भारत सहित दुनिया के बाकी देशों के लिए मुसीबत बने हुए हैं ये आतंकी संगठन
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- एनआईए ने 35 से अधिक आतंकवादी संगठनों को प्रतिबंधित संगठनों की सूची में डाल रखा है।
- इन संगठनों में अल कायदा, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और बब्बर खालसा का नाम भी शामिल है।
- आतंकी संगठनों का उद्देश्य देश में केवल दहशत फैलाना है।
- ये संगठन अमेरिका सहित अन्य पश्चिमी देशों के खिलाफ भी आतंकवादी गतिविधियां करते रहे हैं।
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विस्तार
वर्तमान में आतंकवाद न केवल भारत बल्कि दुनिया के बाकी देशों के लिए भी मुसीबत बना हुआ है। दुनिया में पाकिस्तान जैसे कुछ देशों को छोड़कर अधिकतर देश आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में साथ खड़े रहने की बात करते हैं। भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 35 से अधिक आतंकवादी संगठनों को प्रतिबंधित संगठनों की सूची में डाल रखा है। हालांकि बातों को पाकिस्तान की ओर से भी की जाती हैं लेकिन... बाते हैं बातों का क्या।
इन संगठनों में अल कायदा, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और बब्बर खालसा का नाम भी शामिल है। भारत में बहुत से आतंकी हमले हुए हैं जिनमें भारतीय संसद पर हुआ हमला, पठानकोट हमला, उरी हमला, 26/11 आदि शामिल हैं। इन संगठनों का उद्देश्य देश में केवल दहशत फैलाना है। हालांकि इनमें से कुछ संगठन ऐसे भी हैं जो निष्क्रिय हो चुके हैं। जबकि कुछ अभी भी सक्रिय हैं। चलिए जानते हैं ऐसे ही कुछ संगठनों के बारे में...
जैश-ए-मोहम्मद
जैश-ए-मोहम्मद पाकिस्तान स्थित एक आतंकी संगठन है। इस संगठन का केवल एक उद्देश्य है, और वह है कश्मीर को भारत से अलग करना। हालांकि ये संगठन अमेरिका सहित अन्य पश्चिमी देशों के खिलाफ भी आतंकवादी गतिविधियां करता रहा है। इस संगठन की स्थापना साल 2002 में मसूद अजहर ने की थी। अजहर पाकिस्तानी पंजाबी नेता है।
यूं तो जैश-ए-मोहम्मद का मतलब होता है, पैगंबर मोहम्मद की फौज। लेकिन इसके सदस्यों ने इसके उलट काम कर आतंक फैलाया है। इस संगठन को भारत में हुए आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार माना जाता है। संगठन का सरगना मसूद अजहर एक समय पर पाकिस्तान के लिए भी सिर दर्द बन चुका है।
पाकिस्तान में लगा प्रतिबंध
आतंकी घटनाओं के बाद पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ने लगा, जिसके बाद उसने जनवरी 2002 में जैश पर प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन संगठन ने अपना नाम बदलकर खुद्दाम-उल-इस्लाम रख लिया और आतंक फैलाता रहा। बाद में उसपर भी प्रतिबंध लग गया।
2002 में गैरकानूनी संगठन करार दिए जाने के बाद इसने अल-रहमत ट्रस्ट नाम का चैरिटेबल ट्रस्ट शुरू किया। फिर इसके अंदरूनी कलह के चलते जमात-उल-फुरकान नाम का एक और संगठन बना। वहीं मसूद खुद्दाम-उल-इस्लाम की आड़ में जैश का संचालन करता रहा।
