अनुच्छेद 35ए को हटाने पर बहस के लिए तैयार है भाजपा, सभी दलों को दी चुनौती
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सुप्रीम कोर्ट में जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 35ए को हटाए जाने के लिए 6 अगस्त को सुनवाई शुरू होने से पहले प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया है। लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने इसे हटाने का विरोध करने वाले सभी दलों को खुली बहस की चुनौती दी है।
भाजपा की जम्मू-कश्मीर शाखा ने शनिवार को कहा कि वे इस बात पर बहस के लिए तैयार हैं कि अनुच्छेद 35ए राज्य की जनता के हित में है या नहीं। प्रदेश भाजपा के मुख्य प्रवक्ता सुनील सेठी ने कहा, हम सभी को बहस के लिए खुला आमंत्रण दे रहे हैं।
उन्होंने कहा, पिछले कुछ दिनों में राज्य का राजनीतिक वातावरण अनुच्छेद 35ए को लेकर गर्माया हुआ है और कुछ राजनीतिक दलों (खासतौर पर जो कश्मीर में सक्रिय हैं) ने इस मुद्दे पर देश विरोध और जनविरोधी रुख अपना लिया है।
इस कारण निवेशक नहीं आते राज्य में
सेठी ने नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, घाटी की जनता को अनुच्छेद 35ए पर यह कहकर गुमराह किया जा रहा है कि ये आपके भले के लिए और राज्य के हित में है। सेठी ने कहा, अनुच्छेद 35ए का जारी रहना राज्य को कोई लाभ नहीं देगा।
केंद्र सरकार पिछले 70 साल में राज्य में करोड़ों रुपये झोंक चुकी है, लेकिन वैसा विकास नहीं हुआ है, जैसा होना चाहिए था। उन्होंने कहा, ये अनुच्छेद राज्य के विकास में बाधक है, क्योंकि ये बाहरी निवेश की अनुमति नहीं देता। निवेशक यहां ढांचागत निर्माण करने नहीं आते और युवाओं को नौकरियां नहीं मिलती।
कांग्रेस-नेशनल कांफ्रेंस ने तो महाराजा को ही राज्य से बाहर किया था
भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि कुछ राजनेता इस मुद्दे को वोटबैंक के लिए बनाए रखना चाहते हैं। उन्होंने नेशनल कांफ्रेंस के प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र सिंह राणा के उस बयान पर आपत्ति जताई, जिसमें राणा ने महाराजा हरि सिंह की तरफ से ही राज्य के हित सुरक्षित रखने के लिए विशेष दर्जे का प्रावधान किए जाने की बात कही थी।
सुनील सेठी ने कहा, नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस ने महाराजा को ही साजिश रचकर राज्य से बाहर कर दिया था और उनके निधन तक वापस नहीं लौटने दिया था। उन्होंने कहा, महाराजा का फैसला एक शाही रियासत के तौर पर था। समझौते के बाद जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा बन गया। जब हम भारत का हिस्सा हैं तो किसी अलग प्रावधान की क्या आवश्यकता है और वह भी ऐसे प्रावधान, जो हमारे विकास में बाधाएं पैदा करते हैं।