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Assam: 'परीक्षा के दौरान इंटरनेट बंद करने का विचार झारखंड ने असम से सीखा', सीएम सरमा ने सोरेन सरकार पर कसा तंज
Sat, 21 Sep 2024 01:52 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहटी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहटी
Published by: श्वेता महतो
Updated Sat, 21 Sep 2024 01:52 PM IST
सार
असम सरकार ने 15 सितंबर को ग्रेड III पदों पर भर्ती के लिए लिखित परीक्षा के दौरान पूरे राज्य में 10 बजे से लेकर अगले तीन घंटे तक इंटरनेट सेवाओं को निलंबित करने का निर्णय लिया था। इससे पहले अगस्त 2022 में भी परीक्षा के दौरान चार घंटों के लिए मोबाइल इंटरनेट बंद करने का फैसला लिया गया था।
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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि झारखंड ने परिक्षाओं के दौरान इंटरनेट सेवाओं को बंद करने का विचार पूर्वोत्तर राज्यों से सीखा। मोबाइल इंटरनेट सेवाओं का निलंबन सुबह के आठ बजे से शुरू हुआ और दोपहर के डेढ़ बजे तक जारी रहेगा। यह रविवार को भी इंटरनेट सेवाओं का निलंबन जारी रहेगा। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार के इस कदम के बाद असम के सीएम ने कांग्रेस पर तंज कसा।
सीएम सरमा ने कहा, "जब मैंने परिक्षाओं के दौरान इंटरनेट सेवाओं को निलंबित करने का फैसला लिया था, तब कांग्रेस ने इसकी आलोचना की थी। अब झारखंड में उनकी सरकार भी यही कर रही है। वे हमसे सीख रहे हैं। इसका यह मतलब है कि असम देश को रास्ता दिखा रहा है।" झारखंड में विपक्षी पार्टी भाजपा ने इस आदेश को झारखंड सरकार कि विफलता को छिपाने के लिए एक और फरमान करार दिया।
बता दें कि असम सरकार ने 15 सितंबर को ग्रेड III पदों पर भर्ती के लिए लिखित परीक्षा के दौरान पूरे राज्य में 10 बजे से लेकर अगले तीन घंटे तक इंटरनेट सेवाओं को निलंबित करने का निर्णय लिया था। इससे पहले अगस्त 2022 में भी परीक्षा के दौरान चार घंटों के लिए मोबाइल इंटरनेट बंद करने का फैसला लिया गया था।
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हिमंत ने सशस्त्र समूहों से बातचीत के लिए आगे आने को कहा
इस बीच मुख्यमंत्री सरमा ने उग्रवादी समूहों से हिंसा छोड़कर राज्य के विकास के लिए बात करने के लिए आगे आने की अपील की। अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर लिखा, 'हिंसा और आतंक से राज्य का कोई फायदा नहीं है, जबकि चर्चा से असम का एक प्रमुख राज्य के रूप में उत्थान सुनिश्चित होगा।'
असम में यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) के एक गुट समेत कई उग्रवादी संगठनों ने सरकार के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं और पिछले कुछ वर्षों में कई उग्रवादी मुख्यधारा में लौट आए हैं। हालांकि, परेश बरुआ के नेतृत्व वाले उल्फा (इंडीपेन्डेंट) ने अभी तक सरकार के साथ कोई बातचीत नहीं की है।
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सीएम सरमा ने कहा, "जब मैंने परिक्षाओं के दौरान इंटरनेट सेवाओं को निलंबित करने का फैसला लिया था, तब कांग्रेस ने इसकी आलोचना की थी। अब झारखंड में उनकी सरकार भी यही कर रही है। वे हमसे सीख रहे हैं। इसका यह मतलब है कि असम देश को रास्ता दिखा रहा है।" झारखंड में विपक्षी पार्टी भाजपा ने इस आदेश को झारखंड सरकार कि विफलता को छिपाने के लिए एक और फरमान करार दिया।
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बता दें कि असम सरकार ने 15 सितंबर को ग्रेड III पदों पर भर्ती के लिए लिखित परीक्षा के दौरान पूरे राज्य में 10 बजे से लेकर अगले तीन घंटे तक इंटरनेट सेवाओं को निलंबित करने का निर्णय लिया था। इससे पहले अगस्त 2022 में भी परीक्षा के दौरान चार घंटों के लिए मोबाइल इंटरनेट बंद करने का फैसला लिया गया था।
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हिमंत ने सशस्त्र समूहों से बातचीत के लिए आगे आने को कहा
इस बीच मुख्यमंत्री सरमा ने उग्रवादी समूहों से हिंसा छोड़कर राज्य के विकास के लिए बात करने के लिए आगे आने की अपील की। अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर लिखा, 'हिंसा और आतंक से राज्य का कोई फायदा नहीं है, जबकि चर्चा से असम का एक प्रमुख राज्य के रूप में उत्थान सुनिश्चित होगा।'
असम में यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) के एक गुट समेत कई उग्रवादी संगठनों ने सरकार के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं और पिछले कुछ वर्षों में कई उग्रवादी मुख्यधारा में लौट आए हैं। हालांकि, परेश बरुआ के नेतृत्व वाले उल्फा (इंडीपेन्डेंट) ने अभी तक सरकार के साथ कोई बातचीत नहीं की है।