साल में 2 बार होगी नीट-जेईई, प्रवेश परीक्षाओं के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को मिली कमान
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देशभर में अब सीबीएसई नहीं बल्कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) नीट, जेईई, नेट, सीमैट और जीपैट परीक्षाएं कराएगी। केंद्रीय मानव संसाधन एवं विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने शनिवार को इसकी घोषणा की।
यही नहीं अगले साल से मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई (मेन) वर्ष में दो बार आयोजित की जाएगी।लेकिन जेईई एडवांस्ड का जिम्मा आईआईटी के पास ही रहेगा।संभवतः मई 2019 में यह दोनों परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। खास बात है कि दोनों परीक्षाएं केवल ऑनलाइन होंगी।
दो बार परीक्षा कराने का उद्देश्य है की अगर किसी छात्र का एक अटेम्प्ट खराब हुआ है तो उसका साल बर्बाद न हो। वह 6 माह के अंदर ही दोबारा परीक्षा देकर पास कर ले। परीक्षाओं के पाठ्यक्रम व पैटर्न, सिलेबस और भाषा में किसी तरह का परिवर्तन नहीं होगा।
छात्रों को होंगे ये फायदे
ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन (जेईई) मेन
देश भर के आईआईटी और एनआईटी में इंजीनियरिंग कोर्सेज में एडमिशन के लिए जेईई मेन परीक्षा आयोजित होती हैं। इस साल 1.55 लाख छात्रों ने जेईई में अपनी किस्मत अजमाई थी। जिसमें 31,980 छात्रों को योग्य करार दिया गया था। पहले इस परीक्षा की कमान सीबीएसई के हाथों थी लेकिन अब एनटीए इसे आयोजित करेगा। पहले यह परीक्षा साल में एक बार आयोजित होती थी लेकिन अब यह 2 बार आयोजित होगी। पहली परीक्षा जनवरी में आयोजित होगी तो दूसरी परीक्षा अप्रैल में ली जाएगी।
नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट)
मेडिकल में प्रवेश लेने के लिए नीट अनिवार्य है। एमबीबीएस और बीडीएस कोर्सेज में नीट परीक्षा के जरिए ही दाखिला होता है। इस साल 12.67 लाख छात्रों ने इसमें भाग लिया था और 7.12 लाख ने ही इसे पास किया था। पहले इसकी कमान भी सीबीएसई के पास थी लेकिन अब एनटीए की देखरेख में ही यह प्रवेश परीक्षा आयोजित होंगी। परीक्षा फरवीर और मई माह में होंगी। छात्रों को इसका यह फायदा मिलेगा कि वह दोनों परीक्षाओं में शामिल होंगे और दोनों के आधार पर ही एडमिशन का आकलन किया जाएगा।
राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट)
नेट पास करने वाले स्टूडेंट्स किसी भी यूनिवर्सिटी या आयोग द्वारा निकाली जाने वाली असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए योग्य होते हैं। यूजीसी की तरफ से परीक्षा सीबीएसई द्वारा आयोजित की जाती थी लेकिन अब अगल सत्र से इसे एनटीए आयोजित करेगा। पहले जुलाई और दिसंबर में होने वाली यह परीक्षा साल में दो बार आयोजित होती थी लेकिन अब यह साल में सिर्फ एकबार ही आयोजित होगी।
शिक्षा पर केंद्रित रहेगी सीबीएसई
सीबीएसई का तर्क था कि इन परीक्षाओं का आयोजन करने में उनका काफी संसाधन इस्तेमाल होते हैं और उनका काम बुरी तरह प्रभावित होता है। एनटीए के गठन के बाद सीबीएसई टेस्ट कराने की जिम्मेदारी से मुक्त हो गई है और शिक्षा पर केंद्रित रह सकेगी।