सीमा पर चीनी सैनिकों को लगा चस्का, भारतीय सैनिकों से मांगते हैं 'दमदम'
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भारत-चीन सीमा पर टेंशन, सैनिक आमने-सामने आ गए, एक-दूसरे के क्षेत्र में अतिक्रमण, इस तरह की खबरें आप सुनते-देखते रहते हैं। लेकिन, इनसे परे भी लद्दाख में बहुत कुछ होता है, मगर उस वक्त जब दोनों तरफ पूर्ण शांति होती है। पेट्रोलिंग के दौरान दोनों देशों के जवान गर्मजोशी से मिलते हैं।
चीनी सैनिक आईटीबीपी के जवानों से बीड़ी लेते हैं और उसे वहीं पर सुलगा लेते हैं, लेकिन कश लगाने के बाद जब वे थोड़ा दूर निकल जाते हैं तो अपनी चिरपरिचित शैली में एक बैनर ऊपर उठा देते हैं। जिस पर लिखा होता है, गो बैक, मूव फ्रॉम हेयर... आदि। उन्हें हमारे इलाके की बीड़ी जिसे स्थानीय स्तर पर दमदम बीड़ी का नाम दिया गया है, बहुत पसंद है।
लद्दाख में इंडो-चाइना बॉर्डर पर आईटीबीपी के जवान तैनात रहते हैं। विपरीत मौसम के चलते वहां पर आईटीबीपी के एक जवान को चार माह के लिए ही भेजा जाता है। चारों तरफ सूखे पहाड़ या फिर बर्फ की चोटियां होती हैं।
खासतौर पर धूल भरी आंधी या बर्फबारी में दोनों देशों के सैनिक गलती से एक-दूसरे के सीमा क्षेत्र में भी आ जाते हैं। कई बार यह भी होता है कि साफ मौसम के दौरान चीनी सैनिक और आईटीबीपी के जवान अपने-अपने क्षेत्र में एक साथ पेट्रोलिंग करते हैं।
भाषायी दिक्कतों के बाद भी सब कुछ लेते हैं समझ
एक ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, भाषायी दिक्कतों के कारण चीनी सैनिकों और आईटीबीपी जवानों के बीच कोई ज्यादा संवाद नहीं हो पाता, लेकिन चीनी सैनिक इशारे से बीड़ी की मांग कर देते हैं। बॉर्डर की पोस्टिंग से वापस लौटे आईटीबीपी के जवानों का कहना है कि शांतिकाल में चीनी सैनिक जमकर मिलते हैं। उन्हें हमारे इलाके की बीड़ी जिसे स्थानीय स्तर पर दमदम बीड़ी का नाम दिया गया है, बहुत पसंद है। यूं कहें कि चीनी सैनिक हमारे यहां बनी बीड़ी के दीवाने हैं तो गलत नहीं होगा।
हालांकि उनके पास सिगरेट होती है, लेकिन फिर भी वे बीड़ी पीना चाहते हैं। वे बीड़ी को वहीं पर सुलगा लेते हैं, कश लगाते हैं, हाथ मिलाते हैं और अपने तौर तरीके से हमारा आभार जता कर अपने क्षेत्र में चले जाते हैं। जैसे ही वे अपने क्षेत्र में पहुंचते हैं, एक बड़ा सा बैनर उपर उठा देते हैं। उस पर लिखा होता है...गो बैक फ्रॉम हेयर, साथ ही मुंह से बोलते हैं...मूव मूव।
आईटीबीपी जवानों का कहना है कि इन सबके बीच दोनों देशों के बीच कोई टेंशन नहीं खड़ी होती। कई बार ऐसा लगता है कि यह सब उनकी पेट्रोलिंग का हिस्सा है। हाँ, कई बार हमारे जवान उनकी करंसी देखना चाहते हैं तो वे दिखा देते हैं। यदि किसी जवान को यादगार के तौर पर करंसी लेनी होती है तो वे दे भी देते हैं।