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एक राष्ट्र-एक चुनाव नया नहीं, देश में पहले चार चुनाव ऐसे ही हुए थे: जस्टिस सीकरी

Wed, 30 Dec 2020 02:41 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Wed, 30 Dec 2020 02:41 AM IST
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Justice Sikri says One nation-one election is not new notion the first four elections were held in the country
एक राष्ट्र-एक चुनाव पर भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया द्वारा आयोजित वेबिनार - फोटो : Twitter@byadavbjp

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस एके सीकरी ने कहा कि एक राष्ट्र-एक चुनाव नई धारणा नहीं है। आजाद भारत के पहले चार आम चुनाव ऐसे ही हुए थे। एक राष्ट्र-एक चुनाव पर भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया द्वारा आयोजित वेबिनार में न्यायपालिका और राजनीति से जुड़ी हस्तियों ने हिस्सा लिया। 

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जस्टिस सीकरी ने कहा, एक राष्ट्र, एक चुनाव प्रक्रिया में बदलाव 1960 से तब शुरू हुआ जब गैर कांग्रेस पार्टियों ने राज्य स्तर पर सरकारें बनाना शुरू किया। इसमें यूपी, बंगाल, पंजाब, हरियाणा शामिल थे। इसके बाद 1969 में कांग्रेस का बंटवारा और 1971 युद्ध के बाद मध्यावधि चुनाव हुए और इसके बाद विधानसभा चुनावों की तारीखें कभी आम चुनाव से नहीं मिलीं और अलग-अलग चुनाव शुरू हो गया। सीकरी ने कहा, अगर अन्य किसी भी आधार को नजरंदाज करते हुए एक राष्ट्र-एक चुनाव की प्रक्रिया को दोबारा अपनाई जाए तो आदर्श स्थिति होगी।
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ओडिशा चुनाव का दिया उदाहरण
राज्यसभा सदस्य भूपेंद्र यादव ने कहा, लोकतंत्र का उद्देश्य सुशासन है और चुनाव इसका जरिया। लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए तीन चीजें जरूरी हैं। विकास के लिए सुसंगति, लोकतांत्रिक मूल्यों की निरंतरता और शासन में पारदर्शिता। उन्होंने ओडिशा का उदाहरण देते हुए कहा, 2019 के विधानसभा चुनाव में लोगों ने बीजद को वोट दिया जबकि लोकसभा के लिए भाजपा को वोट दिया।
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वहीं, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल पराग पी त्रिपाठी ने कहा, चुनाव लोकतंत्र से जुड़े हैं और लोकतंत्र शासन का जरिया है। एक राष्ट्र-एक चुनाव की धारणा 1952 से 1967 तक चली। राज्यों की संप्रभुता और पहचान अलग-अलग चुनाव से मजबूत हुई। देश के अर्ध एवं सहकारी संघवाद के लिए यह एक बेहतर विकल्प है।


365 दिन में 307 दिन रही आचार संहिता
अंत में वेबिनार संयोजक भाटिया ने कहा, एक राष्ट्र-एक चुनाव से संघीय ढांचे को खतरा नहीं है। 2016-17 के 365 दिनों में 307 दिन अलग-अलग जगहों पर चुनाव के कारण आचार संहिता लागू रही। इससे विकास कार्य प्रभावित हुए और खामियाजा देश को उठाना पड़ा। जीएसटी लागू हुआ तो लोगों को लगा था कि यह नामुमकिन है, लेकिन नतीजे सामने हैं। एक देश एक चुनाव का मुद्दा देश के हर नागरिक के जीवन पर असर डालेगा।

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