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जज ने प्रणव की किताब पर नोटिस देकर वापस लिया, फिर केस से हटीं

Sat, 07 Apr 2018 05:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Updated Sat, 07 Apr 2018 05:36 AM IST
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Justice Pratibha M. Singh withdrew notice on Pranab's book
Pranab Mukherjee

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की किताब ‘द टर्बुलेंट इयर्स-1980-1996’ के एक अंश पर आपत्ति वाली याचिका पर सुनवाई से जज ने बेहद नाटकीय ढंग से खुद को अलग कर लिया।

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हाईकोर्ट जज जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह ने उमेशचंद पांडे व अन्य की ओर से दायर याचिका पर पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी व रूपा पब्लिकेशन को नोटिस दे कर 30 जुलाई तक जवाब मांगा था। इसके कुछ घंटों बाद ही जस्टिस सिंह ने यह नोटिस वापस लेते हुए सुनवाई से इनकार कर दिया। तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की किताब के कुछ अंश पर आपत्ति जताते हुए याचिकाकर्ता ने उन्हें हटाने के लिए जिला अदालत में याचिका दी थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। 
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पटियाला हाउस कोर्ट ने राष्ट्रपति से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए इस मुकदमे को 30 नवंबर 2016 को खारिज कर दिया था। प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रपति पद से सेवानिवृत्ति के बाद फिर से याचिका दायर की गई है। 
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याचिका में कहा गया है कि किताब में लिखा गया है कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी द्वारा 1 फरवरी, 1986 को राम मंदिर का ताला खुलवाना गलत फैसला था। लोग महसूस करते हैं कि इस काम को टाला जा सकता था। याची का दावा है कि यह तथ्य गलत है। राम जन्मभूमि का ताला फैजाबाद के जिला न्यायाधीश के आदेश पर खोला गया था और उस मामले में भी उमेश चंद ही याची थे।  

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