Book on Guru Nanak: गुरुनानक की नजर में समानता को मानने वाला धार्मिक, उनकी शिक्षा करुणा पर केंद्रित
'द गुरु : गुरुनानक साखी' के विमोचन कार्यक्रम में सत्यार्थी ने यह बात कही। पुस्तक की लेखिका सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी रजनी सेखरी सिब्बल हैं।
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नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने कहा है कि गुरुनानक देव की शिक्षा का मूल केंद्र करुणा है। वे समानता के पुरजोर पैरोकार थे और दुनिया को उदारता, सहृदयता और तर्कपूर्ण नजरिए से देखते थे। उनका मानना था कि जो भी व्यक्ति समानता के अधिकार को मानता है, वह धार्मिक है।
राजधानी दिल्ली में पुस्तक 'द गुरु : गुरुनानक साखी' के विमोचन कार्यक्रम में सत्यार्थी ने यह बात कही। पुस्तक की लेखिका सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी रजनी सेखरी सिब्बल हैं। राजधानी में कोरोना केस एक बार फिर बढ़ने की वजह से सत्यार्थी इस पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में नहीं आ सके थे, इसलिए उनका संदेश पढ़ा गया।
सत्यार्थी ने अपने संदेश में कहा कि गुरुनानक देव के बारे में छोटी-छोटी कहानियों से पता चलता है कि कैसे पांच शताब्दी पहले एक अद्भुत व अकल्पनीय आध्यात्मिक गुरु इस धरती पर आया था। कैलाश सत्यार्थी के अनुसार मौजूदा समय में देश-दुनिया का जो हाल है, उसमें गुरुनानक देव की शिक्षाएं हम सभी को अपनाने की जरूरत है। कैलाश सत्यार्थी के अनुसार मौजूदा दौर में जो दुनिया है वह अपने आप में एक युद्ध सी स्थिति में जी रही है। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता सत्यार्थी का मानना है कि इस समय पूरी दुनिया को सुख, समृद्धि व शांति के लिए गुरुनानक देव की शिक्षाओं को अपनाने की जरूरत है।
दादी से सुनी थी गुरुनानक की कहानियां : रजनी सिब्बल
पुस्तक की लेखिका सिब्बल ने कहा, 'बचपन में मैंने अपनी दादी से गुरुनानक देव की शिक्षाओं को कहानियों के रूप में सुना था और तभी से यह इच्छा थी कि इन्हें किताब के रूप में सभी लोगों तक पहुंचाऊं। मैं गुरुनानक की शिक्षाओं की बड़ी प्रशंसक व अनुयायी रही हूं और हमेशा कोशिश की है कि उनकी शिक्षाओं का पालन करूं।'
राजधानी के इंडिया इंटरनेशन सेंटर में आयोजित पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस और गुरुद्वारा इलेक्शन कमीशन के चेयरमैन एसएस सरोन, जर्मनी के पूर्व राजदूत गुरजीत सिंह, और यूरोपीय संघ के पूर्व राजदूत मनजीव पुरी शरीक हुए। पुस्तक का प्रकाशन स्टोरी मिरर ने किया है।