉकडाउन की गलतियां - फोटो : पीटीआई

आखिरकार वही हुआ, जिसके कयास लगाए जा रहे थे। 25 मार्च से जारी 21 दिन के लॉकडाउन को आज 3 मई तक के लिए बढ़ा दिया गया। यानी कोरोना वायरस की वजह से लोगों को अगले 19 दिन और घरों में ही बंद रहना पड़ेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सुबह 10 बजे देश को संबोधित करते हुए लॉकडाउन बढ़ाने का एलान किया। पीएम ने कहा कि इस बार बाहर निकलने के नियम बहुत सख्त होंगे, जहां कोरोना नहीं फैलेगा, वहां 20 अप्रैल से कुछ जरूरी चीजों पर सशर्त छूट मिलेगी। लॉकडाउन के पहले चरण में देशवासियों ने कई गलतियां कीं, जिनसे आगे हमें न सिर्फ सीखने की जरूरत है बल्कि उन गलतियों के दोहराव से भी बचना होगा। तभी कोविड-19 के खिलाफ इस जंग में हमें पूरी तरह से फतह मिलेगी।

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आखिरकार वही हुआ, जिसके कयास लगाए जा रहे थे। 25 मार्च से जारी 21 दिन के लॉकडाउन को आज 3 मई तक के लिए बढ़ा दिया गया। यानी कोरोना वायरस की वजह से लोगों को अगले 19 दिन और घरों में ही बंद रहना पड़ेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सुबह 10 बजे देश को संबोधित करते हुए लॉकडाउन बढ़ाने का एलान किया। पीएम ने कहा कि इस बार बाहर निकलने के नियम बहुत सख्त होंगे, जहां कोरोना नहीं फैलेगा, वहां 20 अप्रैल से कुछ जरूरी चीजों पर सशर्त छूट मिलेगी। लॉकडाउन के पहले चरण में देशवासियों ने कई गलतियां कीं, जिनसे आगे हमें न सिर्फ सीखने की जरूरत है बल्कि उन गलतियों के दोहराव से भी बचना होगा। तभी कोविड-19 के खिलाफ इस जंग में हमें पूरी तरह से फतह मिलेगी।
 

नागरिक धर्म का पालन

लॉकडाउन की धज्जियां उड़ाते लोग
लॉकडाउन की धज्जियां उड़ाते लोग - फोटो : पीटीआई

पीएम की अपील पर अतिउत्साह

टी राजा सिंह
टी राजा सिंह - फोटो : ट्विटर
देश इस वक्त गंभीर समस्या से गुजर रहा है। एक अनजान बीमारी ने एक चौथाई दुनिया को घरों में कैद कर दिया है। लाखों मासूम लोगों की जान जा चुकी है। ऐसे विकट हालात में देशवासियों को एकजुट और उनका मनोबल बरकरार रखने के लिए पीएम मोदी अबतक दो तरह की अपील कर चुके हैं। 22 मार्च दिन रविवार को जहां शाम 5 बजे ताली और थाली बजाकर कोरोना योद्धाओं का उत्साह बढ़ाने को कहा, इसी तरह 6 अप्रैल रविवार को रात 9 बजे 9 मिनट तक अपने घरों की बत्तियां बुझाकर दीया जलाने का आह्वान किया, लेकिन दोनों ही बार कई अतिउत्साही लोगों ने जमकर तमाशा किया। दीये की जगह पटाखे छोड़े गए। 100-200 की भीड़ इकट्ठी कर पहले ताली-थाली रैली निकाली गई फिर मशाल जुलूस का भी आयोजन हुआ। देश के हर कोने से इस तरह के वीडियो  और फोटो सामने आए, जिससे सिर शर्म से झुक गया। बतौर हिंदुस्तानी हमें संकटपूर्ण हालात में एक संवेदनशील नागरिक का परिचय देना होगा।

भीड़ लगाने और किसी भी तरह के धार्मिक आयोजन से बचें

तब्लीगी जमात
तब्लीगी जमात - फोटो : PTI
27 फरवरी से 1 मार्च के बीच कुआलालंपुर में, 11-12 मार्च को पाकिस्तान के लाहौर में और फिर 13 मार्च को नई दिल्ली में तब्लीगी जमात का आयोजन हुआ। यहां ब्रूनेई, कंबोडिया, मलेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों से लोग पहुंचे थे। पूरी दुनिया जहां हाई अलर्ट पर थी, तब हजारों-लाखों लोगों की भीड़ ने कोरोना वायरस के फैलने में जमकर मदद की। वैसे तो कोविड-19 के मद्देनजर बड़े आयोजनों पर पाबंदी लगा दी गई थी, लेकिन फिर भी निजामुद्दीन में भारी भीड़ जुटी और हमारी एजेंसियों भी इसे रोकने में नाकाम रहीं। 

भारत में बड़ी संख्या में कोरोना पॉजिटिव मामले तब्लीगी जमात से जुड़े लोगों के मिले हैं। इसका मुखिया मोहम्मद साद अंडरग्राउंड हो चुका है।

