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कश्मीर समस्या नेहरू के समय का काला धब्बा और इसे धोकर रहेंगे: राठौड़
amarujala.com, Written By: शशिधर पाठक/संजय मिश्र
Updated Sat, 27 May 2017 09:05 PM IST
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कश्मीर समस्या देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर नेहरू के समय का काला धब्बा है और केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार इसे धोकर रहेगी। सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री कर्नल(रिटा.) राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहा कि सरकार कश्मीर को लेकर बेहद संवेदनशील है।
हम समस्या के समाधान के तरफ सोची-समझी रणनीति के साथ बढ़ रहे हैं। राठौड़ ने कहा कि पाकिस्तान ने सीमापार से अगर आतंकियों को पनाह देना, घुसपैठ कराना जारी रखा तो आतंकियों को सीमापार उनके घर(पनाह स्थल) में घुसकर मारेंगे।
राठौड़ ने कहा कि कश्मीर हमारा है। सरकार कश्मीर में अंदरुनी व्यवस्था को कायम रखने के लिए प्रतिबद्ध है। हम इसी दिशा में अलगाववादी ताकतों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहे हैं। पिछले चार-पांच दिन में सेना ने 11 आतंकियों को मार गिराया है।
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बुरहान वानी के बाद आज त्रला में हिजबुल मुजाहिद्दीन के दूसरे बड़े आतंकी सजबार अहमद भट्ट को सुरक्षा बलों ने मार गिराया है। सरकार की पहली नीति है कि वह कश्मीर को अस्थिर करने की कोशिश करने वालों को बर्दाश्त नहीं करेगी। इसलिए कश्मीर के भीतर और सीमापार बाहर की भी कार्रवाई की जा रही है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हम पाकिस्तान की नापाक हरकतों को दुनिया के सामने ला रहे हैं। उसे आतंकवाद को सह देने के बाबत अलग थलग करने का सरकार लगातार प्रयास कर रही है।
टीवी चैनल देखिए तो.....
राठौड़ ने कहा कि आप टीवी चैनल देखिए तो लगता है कि कश्मीर में पत्थरबाजी के सिवा कुछ हो ही नहीं रहा है, जबकि वहां के हालात ऐसे नहीं हैं। राठौड़ के अनुसार कश्मीर के हालात स्टेबल और स्थिति नियंत्रण में हैं। जल्द ही वहां सबकुछ सामान्य हो जाएगा।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने कहा कि सरकार कश्मीर को लेकर जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठा रही है और हम एक सोची-समझी रणनीति के तहत आगे बढ़ रहे हैं।
पहले और अब में फर्क
सरकार सेना और सुरक्षा बलों के साथ है। सेना और सुरक्षा बल अपने दायरे में रखकर कार्रवाई के लिए स्वतंत्र हैं। राठौड़ ने कहा कि पहले भी सेना सीमापार की कार्रवाई या फिर कश्मीर में अपनी गतिविधियां अपने रिस्क पर करती थी, लेकिन अब इसमें अंतर आया है।
अब सरकार सेना के बेहतर प्रयास को पूरी बैकिंग दे रही है। केन्द्र सरकार पूरी राजनीतिक इच्छा शक्ति के साथ सेना और सुरक्षा बलों के साथ खड़ी है। इसका जहां अस्थिर करने वाली ताकतों के पास सही संदेश जाता है, वहीं सेना के मोरॉल में भी वृद्धि होती है।
पहले आतंकवाद पर ही होगी बात
सूचना एवं प्रसारण मंत्री निशानेबाजी में चैंपियन रहे हैं। सेना की पृष्ठभूमि से हैं और डिप्लोमेसी को बखूबी समझते हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जैसा देश खुद को बचाये रखने के लिए कश्मीर में अस्थिरता फैलाने, आतंकी भेजने, घुसपैठ कराने पर आमादा है।
राठौड़ का कहना है कि जहां तक पाकिस्तान का सवाल है तो वह सरवाइल के लिए ऐसा करेगा ही, लेकिन सवाल यह है कि आप मामले को कैसे हल करते हैं। राठौड़ ने कहा कि सरकार का एजेंडा बिल्कुल साफ है।
