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Karnataka Election: कर्नाटक में क्यों हुआ 'अमूल बनाम नंदिनी', कांग्रेस और जेडीएस एक ही मुद्दे को बढ़ा रहे आगे

Tue, 11 Apr 2023 03:36 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Tue, 11 Apr 2023 03:36 PM IST
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सार
Karnataka Election: बीते कुछ दिनों से कर्नाटक की सियासत में दूध खूब उबाल मार रहा है। दरअसल कांग्रेस और जेडीएस ने कर्नाटक में अमूल की एंट्री की सुगबुगाहट के साथ कर्नाटक मिल्क फेडरेशन के नंदिनी ब्रांड को चुनौती बताया है। इस चुनौती के पीछे राज्य के विपक्षी दल कर्नाटक के गौरव को जोड़ रहे हैं...
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Karnataka Election: Why 'Amul vs Nandini' happened in Karnataka, Congress and JDS are leading the same issue
Amul Milk vs Nandini milk - फोटो : Agency

विस्तार

कर्नाटक में जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं, राजनीतिक दल सियासी हथकंडे भी उसी तरीके से अपना कर माहौल बनाने की तैयारी कर रहे हैं। कर्नाटक में सत्ता पक्ष जहां राज्य के विकास, डबल इंजन की सरकार, भविष्य की तस्वीर के साथ कर्नाटक के सियासी मैदान में है, वहीं कांग्रेस और जेडीएस महंगाई भ्रष्टाचार किसानों की बदहाली और जातिगत मुद्दों को लेकर सियासी पिच पर अपने मोहरे सजा रही है। लेकिन इन तमाम मुद्दों के बीच कर्नाटक में इस बार एक ऐसा मुद्दा भी राजनीतिक रण में आ गया है, जिसे विपक्षी दलों ने न सिर्फ बड़ा मुद्दा बनाया है, बल्कि कर्नाटक के गौरव से जोड़कर उसे घर-घर तक पहुंचाने की अपील भी कर रहे हैं। यह मुद्दा कुछ और नहीं बल्कि उस दूध का मुद्दा है जो अब कर्नाटक बनाम गुजरात बन रहा है। फिलहाल राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि दूध के मुद्दे पर सभी सियासी दल सत्ता की मलाई निकालना चाह रहे हैं।

भाजपा करा रही अमूल की कर्नाटक में एंट्री

बीते कुछ दिनों से कर्नाटक की सियासत में दूध खूब उबाल मार रहा है। दरअसल कांग्रेस और जेडीएस ने कर्नाटक में अमूल की एंट्री की सुगबुगाहट के साथ कर्नाटक मिल्क फेडरेशन के नंदिनी ब्रांड को चुनौती बताया है। इस चुनौती के पीछे राज्य के विपक्षी दल कर्नाटक के गौरव को जोड़ रहे हैं। कर्नाटक में अमूल की एंट्री का विरोध कर रहे कांग्रेस पार्टी से जुड़े नेताओं का आरोप है कि राज्य में लोगों को मिल रहे सस्ते दूध को खत्म कर अमूल के महंगे दूध की एंट्री कराई जा रही है। कर्नाटक मिल्क फेडरेशन के डेलीगेट रहे एसएन कुमार कहते हैं कि अभी कर्नाटक के लोगों को पूरे देश में सबसे सस्ता दूध मिल रहा है। भाजपा सरकार कर्नाटक में अमूल की एंट्री करा कर लोगों को महंगाई की ओर धकेलना चाहती है। उनका दावा है कि आज भी पूरे देश में सबसे सस्ता दूध कर्नाटक में ही मिलता है।

यह भी पढ़ें: Amul vs Nandini: कर्नाटक में चुनाव से पहले क्यों उठा अमूल पर विवाद? दूध के ब्रांड पर कैसी राजनीति, जानें

कर्नाटक में सिर्फ सस्ते और महंगे दूध पर ही सियासत नहीं है। दरअसल सियासी जानकारों का कहना है कि अमूल के गुजरात से जुड़ाव को लेकर भी कर्नाटक के विपक्षी दल हमलावर हो रहे हैं। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के नेता सिद्धारमैया ने तो समूचे राज्य के लोगों से अपील की कि वह अमूल का दूध ना खरीदें। इसके पीछे उन्होंने तर्क दिया कि भाजपा की डबल इंजन सरकार कर्नाटक के गौरव कर्नाटक मिल्क फेडरेशन के नंदिनी दूध ब्रांड को खत्म करना चाहती है। सियासी जानकारों का कहना है कि कांग्रेस ने इस पूरे मामले में पहले से ही अलग-अलग समस्याओं की मार झेल रहे पीड़ित किसानों को भी शामिल करने के लिए अभियान शुरू कर दिया। पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भाजपा पर हमला करते हुए किसानों के बनाए हुए नंदिनी ब्रांड को खत्म करने का आरोप लगाया। इस दौरान कांग्रेस ने न सिर्फ कर्नाटक मिल्क फेडरेशन और उसके ब्रांड नंदिनी बल्कि किसान और कन्नड़ समुदाय को भी दूध के मुद्दे पर जोड़ने की मुहिम शुरू कर दी।