गुरुद्वारे या अन्य धार्मिक स्थलों पर भी भीड़ जुटने के मामले पहले लॉकडाउन में सामने आए हैं। 

लॉकडाउन के इस अगले चरण में हमें इस तरह किसी भी धार्मिक या सामाजिक आयोजन से बचना होगा। 

अपमान नहीं हौसला अफजाई की जरूरत

देश में भले ही कोरोना संक्रमितों की संख्या 10 हजार के आंकड़े को पार कर चुकी हो, लेकिन स्वास्थ्यकर्मियों की मुस्तैदी के चलते हजार से अधिक लोग दोबारा ठीक भी हो गए। सरकारी क्वारंटीन सेंटर में अपना इलाज कराकर लौटे इन लोगों को कोरोना वॉरियर्स कहा जाए तो गलत नहीं होगा।

आमतौर पर जब लोग बीमार होते हैं तो उनके पड़ोसी और रिश्तेदार उनका साथ देते हैं और हिम्मत बढ़ाते हैं, लेकिन कोरोना वायरस के मामले में ऐसा नहीं देखा जा रहा। कई जगहों पर मरीजों के प्रति सहानुभूति रखने के बजाय असंवेदनशीलता दिखाई जा रही है। मरीजों और उसके करीबियों से अछूत की तरह व्यवहार किया जा रहा है। देश में सामाजिक बहिष्कार जैसी भी खबरें आ रहीं हैं।

दुनियाभर से आ रही दुखदायी खबरें पढ़ने और सुनने के साथ-साथ इन मरीजों ने जिस सकारात्मकता के साथ कोरोना से लड़ाई लड़ी, वह वाकई काबिल-ए-तारीफ है। ऐसे में एक आम नागरिक के नाते हम सभी का दायित्व बनता है, इन लोगों को दोबारा मुख्य धारा से जोड़ा जाए न कि उन्हें शक भरी नजरों से देखें।

मजदूरों का पलायन

कौशांबी बस स्टैंड के पास लगी लोगों की भीड़
कौशांबी बस स्टैंड के पास लगी लोगों की भीड़ - फोटो : PTI

लॉकडाउन और बंद होते उद्योगों के बीच पलायन मजदूरों की मजबूरी बन चुकी है। जीवन बचाने के साथ जीविका के बारे में सोचना उनकी विवशता है। देश की 90 फीसदी आबादी असंगठित क्षेत्र में काम करती है, जहां छोटी नौकरियां, छोटे धंधे, ठेले-खोमचे और रेहड़ी ही उनके लिए दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करते हैं। रोज कमाने और रोज खाने वालों की विवशता उन्हें कहीं ‘कोरोना का सौदागर’ न बना दे इसका ख्याल रखना होगा। देश ने दिल्ली के आनंद विहार टर्मिनल बस अड्डे की तस्वीरें देखी हैं, जब हजारों लोगों ने सोशल डिस्टेंस यानी सामाजिक दूरी की धज्जियां उड़ा दी थीं। वो हुजूम केवल और केवल अपने घरों की ओर लौटना चाहता था। गाजीपुर बॉर्डर और धौलाकुआं में भी ऐसे ही नजारे थे। हालांकि सरकार इन मजबूरों के लिए पहले पौने दो हजार करोड़ और फिर 15 हजार करोड़ रुपये का राहत पैकेज पहले ही घोषित कर चुकी है। अब जरूरत है सिर्फ धैर्य की। वरना देश के गांव-गांव तक कोरोना को फैलने से कोई नहीं रोक सकता।

नियमों में रहकर करें समाजसेवा

लॉकडाउन के दौरान पुलिसकर्मी
लॉकडाउन के दौरान पुलिसकर्मी - फोटो : पीटीआई
लोगों की मदद करना अच्छी बात है, लेकिन खाना, राशन बांटने का काम घर से करें। देखा जा रहा है कि कई समाजिक संगठन या युवानेता अपनी राजनीति चमकाने के लिए बड़ी-बड़ी रसोईघर बनाकर खाना बना रहे हैं, जहां एक साथ कई लोगों की भीड़ जुट जाती है। शहरों की पुलिस इन तथाकथित समाजसेवकों से कई बार बांटने के सामान पुलिस थाने में जमा करने की अपील तक कर चुकी है, क्योंकि लोगों तक राशन, सब्जी दूध प्रशासन पहुंचा रहा है। ऐसे में अगर आपको वाकई जनसेवा करनी है तो शासन-प्रशासन का सहयोग करें। उनके लिए जी का जंजाल न बनें। इसके साथ ही कुछ राज्यों में रबी की फसल की खरीदी शुरू होना है, सरकार ज्यादा सेंटर बना रही है ताकि ज्यादा खरीदी हो, लेकिन खरीद केंद्रों पर भीड़ न लगाएं।
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