11वीं और 12वीं में फेल होने के बाद इस हास्य कलाकार ने पूरी की तीन पीएचडी
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गुजरात के सुरेंद्र नगर के रहने वाले मशहूर हास्य कलाकार सुरेंद्र त्रिवेदी ने अपनी मेहनत लगन से एक नहीं बल्कि तीन पीएचडी कि डिग्री हासिल की हैं। 49 वर्षीय त्रिवेदी ने ठान रखा था कि वो भले ही 11 12 में पहली बार में फेल हो गए हों लेकिन पीएचडी हासिल करके रहेंगे। आज सुरेंद्र के पास डॅाक्टरेट की 3 उपाधियां हैं।
त्रिवेदी अपनी तीनों उपाधियां स्वर्गीय उपन्यासकार देवशंकर मेहता, हास्य कलाकार शहाबुद्दीन राठौड़ और धर्म गुरू मोरारी बापू को श्रद्धांजली के तौर पर समर्पित करते हैं। त्रिवेदी कहते हैं कि, '11-12 में फेल होने के बाद मेरा बहुत मजाक उड़ाया गया था। मुझे पता था कि मैं विज्ञान के लिए नहीं बना हूं।
इसलिए मैंने जल्द ही आर्ट्स में स्विच कर लिया था। मैंने बाद में 12 पास किया और खुद एक कसम खाई थी कि मैं दो डॅाक्टरेट की उपाधि हासिल करके रहूंगा। और यह साबित करूंगा कि मैं सुस्त छात्र नहीं था।'
त्रिवेदी ने दो पीएचडी की कसम खाई थी आज उनके पास तीन पीएचडी हैं
आप को बता दें कि त्रिवेदी ने दो पीएचडी की कसम खाई थी लेकिन आज उनके पास तीन पीएचडी हैं। पीएचडी को सफलता पूर्वक पूरी करने के पीछे उनके विषय का चयन काफी महत्वपूर्ण है। त्रिवेदी बताते हैं कि उन्होंने अपनी पहली पीएचडी स्वर्गीय उपन्यासकार देवशंकर मेहता पर की थी, जिन्हें वो अपना साहित्यिक गुरू मानते हैं।
त्रिवेदी बताते हैं कि मेहता जी ने 63 उपन्यास और 96 छोटी कहानियां लिखीं। वो एक प्रसिद्ध लेखक और किसान थे। दूसरी पीएचडी हास्य कलाकार शहाबुद्दीन राठौड़ पर की जिन्हें त्रिवेदी अपना कलागुरू मानते हैं।
त्रविेदी कहते हैं कि राठौड़ ही वह व्यक्तित्व हैं जिनकी वजह से वो हास्य कलाकार बनें। तीसरी पीएचडी मोरारी बापू पर की है। त्रिवेदी बताते हैं कि कुछ साल पहले बापू उनके घर पर आए थे जब वो शराब के आदी हो चुके थे। बापू के आने के बाद त्रिवेदी ने शराब छोड़ दी थी।
त्रिवेदी की मेहनत लगन उन छात्रों के लिए एक प्रेरणा हो सकती है जो फेल होने के बाद जिंदगी की जंग हार जाते हैं। आपको बता दें कि तच्रिवेदी ने हरिवंशराय बच्चन की 'मधुशाला' का गुजराती में अनुवाद किया है। त्रिवेदी कई सारे अवॉर्ड जीत चुके हैं।
Published by- Amit kumar