{"_id":"582bcd7f4f1c1b59368ff479","slug":"live-updates-first-day-of-winter-session-of-parliament","type":"story","status":"publish","title_hn":"आज से शुरू होगा संसद का शीतकालीन सत्र, नोटबंदी पर एकजुट हो सकता है विपक्ष","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
आज से शुरू होगा संसद का शीतकालीन सत्र, नोटबंदी पर एकजुट हो सकता है विपक्ष
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 16 Nov 2016 08:37 AM IST
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संसद
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संसद का शीतकालीन सत्र 16 नवंबर से शुरू हो रहा है। पहले दिन 1000 और 500 के नोट के बदले जाने पर विपक्ष सरकार को घेर सकता है। इसके साथ ही एलओसी के उस पार हुए सर्जिकल स्ट्राइक और पाकिस्तान के लिए बनाई गई नीति पर भी विपक्ष एकजुट होकर अपना पक्ष रख सकते हैं।
शीतकालीन सत्र में कांग्रेस 500 और 1000 के नोट पर बहस की मांग कर सकती है। इसके साथ ही वह विमुद्रिकरण की जानकारी लीक होने पर कथित तौर पर जांच की मांग कर सकती है।
कांग्रेस, राजद, झामुमो, वाम दल, बसपा, टीएमसी, जदयू, एनसीपी समेत 13 दलों ने बैठक कर इस मुद्दे पर एक साथ सरकार पर धावा बोलने का मन बनाया है।नोट बंदी के कारण आम लोगों को हो रही तकलीफ पर विपक्षी दल एकजुट होकर सरकार को घेरने के पक्ष में तो हैं, मगर इन्हें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई पसंद नहीं है। यही कारण है कि वाम दलों के बाद कांग्रेस ने भी ममता की अगुवाई में इस फैसले के खिलाफ राष्ट्रपति से मुलाकात करने से मना कर दिया है।
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पांच सौ और हजार रुपये के नोट बंद करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले का मुखर विरोध करने वाली पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को शिवसेना का भी समर्थन मिल गया है। बुधवार को केंद्र के इस फैसले के खिलाफ ममता के साथ शिवसेना के सांसद भी राष्ट्रपति भवन जाएंगे और नोट बंदी को लेकर प्रधानमंत्री के फैसले के विरोध में ज्ञापन देंगे। वहीं, यह भी संकेत हैं कि शिवसेना नोट बंदी के खिलाफ तृणमूल की प्रस्तावित रैली में भी शामिल होगी।
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शीतकालीन सत्र में कांग्रेस 500 और 1000 के नोट पर बहस की मांग कर सकती है। इसके साथ ही वह विमुद्रिकरण की जानकारी लीक होने पर कथित तौर पर जांच की मांग कर सकती है।
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कांग्रेस, राजद, झामुमो, वाम दल, बसपा, टीएमसी, जदयू, एनसीपी समेत 13 दलों ने बैठक कर इस मुद्दे पर एक साथ सरकार पर धावा बोलने का मन बनाया है।नोट बंदी के कारण आम लोगों को हो रही तकलीफ पर विपक्षी दल एकजुट होकर सरकार को घेरने के पक्ष में तो हैं, मगर इन्हें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई पसंद नहीं है। यही कारण है कि वाम दलों के बाद कांग्रेस ने भी ममता की अगुवाई में इस फैसले के खिलाफ राष्ट्रपति से मुलाकात करने से मना कर दिया है।
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पांच सौ और हजार रुपये के नोट बंद करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले का मुखर विरोध करने वाली पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को शिवसेना का भी समर्थन मिल गया है। बुधवार को केंद्र के इस फैसले के खिलाफ ममता के साथ शिवसेना के सांसद भी राष्ट्रपति भवन जाएंगे और नोट बंदी को लेकर प्रधानमंत्री के फैसले के विरोध में ज्ञापन देंगे। वहीं, यह भी संकेत हैं कि शिवसेना नोट बंदी के खिलाफ तृणमूल की प्रस्तावित रैली में भी शामिल होगी।