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जस्टिस बोबडे बोले, अयोध्या पर फैसले का मुझे और सभी को इंतजार
Wed, 30 Oct 2019 08:15 PM IST
अमित मंडल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमित मंडल
Updated Wed, 30 Oct 2019 08:15 PM IST
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जस्टिस एसए बोबड़े
- फोटो : wiki
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18 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस का कार्यभार संभालने जा रहे जस्टिस शरद अरविंद बोबडे ने सरकार और न्यायपालिका को साथ-साथ चलने की बात कही है। एक न्यूज चैनल से बातचीत में जस्टिस बोबडे ने अयोध्या समेत कई मुद्दों पर बातचीत की।
उन्होंने कहा कि सरकार से मेरे संबंध ठीक हैं। साथ ही कहा कि सरकार और न्यायपालिका को साथ चलना होगा।
अयोध्या मामले पर उन्होंने कहा कि अयोध्या पर फैसले का मुझे और सबको इंतजार है। ये फैसला सबके लिए महत्वपूर्ण है। बता दें कि जस्टिस बोबडे इस मामले की सुनवाई कर रही पांच जजों की बेंच में शामिल हैं।
कॉलेजियम के सवाल पर उन्होंने कहा कि ये ठीक तरीके से काम कर रहा है। केंद्र के साथ कोई मतभेद नहीं है।
जस्टिस बोबडे ने दिए हैं कई बड़े फैसले
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस शरद अरविंद बोबडे (एसए बोबडे) उस बेंच के हिस्सा थे, जिन्होंने यह महत्वपूर्ण फैसला दिया था कि आधार कार्ड न होने के आधार पर किसी भारतीय नागरिक को मूल सेवाओं और सरकारी सब्सिडी से वंचित नहीं किया जा सकता है।
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जस्टिस बोबडे ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर और जस्टिस एके सीकरी के साथ सभी प्रकार के पटाखों की बिक्री और स्टॉकिंग पर प्रतिबंध लगाने का आदेश पारित किया था। पीठ ने इसके लिए नए लाइसेंस जारी करने पर भी रोक लगाई थी।
जस्टिस बोबडे ने अपने एक फैसले में डाउन सिंड्रोम से पीड़ित अपने भ्रूण को खत्म करने के लिए एक महिला द्वारा दायर अर्जी खारिज कर दी थी। हाल ही में चल रहे अयोध्या भूमि विवाद के जुड़े मामले में भी वह भी सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की सांविधानिक पीठ में शामिल हैं। जस्टिस बोबडे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं। वर्तमान में वह सुप्रीम कोर्ट में जज होने के साथ ही महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के चांसलर भी हैं।
वकालत से शुरू हुआ था सफर
जस्टिस बोबडे का जन्म 24 अप्रैल, 1956 को महाराष्ट्र के नागपुर में हुआ था। उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय से एलएलबी डिग्री ली है। 1978 में जस्टिस बोबडे ने बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र के सदस्य बने थे। इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ में वकालत की और 1998 में वरिष्ठ वकील बने। वर्ष 2000 में उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट में बतौर एडिशनल जज पदभार ग्रहण किया। इसके बाद वह मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने। 2013 में सुप्रीम कोर्ट में बतौर जज कमान संभाली। जस्टिस बोबडे 23 अप्रैल, 2021 को रिटायर होंगे।
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उन्होंने कहा कि सरकार से मेरे संबंध ठीक हैं। साथ ही कहा कि सरकार और न्यायपालिका को साथ चलना होगा।
अयोध्या मामले पर उन्होंने कहा कि अयोध्या पर फैसले का मुझे और सबको इंतजार है। ये फैसला सबके लिए महत्वपूर्ण है। बता दें कि जस्टिस बोबडे इस मामले की सुनवाई कर रही पांच जजों की बेंच में शामिल हैं।
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कॉलेजियम के सवाल पर उन्होंने कहा कि ये ठीक तरीके से काम कर रहा है। केंद्र के साथ कोई मतभेद नहीं है।
जस्टिस बोबडे ने दिए हैं कई बड़े फैसले
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस शरद अरविंद बोबडे (एसए बोबडे) उस बेंच के हिस्सा थे, जिन्होंने यह महत्वपूर्ण फैसला दिया था कि आधार कार्ड न होने के आधार पर किसी भारतीय नागरिक को मूल सेवाओं और सरकारी सब्सिडी से वंचित नहीं किया जा सकता है।
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जस्टिस बोबडे ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर और जस्टिस एके सीकरी के साथ सभी प्रकार के पटाखों की बिक्री और स्टॉकिंग पर प्रतिबंध लगाने का आदेश पारित किया था। पीठ ने इसके लिए नए लाइसेंस जारी करने पर भी रोक लगाई थी।
जस्टिस बोबडे ने अपने एक फैसले में डाउन सिंड्रोम से पीड़ित अपने भ्रूण को खत्म करने के लिए एक महिला द्वारा दायर अर्जी खारिज कर दी थी। हाल ही में चल रहे अयोध्या भूमि विवाद के जुड़े मामले में भी वह भी सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की सांविधानिक पीठ में शामिल हैं। जस्टिस बोबडे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं। वर्तमान में वह सुप्रीम कोर्ट में जज होने के साथ ही महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के चांसलर भी हैं।
वकालत से शुरू हुआ था सफर
जस्टिस बोबडे का जन्म 24 अप्रैल, 1956 को महाराष्ट्र के नागपुर में हुआ था। उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय से एलएलबी डिग्री ली है। 1978 में जस्टिस बोबडे ने बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र के सदस्य बने थे। इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ में वकालत की और 1998 में वरिष्ठ वकील बने। वर्ष 2000 में उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट में बतौर एडिशनल जज पदभार ग्रहण किया। इसके बाद वह मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने। 2013 में सुप्रीम कोर्ट में बतौर जज कमान संभाली। जस्टिस बोबडे 23 अप्रैल, 2021 को रिटायर होंगे।