केन्द्र की मोदी सरकार पहले की देश की सरकारों की तरह दबाव में आकर रक्षात्मक रास्ता आख्तियार करके वार्ता की मेज पर नहीं बैठने वाली। सरकार का स्पष्ट मानना है कि वार्ता जब भी होगी, पहले और पहले आतंकवाद पर ही होगी।
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हम समस्या के समाधान के तरफ सोची-समझी रणनीति के साथ बढ़ रहे हैं। राठौड़ ने कहा कि पाकिस्तान ने सीमापार से अगर आतंकियों को पनाह देना, घुसपैठ कराना जारी रखा तो आतंकियों को सीमापार उनके घर(पनाह स्थल) में घुसकर मारेंगे।
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राठौड़ ने कहा कि कश्मीर हमारा है। सरकार कश्मीर में अंदरुनी व्यवस्था को कायम रखने के लिए प्रतिबद्ध है। हम इसी दिशा में अलगाववादी ताकतों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहे हैं। पिछले चार-पांच दिन में सेना ने 11 आतंकियों को मार गिराया है।
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बुरहान वानी के बाद आज त्रला में हिजबुल मुजाहिद्दीन के दूसरे बड़े आतंकी सजबार अहमद भट्ट को सुरक्षा बलों ने मार गिराया है। सरकार की पहली नीति है कि वह कश्मीर को अस्थिर करने की कोशिश करने वालों को बर्दाश्त नहीं करेगी। इसलिए कश्मीर के भीतर और सीमापार बाहर की भी कार्रवाई की जा रही है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हम पाकिस्तान की नापाक हरकतों को दुनिया के सामने ला रहे हैं। उसे आतंकवाद को सह देने के बाबत अलग थलग करने का सरकार लगातार प्रयास कर रही है।
टीवी चैनल देखिए तो.....
राठौड़ ने कहा कि आप टीवी चैनल देखिए तो लगता है कि कश्मीर में पत्थरबाजी के सिवा कुछ हो ही नहीं रहा है, जबकि वहां के हालात ऐसे नहीं हैं। राठौड़ के अनुसार कश्मीर के हालात स्टेबल और स्थिति नियंत्रण में हैं। जल्द ही वहां सबकुछ सामान्य हो जाएगा।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने कहा कि सरकार कश्मीर को लेकर जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठा रही है और हम एक सोची-समझी रणनीति के तहत आगे बढ़ रहे हैं।
पहले और अब में फर्क
सरकार सेना और सुरक्षा बलों के साथ है। सेना और सुरक्षा बल अपने दायरे में रखकर कार्रवाई के लिए स्वतंत्र हैं। राठौड़ ने कहा कि पहले भी सेना सीमापार की कार्रवाई या फिर कश्मीर में अपनी गतिविधियां अपने रिस्क पर करती थी, लेकिन अब इसमें अंतर आया है।
अब सरकार सेना के बेहतर प्रयास को पूरी बैकिंग दे रही है। केन्द्र सरकार पूरी राजनीतिक इच्छा शक्ति के साथ सेना और सुरक्षा बलों के साथ खड़ी है। इसका जहां अस्थिर करने वाली ताकतों के पास सही संदेश जाता है, वहीं सेना के मोरॉल में भी वृद्धि होती है।
पहले आतंकवाद पर ही होगी बात
सूचना एवं प्रसारण मंत्री निशानेबाजी में चैंपियन रहे हैं। सेना की पृष्ठभूमि से हैं और डिप्लोमेसी को बखूबी समझते हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जैसा देश खुद को बचाये रखने के लिए कश्मीर में अस्थिरता फैलाने, आतंकी भेजने, घुसपैठ कराने पर आमादा है।
राठौड़ का कहना है कि जहां तक पाकिस्तान का सवाल है तो वह सरवाइल के लिए ऐसा करेगा ही, लेकिन सवाल यह है कि आप मामले को कैसे हल करते हैं। राठौड़ ने कहा कि सरकार का एजेंडा बिल्कुल साफ है।
केन्द्र की मोदी सरकार पहले की देश की सरकारों की तरह दबाव में आकर रक्षात्मक रास्ता आख्तियार करके वार्ता की मेज पर नहीं बैठने वाली। सरकार का स्पष्ट मानना है कि वार्ता जब भी होगी, पहले और पहले आतंकवाद पर ही होगी।