जानिए... क्या है सरोगेसी, किसे है अनुमति और कैसे हो रहा इसका दुरुपयोग
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गरीब महिलाओं की मजबूरी का फायदा उठाकर पैसे के एवज में उनसे सरोगेसी (किराए की कोख) कारोबार कराने के मामलों पर अब रोक लगने की उम्मीद बढ़ गई है। भारी हंगामे के बीच लोकसभा ने बुधवार को सरोगेसी विनिमय विधेयक-2016 पास कर दिया है। इस विधेयक को संसद और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद किराये की कोख का अवैध कारोबार करने के मामलों में रोक सकेगी और दोषियों तथा इसके लिए जिम्मेदार संस्थानों-स्वास्थ्यकर्मियों को सजा देने का रास्ता साफ हो सकेगा।
बुधवार को राफेल मामले को लेकर हो रहे हंगामे के कारण लोकसभा दो बार ठप हो गई। इसके बाद जब दो बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, तब स्पीकर सुमित्रा महाजन ने स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को सरोगेसी बिल सदन में पेश करने की अनुमति दी। लगभग सवा घंटे की चर्चा में सरकार ने बिल पर 23 संशोधनों को स्वीकार किया और अंतत: लोकसभा ने सरोगेसी विनिमय विधेयक-2016 पास कर दिया।
क्या है किराए की कोख
कुछ महिलाओं के गर्भाशय में प्राकृतिक-तकनीकी कमी के कारण भ्रूण का पूरा विकास नहीं हो पाता है। भ्रूण के परिपक्व होने के पहले ही महिला का गर्भपात हो जाता है। ऐसी स्थिति में ऐसी महिलाएं मातृत्व सुख से वंचित रह जाती हैं। लेकिन अब आईवीएफ तकनीकी की सहायता से ऐसी महिलाओं को भी मातृत्व का सुख दिया जाना संभव होने लगा है।
दरअसल, ऐसी स्थिति में महिला के गर्भाशय में अंडे के निषेचित होने के बाद एक निश्चित अवधि पर उसे महिला के गर्भ से निकालकर एक अन्य स्वस्थ महिला के गर्भ में प्रत्यारोपित कर दिया जाता है जहां इसका पूर्ण विकास होता है। समय पूरा होने पर इससे एक स्वस्थ बच्चे का जन्म होता है। इसमें पति-पत्नी और एक तीसरी महिला(किराए की कोख-सरोगेट मदर) शामिल होती है। इसे सामान्य भाषा में सरोगेसी कहा जाता है। जो महिला दूसरे के भ्रूण को अपने गर्भाशय में पालती है, उसे सरोगेट मदर के नाम से जाना जाता है।
विधेयक में किसे है सरोगेसी की अनुमति
किराए की कोख के उन भारतीय नागरिक दंपतियों को इसकी अनुमति रहेगी, जो चिकित्सीय रूप से गर्भ धारण के योग्य नहीं हैं। ताकि नि:संतान दंपति आधुनिक तकनीक और चिकित्सीय विज्ञान के सहारे संतान का सुख पा सकें। इकलौते अभिभावक को किराए के कोख की अनुमति नहीं दी गई है। ऐसे अभिभावक के लिए विधेयक में बच्चा गोद लेने का प्रावधान रखा गया है।
कुल मिलाकर विधेयक का उद्देश्य किराए की कोख के कारोबार को रोकना है। इसमें अप्रवासी भारतीयों को भी किराए की कोख की सुविधा लेकर संतान का सुख पाने की इजाजत दी गई है। विधेयक में साफ कहा गया है कि किराए की कोख लेने वाले दंपति को 90 दिन के भीतर प्रजनन क्षमता का प्रमाण पत्र सौंपना होगा।
इस तरह हो रहा दुरुपयोग
दरअसल, जिस महिला के गर्भ में भ्रूण को परिपक्व होने के लिए रखा जाता है, उसकी देखभाल और गर्भावस्था के दौरान खानपान के लिए नि:संतान दंपत्ति के द्वारा कुछ आर्थिक भुगतान किया जाता है। लेकिन यह लेनदेन अब अवैध कारोबार में बदल गया है। कुछ महिलाओं ने इसे एक कारोबार का जरिया बना लिया है।
आईवीएफ के जरिए इस कारोबार में चांदी काट रहे संस्थानों ने इसके लिए गरीब तबके की महिलाओं को उपलब्ध कराने से लेकर पूरा सौदा करने लगे हैं। यह महिलाएं अपने स्वास्थ्य को दांव पर लगाकर वे बार-बार सरोगेट मदर बनने के लिए तैयार हो जाती हैं। विशेषकर अमेरिकन और यूरोपीय निसंतान दंपत्ति भारत और नेपाल जैसे गरीब देशों में इस तरह सरोगेसी के लिए आते हैं।
इस्राइल के लोगों की पहली पसंद भारत और नेपाल जैसे देश ही हैं। देश के भीतर एक अमीर तबका भी है। इस तबके की महिलाएं गर्भ धारण होने के बाद शरीर की सुंदरता और प्रसव पीड़ा आदि जैसी स्थिति से बचने के लिए सरोगेसी का सहारा लेती है। भारत में जगह-जगह खुले आईवीएफ सेंटर इसमें उनकी मदद करते हैं।
इन विदेशियों और देश के अमीर तबके के द्वारा महिलाओं को अच्छा खासा धन दिया जाता है। यही कारण है कि भारत में यह कारोबार अनुमानत: 20 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों के कारण इसे रोकने की मांग की जा रही थी जिसके बाद सरकार इस पर अंकुश लगाने का विचार कर रही थी।
इन सेलेब्रिटीज ने उठाया फायदा
सामान्य लोगों के अलावा कई सेलेब्रिटीज ने भी इस तकनीकी का लाभ उठाया है। बॉलीवुड के सुपरस्टार शाहरुख खान का बेटा अबराम, आमिर खान और किरण राव का बेटा आजाद राव खान सरोगेसी के द्वारा ही दुनिया में आए हैं। इसके अलावा तुषार कपूर ने भी सरोगेसी के जरिए पिता बनने का सुख प्राप्त किया है।
एक अनुमान के मुताबिक सामान्य तौर पर एक सरोगेट मदर के द्वारा बच्चा जनने का खर्च कम से कम 10-15 लाख रुपये आता है। इसमें उस अईवीएफ संस्थान की फीस, सरोगेट मदर की फीस, सरोगेट मदर का रहन-सहन, खान-पान आदि का खर्च शामिल होता है।