कर्नाटक की अस्मिता से जोड़ा

दूध के मामले में कर्नाटक की गरमाई हुई सियासत पर सिर्फ कांग्रेस ही नहीं बल्कि जेडीएस ने भी भाजपा पर हमला बोला। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि भाजपा की डबल इंजन सरकार न सिर्फ कर्नाटक के किसानों का गला घोटना चाह रही है, बल्कि वह कर्नाटक में अमूल की एंट्री के साथ कन्नड़ लोगों के गौरव और उनके अस्मिता के साथ भी खिलवाड़ कर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी इस बयान के साथ ही जेडीएस के नेताओं ने समूचे कर्नाटक में इसे अभियान के तौर पर आगे बढ़ाना शुरू किया। राजनीतिक विश्लेषण डीके सिद्धार्थ कहते हैं कि कर्नाटक में तमाम सियासी मुद्दों के बीच में दूध ने बड़ी सियासी एंट्री मारी है। उनका कहना है कि यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर कांग्रेस और जेडीएस ने मिलकर भाजपा पर हमला बोला है। उनका तर्क है कि इस मुद्दे के साथ दरअसल दोनों विपक्षी दल कर्नाटक के किसान और कर्नाटक के गौरव को आगे रखकर चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर आगे बढ़ रहे हैं।

यह भी पढ़ें: Amul vs Nandini: कर्नाटक चुनाव से पहले विवाद में क्यों दूध के ब्रांड्स? जानें देश के बड़े उत्पादकों के बारे में

कर्नाटक के सियासी गलियारों में दूध पर उठे उबाल का राजनीतिक फायदा कितना होता है, यह तो चुनाव परिणाम के साथ पता चलेगा। लेकिन कर्नाटक के राजनीतिक दलों के साथ कुछ स्थानीय और वहां की एसोसिएशन ने भी इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करना शुरू कर दिया है। यही वजह रही कि बीते कुछ दिनों में सोशल मीडिया पर अमूल के वापस जाने और कर्नाटक मिल्क फेडरेशन के दूध फ्रेंड नंदिनी को बचाने का हैशटैग टि्वटर अभियान ट्रेंड करने लगा। राजनीतिक विश्लेषक डीके सिद्धार्थ कहते हैं कि दरअसल अमूल पर हमला करके कर्नाटक के राजनीतक दलों ने एक तरह से गुजरात के उस मॉडल का विरोध करना शुरू किया है, जिसे जेडीएस और कांग्रेस भाजपा आयातित बता रही हैं।

दोनों ही सहकारी संगठन

हालांकि ऐसे विरोध को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों का अपनी अलग-अलग सोच है। राजनीतिक विश्लेषक दिवाकर गोपीनाथ कहते हैं कि जैसे कर्नाटक मिल्क फेडरेशन किसानों का बनाया हुआ सहकारी संगठन है, ठीक उसी तरह अमूल भी अपने ही देश कि किसानों का बनाया हुआ एक सहकारी संगठन है। उनका तर्क है इस मामले में राजनीति नहीं होनी चाहिए। क्योंकि इसमें किसानों की मेहनत छिपी हुई है। हालांकि उन्होंने यह बात जरूर कही कि अगर नंदिनी कम कीमत में दूध दे रहा है, तो दूसरी सहकारी संस्थाओं को भी यह सोचना चाहिए कि कैसे लोगों को कम कीमत में अच्छी गुणवत्ता वाला दूध उपलब्ध कराया जा सके। उन्होंने सलाह दी कि जैसे अमूल की एंट्री कर्नाटक में हो रही है, ठीक उसी तरह नंदिनी की एंट्री देश के अलग-अलग राज्यों में भी कराई जानी चाहिए।

कर्नाटक में दूध पर गर्म हो रही सियासत को देखते हुए मुख्यमंत्री बोम्मई ने कहा कि नंदनी सिर्फ कर्नाटक ही नहीं, बल्कि देश का बड़ा पॉपुलर ब्रांड है। उनका कहना है कि जल्द ही देश के अलग-अलग राज्यों में कर्नाटक मिल्क फेडरेशन के ब्रांड नंदिनी के विस्तार की योजना बन रही है। ताकि कर्नाटक के किसानों को न सिर्फ फायदा हो, बल्कि उनकी मेहनत का स्वाद पूरे देश को मिले। बोम्मई ने कहा कि समूचे कर्नाटक में 22 हजार गांवों में नंदिनी का नेटवर्क है। इस नेटवर्क के माध्यम से 24 लाख से ज्यादा दुग्ध उत्पादक किसानों से दूध लिया जा रहा है। भाजपा सरकार अपने इस नेटवर्क का समूचे देश में प्रसार कर रही है।

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