जब अमेरिका में 9/11 हमला हुआ तो इसका विरोध पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने भी किया। जब इस बात का पता जैश को चला तो वो आग बबूला हो गया। उसने मुशर्रफ के इस्तीफे की मांग की। उसने इस्लामाबाद, मरी, तक्षशिला और बहावलपुर में भी हमले किए। इसके बाद 2003 में पाक सरकार ने खुद्दाम-उल-इस्लाम पर भी प्रतिबंध लगा दिया।
इससे आतंकी मसूद अहजर और भी बौखला गया और उसने 14 दिसंबर और 25 दिसंबर, 2003 को दो बार मुशर्रफ के काफिले पर हमला किया। ये संगठन भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्रिटेन द्वारा जारी आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल है।
आतंकी संगठन की सूची में शामिल
17 अक्तूबर, 2001 को संयुक्त राष्ट्र ने जैश-ए-मोहम्मद को अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन घोषित कर दिया था। इसके बाद भी इसने भारत में हमले जारी रखे। जिसके बाद 26 दिसंबर, 2001 को अमेरिका ने भी इसे विदेशी आतंकी संगठन घोषित कर दिया। अजहर की आईएसआई, अफगानिस्तान की नई तालिबान सरकार और वहां शरण लिए हुए अल कायदा के आकाओं ने मदद दी। उसे पैसे, हथियार सबकुछ मुहैया कराया गया।
भारत कर चुका है गिरफ्तार
1994 में गिरफ्तार
जम्मू कश्मीर में आईएसआई ने आतंकी संगठन 'हम' का इस्तेमाल करना शुरू किया। इसी संगठन का सदस्य था मौलाना मसूद अजहर। इस संगठन का सदस्य होने के नाते भारत ने इसे 1994 गिरफ्तार कर लिया।
विमान का अपहरण
आतंकी अजहर को कैद से छुड़ाने के लिए आतंकियों ने भारतीय विमान का अपहरण किया और उसे कंधार ले गए। विमान में तीन आतंकियों सहित 176 लोग सवार थे। इन लोगों ने अजहर समेत कई अन्य आतंकियों को रिहा करने की मांग की। जिसके बाद यात्रियों को बचाने के लिए अहजर और उसके अन्य साथियों को कंधार (अफगानिस्तान) ले जाकर छोड़ दिया गया था। वह जम्मू की कोट भलवल जेल में बंद था।
कहां-कहां किए हमले
जैश-ए-मोहम्मद ने भारत में कई बड़े हमले किए हैं। चाहे पठानकोट हमला हो या फिर उरी हमला, सबमें इसी का हाथ रहा है। 14 फरवरी को जैश ने ही आतंकी आदिल अहमद डार का वीडियो जारी किया, जिसमें उसने पुलवामा हमले की पूरी जिम्मेदारी ली।
जनवरी, 2016 को पठानकोट हमले में 7 भारतीय जवानों की जान भी इसी संगठन ने ली। इसके अलावा सितंबर 2016 में भी हुए उरी हमले के पीछे भी इस संगठन का हाथ था। इस हमले में 19 भारतीय जवान शहीद हुए थे।
जैश-ए-मोहम्मद 19 अप्रैल, 2000 को सबसे पहले खबरों में उस वक्त आया जब उसने बादामी बाग, श्रीनगर स्थित भारतीय सेना के 15 कोर मुख्यालय पर हमला किया। जैश अंतरराष्ट्रीय जिहाद लीग का एक सदस्य बन गया। जिसके बाद ये आईएसआई के लिए लश्कर-ए-तैयबा की तरह ही कीमती बन गया।
जैश-ए-मोहम्मद का अक्तूबर 2001 में जम्मू-कश्मीर विधानसभा पर हुए हमले और 13 दिसंबर, 2001 को भारतीय संसद पर हुए हमले के पीछे भी हाथ है।
अमेरिका में भी फैलाई दहशत
इस संगठन ने अमेरिका में साल 2002 में वॉल स्ट्रीट जर्नल के पत्रकार डैनियल पर्ल की गला काटकर हत्या कर दी थी। मई 2009 में जैश के सदस्य होने का दावा करने वाले चार लोगों को अमेरिकी पुलिसकर्मी ने न्यूयॉर्क में यहूदी मंदिर और अमेरिकी सैनिक विमानों पर मिसाइल चलाने का षड्यंत्र रचने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
लश्कर-ए-तैयबा
लश्कर-ए-तैयबा
