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Khabaron Ke Khiladi: बिहार में सहयोगियों में खींचतान, विश्लेषकों ने बताया कन्हैया को क्यों उतारा गया मैदान में

Sat, 19 Apr 2025 10:08 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sat, 19 Apr 2025 10:08 PM IST
सार

बिहार के विधानसभा चुनाव साल की अंतिम तिमाही में होने हैं। इस बीच राज्य में सियासत अपने चरम पर है। ‘खबरों के खिलाड़ी’ में इस बार इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, राकेश शुक्ल, राजकिशोर, अजय सेतिया और अनुराग वर्मा मौजूद रहे।   

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Khabron Ke Khiladi Bihar Assembly Election 2025 Kanhaiya Kumar Congress Mahagathbandhan vs NDA Politics Expert
खबरों के खिलाड़ी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार में चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज है। महागठबंधन में बैठकों का दौर भी शुरू हो गया है। वहीं, आरोप प्रत्यारोप का दौर भी तेज होता जा रहा है। नीतीश कुमार के स्वास्थ्य पर भी सवालों का दौर जारी है। इसके अलावा नेताओं को प्रत्याशी बनाए जाने की खींचतान भी जारी है। बिहार में जारी इसी उठापटक पर इस हफ्ते के ‘खबरों के खिलाड़ी’ में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, राकेश शुक्ल, राजकिशोर, अजय सेतिया और अनुराग वर्मा मौजूद रहे।   

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राकेश शुक्ल: हरियाणा चुनाव के नतीजों के बाद क्षेत्रीय दल हावी है। कांग्रेस जानती है कि हम हावी रहेंगे तो ही हमें ज्यादा सीटें मिल पाएंगी, वर्ना हमें 40 से 50 सीटों पर सिमटा दिया जाएगा। इसी वजह से कांग्रेस ने रणनीति के तहत कन्हैया कुमार को वहां उतारा है। हालांकि, दोनों की मजबूरी है गठबंधन करना। अभी जो कुछ हो रहा है वो नूराकुश्ती है। जो आगे भी चलती रहेगी।  

रामकृपाल सिंह: आज की तारीख में कांग्रेस को यह तय करना है कि हमें मोदी को हराना है यानी हम कंपोस्ट बनने के लिए तैयार हैं। दूसरा धड़ा यह कहता है कि अगर आप कंपोस्ट बनते रहेंगे तो आपकी पार्टी का क्या होगा। कांग्रेस अगर उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों को छोड़ देगी तो कांग्रेस का पुनर्जागरण नहीं होगा। एक ही शर्त पर कांग्रेस मान सकती है कि विधानसभा में हम आपकी बैसाखी बन सकते हैं, बशर्ते लोकसभा में आप हमारी बैसाखी बनें। लेकिन इस शर्त को क्षेत्रीय दल मानेंगे नहीं। कांग्रेस के लिए ये द्वंद है कि आप भाजपा से बदला लेने के लिए चुनाव लड़ेंगे या खुद जीतने के लिए। 
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अजय सेतिया: तेजस्वी यादव इस बात को स्वीकार कर चुके हैं कि हमें 70 सीटें देनी होंगी। लेकिन, जो दबाव बनाया जा रहा है वो इस बात है कि वो 70 सीटें कौन सी होंगी। मनोज झा ने भी कहा कि इसके अलावा चारा क्या है। कांग्रेस 70 में से 50 सीटें भी जीत ले तो भी क्या अपने हिसाब से मुख्यमंत्री बना सकती है। ऐसा नहीं है। सारा खेल इस बात का चल रहा है कि कांग्रेस को मनमाफिक सीटें मिले। और ये संदेश जाए कि मुस्लिम और दलित वोटर कांग्रेस के साथ है। 

अनुराग वर्मा: ये हो सकता है कि जो कांग्रेस की रणनीति क्या होने वाली है ये किसी कांग्रेस के नेता को भी पता नहीं होती है। दिल्ली के चुनाव के परिपेक्ष्य में स्टेट लीडरशिप इस बात पर क्लियर थी कि उन्हें क्या करना है लेकिन यही बात केंद्रीय नेतृत्व के बारे में नहीं कही जा सकती है। दिल्ली चुनाव के बाद से कांग्रेस इस बात से उत्साहित है कि हमारा तो खेल बने ना बने पर हमारी शर्तें नहीं मानेंगे तो आपका खेल बिगाड़ देंगे। अगर कांग्रेस तेजस्वी को नेता नहीं मानेगी तो इनका नेता कौन होगा। अगर जवाब ये है कि कन्हैया कुमार तो फिर वही बात होगी कि हम जीते न जीतें तुम्हारा खेल बिगाड़ देंगे। 

राजकिशोर: जब भी कोई गठबंधन होता है तो इतनी आसानी से नहीं होता है। कांग्रेस के सामने विकल्प क्या है ये देखना होगा। कन्हैया कुमार कोई थ्रेट बन पाएंगे ऐसा मुझे नहीं लगता है। वो कांग्रेस के अंदर वामपंथी विचारधारा से लाए हुए शख्स हैं। महागठबंधन में नए साथी भी आए हैं। ऐसे में सीटें सबकी कम होनी है। इस बार ये कोई कन्यफ्यूजन नहीं हैं कि सीटों की संख्या तो तय होगी लेकिन सीटें कौन सी होंगी ये भी तय होगा। एनडीए की बात करें तो नीतीश कुमार के बगैर भाजपा आज भी चुनाव में नहीं जाने की स्थिति में है। इसी तरह महागठबंधन के लिए तेजस्वी ही नेता होंगे।
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