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Nagpur: ‘वकीलों की यह आदत परेशान करती है’, जस्टिस चंद्रचूड़ बोले- संविधान के साथ होना चाहिए सर्वोच्च हित

Fri, 05 Apr 2024 11:12 PM IST
मिथिलेश नौटियाल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागपुर Published by: मिथिलेश नौटियाल Updated Fri, 05 Apr 2024 11:12 PM IST
सार

भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि वकीलों द्वारा लंबित मामलों या फैसलों पर टिप्पणी की जाती है और यह आदत बहुत परेशान करने वाली लगती है।

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Lawyers commenting on pending cases, judgements is very disturbing trend Says CJI Chandrachud
चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ (फाइल) - फोटो : ANI

विस्तार

भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने शुक्रवार को नागपुर के उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के शताब्दी वर्ष समारोह में भाग लिया। इस समारोह के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायपालिका इतनी मजबूत है कि अपनी प्रशंसा के साथ साथ अपनी आलोचना सहने की भी क्षमता रखती है। इस बीच उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया कि वकीलों की लंबित मामलों या फैसलों पर टिप्पणी करने की आदत बहुत परेशान करने वाली लगती है। उन्होंने कहा कि बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों और सदस्यों को न्यायिक निर्णयों पर प्रतिक्रिया करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि वे आम आदमी नहीं बल्कि अदालत के अधिकारी हैं।

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न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने दिया सुझाव 
न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि न्यायपालिका बार-बार अपनी स्वतंत्रता और पक्षपात को खत्म करने के लिए आगे आई है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और बार की स्वतंत्रता के बीच घनिष्ठ संबंध है। उन्होंने कहा कि न्यायिक स्वतंत्रता, संवैधानिक मूल्यों और न्यायालय की गरिमा को बनाए रखना बेहद जरूरी है। भारत जैसे लोकतंत्र में अधिकांश व्यक्तियों की राजनीतिक विचारधारा अलग होती है लेकिन बार के सदस्यों के लिए  सर्वोच्च हित अदालत और संविधान के साथ होना चाहिए।
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‘हम प्रशंसा और आलोचना सुनने को तैयार’
मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठों के फैसले कठोर कार्यवाही, संपूर्ण कानूनी विश्लेषण और संवैधानिक सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध हैं। एक बार फैसला सुनाए जाने के बाद हम प्रशंसा और आलोचना दोनों सुनने के लिए तैयार रहते हैं। उन्होंने आगे कहा कि वकीलों को अदालत के फैसलों पर प्रतिक्रिया करते समय खुद को आम व्यक्ति से अलग करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि बार एसोसिएशन के सदस्य लंबित फैसलों या मामलों पर टिप्पणी करते हैं, यह प्रवृत्ति परेशान करने वाली है।

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