लश्कर-ए-तैयबा दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा इस्लामी आतंकी संगठन है। हालांकि लश्कर-ए-तैयबा का मतलब है पवित्रों की सेना, लेकिन इसका काम है केवल और केवल आतंक फैलाना। इसकी स्थापना अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में हाफिज सईद ने की थी।
वर्तमान में हाफिज पाकिस्तान के लाहौर के पास मरीदके और पाक अधिकृत कश्मीर में बहुत से आतंकी प्रशिक्षण शिविर चला रहा है। भारत के विरुद्ध भी इस संगठन ने कई हमले किए हैं। शुरू में इस संगठन का उद्देश्य अफगानिस्तान से सोवियत सैनिकों को बाहर निकालना था लेकिन अब इस संगठन का उद्देश्य कश्मीर को भारत से अलग करना है।
इंजीनियरिंग का प्रोफेसर हाफिज
ये जानकर हैरानी होगी की आतंकवादी हाफिज सईद पढ़ा लिखा है और लाहौर विश्विविद्यालय में इंजीनियरिंग का प्रोफेसर रह चुका है। उसने 1987 में इस संगठन की स्थापना की थी। ये संगठन खुद को वहाबी इस्लाम के आदर्श का अनुयायी मानता है।
समूचे दक्षिण एशिया को कट्टरपंथी बनाने का उद्देश्य
यह संगठन समूचे दक्षिण एशिया को कट्टरपंथी बनाने में यकीन रखता है। सऊदी अरब की मदद से चलने वाले इस संगठन ने साल 2000-2001 में भारत में कई आतंकी हमले किए हैं। इस संगठन को सितंबर 2001 में अमेरिका पर हुए हमले के बाद तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने प्रतिबंधित कर दिया था। वहीं इसके नेताओं की गतिविधियों को भी सीमित कर दिया गया था। साल 2005 में कश्मीर में भूकंप आने के बाद दान मांगने के नाम पर इस संगठन को फिर से सक्रिय होने का मौका मिल गया।
नए नाम से हुआ सक्रिय
पहले तो ये संगठन अपने किए सभी हमलों की जिम्मेदारी लेता था लेकिन बाद में इसने हमलों की जिम्मेदारी लेना भी बंद कर दिया। ये संगठन बाद में जमात-उद-दावा नाम से सक्रिय हो गया।
लाल किले पर हमला
साल 2002 में इस संगठन के उग्रवादियों ने दिल्ली के लाल किले पर हमला कर दिया था। इसके बाद 2001 में श्रीनगर हवाई अड्डे पर आतंकवादी हमले और अप्रैल 2001 में सीमा सुरक्षाबल के जवानों की हत्या के पीछे भी यही संगठन जिम्मेदार था।
मुंबई हमले में भी आया नाम
इस संगठन का नाम साल 2008 में हुए मुंबई हमले में भी आया था लेकिन बाद में इस संगठन ने इस आरोप को ये कहते हुए खारिज कर दिया कि वह कश्मीर के बाहर अपनी कार्रवाई नहीं करता। ये संगठन पाकिस्तानी सेना और सरकार पर भी कई हमले कर चुका है।
यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम
उल्फा
उल्फा (यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम) पूर्वोत्तर भारत में सबसे प्रमुख आतंकवादी और उग्रवादी संगठन है। जिसका उद्देश्य सशस्त्र संघर्ष के जरिए असम को एक स्वतंत्र देश बनाना है। इस संगठन को भारत सरकार ने साल 1990 में प्रतिबंधित कर दिया था। केंद्र सरकार ने इसे आतंकवादी संगठन के रूप में वर्गीकृत किया है।
इनके सपनों का करना चाहता है साकार
ये संगठन कहता है कि यह सैन्य संघर्ष के जरिए संप्रभु समाजवादी असम को स्थापित करने का उद्देश्य रखता है। जिससे यह भीमकांत बुरागोहेन, राजीव राजकोन्वर उर्फ अरबिंद राजखोवा, गोलाप बारुआ उर्फ अनूप चेतिया, समिरन गोगोई उर्फ प्रदीप गोगोई, भद्रेश्वर गोहेन और परेश बरुआ के सपनों को साकार कर सके।
कब हुई स्थापना?
