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Karnataka Chunav Result 2018: सभी पार्टियों में अब तक यह हुई उथल-पुथल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Updated Tue, 15 May 2018 10:34 AM IST
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Karnataka Assembly Election 2018
कर्नाटक चुनाव की मतगणना के लिए पेटी खुल चुकी है। आज यह पता चल जाएगा कि सत्ता पर इस बार कौन बैठेगा। मगर चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस हाईकमान में नतीजों को लेकर बेचैनी है। नतीजों के मद्देनजर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने साथी अशोक गहलोत को दक्षिणी राज्य में भेजा हुआ है ताकि वह नतीजों से पूर्व गठबंधन की आशंकाओं की संभवना को तलाश सकें। वह मणिपुर, गोवा और मेघालय जैसी परिस्थिति को दोबारा दोहराना नहीं चाहते हैं। जहां सबसे ज्यादा सीटें जीतने के बावजूद कांग्रेस सत्ता पर काबिज होने से चूक गई थी।
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भाजपा के मुख्यमंत्री उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा ने दावा किया है कि पार्टी 222 में से 125 से 130 सीटें जीत लेगी। वर्तमान मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता सिद्धारमैया का कहना है कि उनकी पार्टी को ही दोबारा बहुमत मिलेगा। हालांकि एग्जिट पोल में भाजपा को सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर दिखाया गया है। ऐसे में जेडीएस किंगमेकर की भूमिका निभा सकती है। कुर्सी पाने के लिए दोनों ही पार्टियां गठजोड़ कर रही हैं। रविवार को सिद्धारमैया ने कहा था कि यदि पार्टी दलित चेहरा चाहेगी तो वह अपनी सीट छोड़ने के लिए तैयार हैं।
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सिद्धारमैया के साथी मल्लिकार्जुन खड़गे का कहना है कि वह सीएम की भूमिका निभाने को तैयार हैं लेकिन एक दलित नेता के तौर पर नहीं बल्कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता के तौर पर। यदि कांग्रेस 100-110 सीटें जीतने में नाकाम हो जाती है तो ऐसे में सिद्धारमैया को दूसरा कार्यकाल मिलना संभव नहीं है। इस परिस्थिति में सरकार बनाने के लिए कांग्रेस जेडीएस और बसपा गठबंधन के साथ मिलकर सत्ता हासिल कर सकती है। फिर कांग्रेस खड़गे को मुख्यमंत्री बनाएगी। मायावती ने भी खड़गे का मुख्यमंत्री के तौर पर समर्थन किया है।
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अब तक राज्य में यह रही है दलों की स्थिति
चुनाव से पहले भाजपा जेडीएस को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है। ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि भाजपा ने सिंगापुर में जाकर कुमारस्वामी के साथ बातचीत की जो वहां सर्जरी के लिए गए हुए थे। पार्टी ने कुमारस्वामी को डिप्टी सीएम की सीट और कुछ अहम जिम्मेदारियां देने का वादा किया है। कर्नाटक अकेला ऐसा दक्षिणी राज्य है जहां भाजपा ने साल 2008 में अपने बलबूते पांच साल का कार्यकाल पूरा किया था। भाजपा और उसके सहयोगी दल भारत के 29 राज्यों में से 21 पर शासन कर रहे हैं।
साल के अंत में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में कर्नाटक की जीत भाजपा के लिए काफी अहम है क्योंकि अगले साल लोकसभा चुनाव होने हैं। पीएम मोदी और अमित शाह ने जहां चुनावों में अपनी ताकत दिखाई है वहीं राहुल गांधी ने भी उग्रता के साथ प्रचार किया था।