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'अम्मा' का अंतिम संस्कार 4.30 बजे के बाद क्यों?

Tue, 06 Dec 2016 03:08 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 06 Dec 2016 03:08 PM IST
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Jayalalithaa: Why funeral procession on Tuesday after 4.30 pm
- फोटो : ANI
1999 में जयरामन जयललिता ने तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार से समर्थन वापस लेकर भारतीय राजनीति को चौंका दिया था। वाजपेयी सरकार से जयललिता के मतभेद तो राजनीतिक थे, लेकिन उनका निर्णय ज्योतिष से प्रभावित था। 
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समर्थन वापस लेने की घोषणा से पहले जयललिता ने नई दिल्ली के एक होटल में स्वयं को कमरे में बंद कर लिया था। उन्होंने किसी से भी मिलने से इंकार कर दिया क्योंकि अमंगलकारी चंद्रमा अपने आठवें स्थान पर था। 
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इसके बाद अपने ज्योतिषी से विचार विमर्श के बाद जयललिता ने वाजपेयी सरकार से एआईएडीएमके का समर्थन वापस ले लिया। समर्थन वापसी का पत्र सुबह के 9 बजे के बाद और 10 बजे से पहले सौंपा गया और इसके लिए 14 अप्रैल की तारीख चुनी गई। 
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इस वाकये से पता चलता है कि जयललिता का ज्योतिष में कितना विश्वास था। 

'अम्मा' का ज्योतिष में विश्वास
एक रूढ़िवादी आयंगर परिवार में पैदा हुई जयरामन जयललिता को अंकशास्त्र और ज्योतिष में गहरा विश्वास था। वे ज्योतिषी से सलाह लिए बिना कुछ भी नहीं करती थीं, जो तमिल कैलेंडर पंचंगम के मुताबिक नहीं होता था। 

जयललिता तमिल कैलेंडर पंचंगम के मुताबिक ही अपने सारे फैसले लेने के लिए जानी जाती थीं। 

अगर उन्हें कोई स्कीम लॉन्च करनी होती थीं, तो तारीख और समय के लिए वह अपने ज्योतिषी से सलाह लेती थीं। नई चीजों को शुरू करने के लिए पंचंगम कैलेंडर के बुधन होराय के मुहुर्त का सहारा लेती थीं।

जयललिता ने एक बार शपथ ग्रहण समारोह को रद्द कर दिया था, क्योंकि उन्हें लगता था कि शपथ ग्रहण का समय अशुभ है। 

नाम में अतिरिक्त 'A' क्यों?

Jayalalithaa: Why funeral procession on Tuesday after 4.30 pm
2001 में जयललिता ने अपने नाम में एक अतिरिक्त 'a' जोड़ा। यह बदलाव एक यज्ञ के बाद किया गया, जब जयललिता ने एक साल पहले तंजावुर के काली मंदिर में यज्ञ किया था।

इस यज्ञ का आयोजन सत्ता में वापसी के लिए किया गया था। 2001 के विधानसभा चुनावों में जयललिता ने ऐसा कर दिखाया और पत्रकारों से कहा गया कि जयललिता का नाम 12 शब्दों में लिखा जाए ना कि 11 शब्दों में। उनका नाम अब  Jayalalitha नहीं Jayalalithaa हो गया था।

5 और 7 अंक को मानती थीं अशुभ 
अपनी जन्मपत्री के विश्लेषण के मुताबिक जयललिता 5 और 7 अंक को अशुभ मानती थीं। उनकी मृत्यु भी 5 तारीख को ही हुई। अपोलो अस्पताल ने बयान में कहा कि तमिलनाडु की अम्मा ने रात को 11.30 बजे अंतिम सांस ली। यानी 6 दिसंबर से मात्र आधे घंटे पहले। 

जयललिता की लोकप्रियता और तमिलनाडु की जनता के साथ उनके जुड़ाव को देखते हुए अम्मा के पार्थिव शरीर को सिर्फ बुधवार तक के लिए रखा जाना स्वाभाविक था। कम से कम उनके चाहने वाले एक बड़ी संख्या में अपनी अम्मा के आखिरी दर्शन कर पाते। 

उनके कद और जनता के साथ जुड़ाव को देखते हुए जयललिता के लिए यह एक शानदार विदाई होती। हालांकि एआईएडीएमके नेताओं ने जयललिता की मौत के बाद 12 घंटे तक इंतजार करना भी उचित नहीं समझा, क्योंकि जयललिता ज्योतिष में विश्वास करती थीं। 

बुधवार को तमिल कैलेंडर पंचंगम के मुताबिक अष्टमी है और जयललिता अष्टमी के दिन कुछ भी नया नहीं करती थीं। फिर उनका आखिरी सफर अष्टमी के दिन क्यों शुरू होगा। अम्मा के अंतिम संस्कार का समय भी ज्योतिष के मुताबिक ही तय किया गया है। 

तमिल कैलेंडर पंचंगम के मुताबिक मंगलवार को दोपहर के 3.30 बजे से 4.30 बजे तक राहु काल है। क्योंकि जयललिता राहु काल के दौरान कुछ भी नहीं करती थीं। ऐसे में अंतिम संस्कार के लिए 4.30 बजे तक इंतजार करना होगा। 
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