इस संगठन की स्थापना 7 अप्रैल, 1979 को असम में सिबसागर जिले के रंगघर में हुई थी। ये माना जाता है कि इस संगठन का संपर्क 1986 में नेशनलिस्ट सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (एनएससीएन-पूर्व में अविभाजित) से हुआ था।
अन्य संगठन से मिलती है मदद
इस संगठन को म्यांमार (बर्मा) में सक्रिय संगठन काछिन रेबेल्स से भी मदद मिलती रही है। काछिन रेबेल्स असम और इसके समीपवर्ती राज्यों के साथ-साथ बांग्लादेश में भी सक्रिय है। वहां भी इसके कई कैंप मौजूद हैं। इन कैंप्स में उग्रवादियों को प्रशिक्षण दिया जाता है।
कई हिंसक वारदातों को अंजाम दे चुका है
1990 की शुरुआत में उल्फा ने कई हिंसक घटनाओं को अंजाम देना शुरू किया था। जिसके बाद इसे अमेरिकी गृह मंत्रालय ने बाकी आतंकी संगठनों की सूची में डाल दिया। इस संगठन का प्रमुख नेता परेश बरुआ (कमांडर-इन-चीफ), अरबिंद राजखोवा (चेयरमैन), अनूप चेतिया (जनरल सेक्रेटरी), प्रदीप गोगोई (वाइस चेयरमैन और असम सरकार की कस्टडी में) खुद को राजनीतिक व क्रांतिकारी संगठन से जुड़े लोग बताते हैं।
भारतीय सेना ने इसके खिलाफ ऑपरेशन बजरंग भी शुरू किया था। सरकार मानती है कि इस संगठन को आईएसआई (पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी) और डीजीएफआई (बांग्लादेशी खुफिया एजेंसी) से मदद मिलती है। वामपंथी विचारधारा को मानने वाले संगठन उल्फा को न केवल चीन सरकार से भी मदद मिलती है बल्कि इसका संबंध माओवादियों से भी है।
कई हिंसक घटनाओं को दिया अंजाम
इस संगठन ने 1990 में अनिवासी ब्रिटिश व्यवसायी लॉर्ड स्वराज पॉल के भाई सुरेंद्र पॉल की हत्या कर दी थी। इसके बाद 1991 में रूसी इंजीनियर का अपहरण किए जाने के बाद उसकी हत्या भी कर दी। फिर 1997 में इसने अन्य लोगों के साथ एक वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता और वरिष्ठ भारतीय कूटनीतिज्ञ का अपहरण कर हत्या कर दी।
2003 में असम में काम करने वाले 15 बिहारी मजदूरों की हत्या के पीछे भी इसी संगठन का हाथ था। इन मजदूरों में बच्चे भी शामिल थे। इस संगठन के अपराधों की सूची काफी लंबी है। 2007 में इसने 62 हिंदी भाषी विशेषकर बिहारी मजदूरों की हत्या कर दी थी।
ये हैं एनआईए की सूची में शामिल
एनआईए की सूची में ये हैं शामिल
एनआईए की सूची में हरकत उल मुजाहिदीन, हरकत उल अंसार, हरकत उल जेहाद-ए-इस्लामी, हिजबुल मुजाहिदीन, अल उमर मुजाहिदीन, जम्मू-कश्मीर इस्लामिक फ्रंट, स्टूडेंटस इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी), दीनदार अंजुमन, अल बदर, जमात उल मुजाहिदीन, अल कायदा, दुख्तरान-ए-मिल्लत और इंडियन मुजाहिदीन के नाम शामिल हैं।
ये संगठन न केवल जम्मू-कश्मीर बल्कि मुंबई, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित देश के कई राज्यों में आतंकवादी वारदातों को अंजाम दे चुके हैं। इन संगठनों को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और बांग्लादेश के आतंकी संगठन हूजी से पूरी मदद मिलती है।
एनआईए की सूची में लिट्टे, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (एमएल), पीपुल्स वार ग्रुप, एमसीसी, तमिलनाडु लिबरेशन आर्मी, तमिल नेशनल रिट्रीवल ट्रुप्स, अखिल भारत नेपाली एकता समाज, भाकपा-माओवादी भी शामिल हैं।
पूर्वोत्तर में सक्रिय संगठन
पूर्वोंत्तर में भी बहुत से संगठन सक्रिय हैं। ये संगठन हैं नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड, युनाइटेड पीपुल्स डेमोक्रेटिक सॉलिडेरिटी, कामतापुर लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन, कार्बी लांग्री नेशनल लिबरेशन फ्रंट, कार्बी नेशनल वॉलियंटर्स, हमार पीपुल्स कन्वेंशन, कार्बी पीपुल्स फ्रंट, बिरसा कमांडो फोर्स, बंगाली टाइगर फोर्स, आदिवासी टाइगर फोर्स, आदिवासी नेशनल लिबरेशन आर्मी ऑफ असम, गोरखा टाइगर फोर्स, बराक वेली यूथ लिबरेशन फ्रंट , युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ बराक वेली, मुस्लिम युनाइटेड लिबरेशन टाइगर्स ऑफ असम।
इस सूची में मुस्लिम युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम, इस्लामिक लिबरेशन आर्मी ऑफ असम, मुस्लिम वॉलंटियर फोर्स, मुस्लिम लिबरेशन आर्मी और मुस्लिम सिक्योरिटी फोर्स, इसलामिक सेवक संघ, इसलामिक युनाइटेड रिफॉर्मेशन प्रोटेस्ट ऑफ इंडिया, यूनाइटेड मुस्लिम लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम, रिवोल्यूशनरी मुस्लिम कमांडोज, मुस्लिम टाइगर फोर्स, हरकत उल मुजाहिद्दीन, हरकत उल जेहाद आदि भी शामिल हैं।