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कर्नाटक हाईकोर्ट : अपने शिशु को स्तनपान कराना मां का है अधिकार, इसे छीना नहीं जा सकता
Thu, 30 Sep 2021 02:49 AM IST
Kuldeep Singh
एजेंसी, बंगलूरू
एजेंसी, बंगलूरू
Published by: Kuldeep Singh
Updated Thu, 30 Sep 2021 02:49 AM IST
सार
कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक मामले में कहा, शिशु को स्तनपान कराना मां का अधिकार है। पैदा करने वाली और पालन पोषण करने वाली मां में पहली प्राथमिकता पैदा करने वाली मां को दी जानी चाहिए। खासतौर से स्तनपान के मामले में पालन करने वाली मां की दलील किसी सूरत में पैदा करने वाली मां के सामने खड़ी नहीं होती।
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Karnataka High Court
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपने तरह के अनोखे मामले में बुधवार को कहा, शिशु को स्तनपान कराना मां का अधिकार है। संविधान का अनुच्छेद-21 मां को यह अधिकार देता है और इसे छीना नहीं जा सकता। इसी तरह नवजात को पूरा हक है कि उसे उसकी मां का दूध मिले। ये दोनों आपस में जुड़े समवर्ती अधिकार हैं।
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इसी तरह मां के दूध पर नवजात का भी पूरा हक
कोर्ट एक मां की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसके नवजात को जन्म के तुरंत बाद अस्पताल से चुरा लिया गया था। महिला ने अपने बच्चे को उसकी पालक मां से वापस दिलाने की अपील की थी।
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जस्टिस कृष्ण एस दीक्षित ने अपने आदेश में कहा, पैदा करने वाली और पालन पोषण करने वाली मां में पहली प्राथमिकता पैदा करने वाली मां को दी जानी चाहिए। खासतौर से स्तनपान के मामले में पालन करने वाली मां की दलील किसी सूरत में पैदा करने वाली मां के सामने खड़ी नहीं होती।
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स्तनपान कराने का अधिकार एक मां को संविधान के अनुच्छेद 21 में मिला है। इस तरह पैदा करने वाली मां का पक्ष कानूनी रूप से भी मजबूत है। इससे पहले याचिकाकर्ता ने कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी, जिसके बाद बच्चे का पता लगाया गया। कोर्ट ने याचिका को अनुमति देते हुए कहा, नाबालिग बच्चे की हिरासत उसको पैदा करने वाली मां को सौंपी जाए।
संविधान के साथ अंतरराष्ट्रीय कानून में भी इसका प्रावधान
जज ने कहा, संविधान के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय कानूनों में भी इसका प्रावधान है। मानवाधिकारों के वैश्विक घोषणापत्र में दर्ज बाल अधिकार के अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन 1989 के अनुच्छेद 25(2) के तहत नवजात को मां के दूध का अधिकार दिया गया है। मां को भी अपने बच्चे को स्तनपान कराने का अधिकार दिया गया है।
सभ्य समाज में ऐसी नौबत आना दुर्भाग्यपूर्ण
जज ने कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक नवजात को उसकी मां का दूध ही नहीं मिला। इसमें उसका कोई कसूर नहीं, उसे उसकी मां से पैदा होते ही छीन लिया गया। ऐसी नौबत आना एक सभ्य समाज के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।
देवकी-यशोदा के उदाहरण पर कोर्ट की फटकार
सुनवाई के दौरान पालन पोषण करने वाली मां के वकील ने भागवत का उदाहरण देते हुए अपने पक्ष में भगवान कृष्ण की माताएं देवकी और यशोदा की दलील दी। इस पर कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा, आप जो उल्लेख बता रहे हैं उसमें कहीं भी उन दोनों माताओं के बीच इन महिलाओं की तरह किसी तरह के विवाद का जिक्र नहीं है। इसलिए आप ऐसा उदाहरण न दें।