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Jharkhand: झारखंड में पर्यावरण को हो रहे नुकसान पर एनजीटी सख्त, राज्य सरकार को लगाई फटकार
Sun, 19 Mar 2023 09:34 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Sun, 19 Mar 2023 09:34 PM IST
सार
आरोप है कि पहाड़ियों में धमाके किए जा रहे हैं, जिससे बड़ी मात्रा में धूल और मिट्टी के कण हवा और पानी में मिलकर उन्हें दूषित कर रहे हैं। इससे जनता के स्वास्थ्य को गंभीर संकट पैदा हो रहा है।
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एनजीटी
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विस्तार
एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने झारखंड में पर्यावरण नुकसान पर चिंता जाहिर की है और राज्य सरकार को फटकार लगाई है। एनजीटी ने कहा है कि झारखंड सरकार राज्य में पर्यावरण को रहे नुकसान को रोकने में असफल रही है। एक याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने यह बात कही। याचिका में राजमहल पहाड़ी क्षेत्र में खनन के दिशा निर्देशों का गंभीर उल्लंघन होने का आरोप लगाया है। एनजीटी ने मुख्य सचिव को निजी तौर पर आदेश का अनुपालन करने का निर्देश दिया है।
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क्या है याचिका में
बता दें कि एनजीटी में एक याचिका में दाखिल की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया है कि खनन कंपनियां और पत्थर काटने वाली कंपनियां साहेबगंज जिले की राजमहल पहाड़ियों में पर्यावरण संबंधी दिशा निर्देशों का पालन नहीं कर रही हैं। आरोप है कि पहाड़ियों में धमाके किए जा रहे हैं, जिससे बड़ी मात्रा में धूल और मिट्टी के कण हवा और पानी में मिलकर उन्हें दूषित कर रहे हैं। इससे जनता के स्वास्थ्य को गंभीर संकट पैदा हो रहा है।
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एनजीटी ने जताई नाराजगी
याचिका पर सुनवाई करते हुए बेंच के अध्यक्ष जस्टिस एक गोयल ने कहा कि कई आदेशों के बावजूद, जिनमें अवैध खनन और पत्थर काटने की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए गए हैं, बीते पांच सालों में राज्य सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की है, जिसके चलते हालात असंतोषपूर्ण बने हुए हैं। बेंच में जस्टिस सुधीर अग्रवाल और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल भी शामिल थे। बेंच ने मुख्य सचिव से कहा कि कई आदेशों के बावजूद हालात में सुधार नहीं दिख रहा है।
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एनजीटी की बेंच ने कहा कि सवाल ये है कि क्या संविधान से संचालित और कानून आधारित व्यवस्था में ये सब जारी रहेगा। जबकि यह राज्य की अपरिहार्य जिम्मेदारी है कि वह पर्यावरण की रक्षा करे। बेंच ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि हालात सुधरेंगे लेकिन अभी तक झारखंड सरकार पर्यावरण को हो रहे नुकसान को रोकने में पूरी तरह नाकाम रही है। एनजीटी अब इस मामले पर 3 अगस्त को सुनवाई करेगी।